राष्ट्रीय ही नहीं वैश्विक त्रासदी के दौर में रामन्दिर शिलान्यास कहाँ तक उचित ?
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भारत लांच करे वैक्सीन
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मिर्जापुर । वैज्ञानिकों के इस दावे में दम दिखाई पड़ता है कि बीमारियों के लिए रिसर्च-वर्क मेडिकल साइंस के बजाय साधु-महात्मा और बाबा कर रहे हैं जिन्हें शरीर विज्ञान की सिर्फ मोटी-मोटी जानकारियां तो हो सकती हैं लेकिन बारीकियों की जानकारियां सिर्फ किताब पढ़ने से नहीं आती हैं ।
चार माह में टेस्टिंग व्यवस्था नहीं-कोरोना के पांव पसारने के चार माह बाद भारत में पर्याप्त अस्पताल, लैब, टेस्टिंग सुविधाएं और वेल्टीनेटर आदि की व्यवस्था नहीं हो सकी है । 10 लाख की आबादी पर कतिपय देशों में प्रतिदिन 20 हजार से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। भारत में टेस्ट, डॉक्टर, लैब, उपकरणों की जबरदस्त कमी है, इसे चार महीने में युद्ध-स्तर पर हो जाना चाहिए था।
प्राइवेट टेस्ट की अनुमति- सरकारी व्यवस्था पर प्रश्न-चिह्न लगाने वाले हल्के लक्षण पर प्राइवेट डॉक्टरों के पास जा रहे हैं। सरकारी अस्पताल *हाऊस-फुल* हैं । ऐसी स्थिति में प्राइवेट डॉक्टरों को भी जांच, उपचार की अनुमति मिलनी चाहिए।
डॉक्टर नियुक्त हों- लोकसेवा आयोग द्वारा नवंबर में डेंटिस्ट डॉक्टरों की लिस्ट निकाली गई। इसके बाद फरवरी में BAMS तथा BHMS डॉक्टरों की भी लिस्ट निकाली गई लेकिन अभी तक उन्हें ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला । जबकि कोरोना काल में नियमित न सही संविदा पर पूरे देश में लाखों डॉक्टर नियुक्त हो गए होते तो उपचार में सहूलियत होती।
कोरोना-काल में राममंदिर- देशव्यापी ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी त्रासदी के दौर में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर के अयोध्या में शिलान्यास का मेल खाता नहीं दिख रहा है। पहली आवश्यकता देश-स्तर में *स्वास्थ्य-मंदिरों* के शिलान्यास की है।
इतिहासकार लिखते हैं- भारत की हजार साल की गुलामी पर अधिकांश इतिहासकार यही लिखते है कि उस दौर में देश सिर्फ पूजा-पाठ के बल पर मुकाबला करता रहा जिससे तुर्क, मुगल, ब्रिटिश जो भी आया भारत पर शासन करता रहा।
विज्ञान मांगे विज्ञान- वैज्ञानिक युग में भारतीय प्रतिभा के विदेश-प्रस्थान को रोक कर स्वास्थ्य, रक्षा, प्रौद्योगिकी हर क्षेत्र में इन प्रतिभाओं का उपयोग करना चाहिए ।
कोरोना का वैक्सीन स्टार्टअप इंडिया के दौर में यदि कोई दूसरा देश कोरोना वैक्सीन लांच करेगा तो भारत को भारी धन व्यय कर उसे आयात करना पड़ेगा। इसलिए भारतीय मेडिकल-विशेषज्ञों को इस काम में लगाना चाहिए।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
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भारत लांच करे वैक्सीन
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मिर्जापुर । वैज्ञानिकों के इस दावे में दम दिखाई पड़ता है कि बीमारियों के लिए रिसर्च-वर्क मेडिकल साइंस के बजाय साधु-महात्मा और बाबा कर रहे हैं जिन्हें शरीर विज्ञान की सिर्फ मोटी-मोटी जानकारियां तो हो सकती हैं लेकिन बारीकियों की जानकारियां सिर्फ किताब पढ़ने से नहीं आती हैं ।
चार माह में टेस्टिंग व्यवस्था नहीं-कोरोना के पांव पसारने के चार माह बाद भारत में पर्याप्त अस्पताल, लैब, टेस्टिंग सुविधाएं और वेल्टीनेटर आदि की व्यवस्था नहीं हो सकी है । 10 लाख की आबादी पर कतिपय देशों में प्रतिदिन 20 हजार से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। भारत में टेस्ट, डॉक्टर, लैब, उपकरणों की जबरदस्त कमी है, इसे चार महीने में युद्ध-स्तर पर हो जाना चाहिए था।
प्राइवेट टेस्ट की अनुमति- सरकारी व्यवस्था पर प्रश्न-चिह्न लगाने वाले हल्के लक्षण पर प्राइवेट डॉक्टरों के पास जा रहे हैं। सरकारी अस्पताल *हाऊस-फुल* हैं । ऐसी स्थिति में प्राइवेट डॉक्टरों को भी जांच, उपचार की अनुमति मिलनी चाहिए।
डॉक्टर नियुक्त हों- लोकसेवा आयोग द्वारा नवंबर में डेंटिस्ट डॉक्टरों की लिस्ट निकाली गई। इसके बाद फरवरी में BAMS तथा BHMS डॉक्टरों की भी लिस्ट निकाली गई लेकिन अभी तक उन्हें ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला । जबकि कोरोना काल में नियमित न सही संविदा पर पूरे देश में लाखों डॉक्टर नियुक्त हो गए होते तो उपचार में सहूलियत होती।
कोरोना-काल में राममंदिर- देशव्यापी ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी त्रासदी के दौर में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर के अयोध्या में शिलान्यास का मेल खाता नहीं दिख रहा है। पहली आवश्यकता देश-स्तर में *स्वास्थ्य-मंदिरों* के शिलान्यास की है।
इतिहासकार लिखते हैं- भारत की हजार साल की गुलामी पर अधिकांश इतिहासकार यही लिखते है कि उस दौर में देश सिर्फ पूजा-पाठ के बल पर मुकाबला करता रहा जिससे तुर्क, मुगल, ब्रिटिश जो भी आया भारत पर शासन करता रहा।
विज्ञान मांगे विज्ञान- वैज्ञानिक युग में भारतीय प्रतिभा के विदेश-प्रस्थान को रोक कर स्वास्थ्य, रक्षा, प्रौद्योगिकी हर क्षेत्र में इन प्रतिभाओं का उपयोग करना चाहिए ।
कोरोना का वैक्सीन स्टार्टअप इंडिया के दौर में यदि कोई दूसरा देश कोरोना वैक्सीन लांच करेगा तो भारत को भारी धन व्यय कर उसे आयात करना पड़ेगा। इसलिए भारतीय मेडिकल-विशेषज्ञों को इस काम में लगाना चाहिए।
© सलिल पांडेय, मिर्जापुर।


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