ब्यूरो रिपोर्ट
अयोध्या: अयोध्या में श्रीराम मंदिर जन्मभूमि पर भूमि पूजन की तैयारियों तथा पूजा के कार्यक्रम में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण काफी बदलाव किया गया है। इसी क्रम में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में हनुमानगढ़ी से जो हनुमान निशान जाना था, अब वो नहीं जाएगा। हनुमानगढ़ी में ही उसकी विशेष पूजा की गई है।
आपको बता दें कि, अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में एक विशेष 'हनुमान निशान' है जो करीब सात सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। यह चार मीटर चौड़ा और आठ मीटर लंबा ध्वज है। इसके साथ ही एक गदा और एक त्रिशूल है, जिसे करीब 20 लोग हनुमानगढ़ी से रामजन्मभूमि स्थल पर ले जाते हैं। कोरोना वायरस संकट के कारण इसको टाला गया है। इसी कारण विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े लोगों के साथ हनुमानगढ़ी मंदिर में पुजारियों ने हनुमान निशान की विशेष पूजा की। पहले सुबह नौ बजे इस निशान को रामजन्मभूमि ले जाना था। इस मौके पर संतोंं और राम भक्तों का उत्साह चरम पर दिखा। कोई भगवा लहरा रहा था, तो कोई हनुमान जी का वेश धारण कर आनंद मग्न था।
परंपरा के मुताबिक, हर पूजा से पहले हनुमान निशान राम जन्मभूमि स्थल में जाता है। कोई शुभ कार्य होता है, तो हनुमान निशान की पूजा पहले की जाती है। वहां से ही निशान को ले जाया जाता है, ऐसा ही भूमि पूजन के लिए होना था। हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी राजू दास का कहना है कि हनुमानगढ़ी का निशान भूमि पूजन के दौरान नहीं ले जाया जाएगा। पहले जाने का कार्यक्रम था लेकिन विश्व हिंदू परिषद और सब लोगों ने मिलकर यह फैसला किया है और इसकी पूजा आज हनुमानगढ़ी में की गई है।
नाका हनुमानगढ़ी को देसी घी के दीपों से सज्जित करने की तैयारी है, तो एक आध्यात्मिक संस्था की ओर से अयोध्या के सभी शिवालयों और सरयू तट को देसी घी के दीपों से आच्छादित करने की तैयारी की गई है।वहीं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लोगों से भूमिपूजन के अवसर पर चार व पांच अगस्त को पूजन, अनुष्ठान और शाम को दीपोत्सव का आह्वान किया है। इस आह्वान को अयोध्या ने शिद्दत से शिरोधार्य किया है। न केवल ट्रस्ट एवं संघ परिवार सहित भाजपा व उसके अन्य सहयोगी संगठनों की ओर से दीपोत्सव को सफल बनाने के लिए लोगों तक आवश्यक संसाधन भी मुहैया कराए जा रहे हैं, बल्कि रामनगरी के साधु-संत भी अपने स्तर से दीपोत्सव मनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


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