रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: लालगंज की धरती पर अमर शहीद वीरा पासी का जन्म दिवस उनकी स्मृति के रुप में बीरवर बीरा पासी ट्रस्ट द्वारा नगर पंचायत प्रांगण में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के मुख्य संयोजक सुशील पासी उपस्थित रहे।
आपको बता दें कि, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री पासी ने धर्म संप्रदाय और जात पात की राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर बखिया उधेड़ी और कहा कि, वीरा पासी देश के लिए शहीद हुए थे वे किसी एक जाति या किसी एक धर्म के लिए नही लड़े थे।भारत के समस्त नागरिकों को जब तक समस्त क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा या भागीदारी नहीं मिलेगी तब तक बीरा पासी के सपनों का भारत नहीं बन सकता हैं।
उन्होंने कहा कि, देश की आजादी में हर जाति और धर्म के लोगों ने अपना खून बहाया है। राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पासी ने शहीदों का चरित्र चित्रण करते हुए कहा कि, 1857 की प्रथम क्रांति के महानायक राणा बेनी माधव सिंह को जब अंग्रेजों ने कैद कर लिया था। तब बीरा पासी ने ही अपने पराक्रम (बल बुद्धि) के कौशल से ही राना बेनी माधव सिंह को अंग्रेजों के चंगुल से बचाया था। आज के युवाओं को देश के लिए शहीद हुए वीरों से प्रेरणा लेनी चाहिए। सियासत करने वालों ने हमें आपस में लड़वाया, जिससे देश कमजोर हुआ है। यह देश भाईचारे और बंधुत्व से चलेगा। हमारी वसुधैव कुटुंबकम हमारे विश्व गुरु बनने की ओर एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि, हमारा समाज सामाजिक रूप से एक जगह संगठित होता है, हम सब मिलकर सामाजिक सम्मेलन तो करते हैं, परंतु अब हमें जरूरत है राजनीतिक रूप से संगठित होने की, साथ ही हम लोगों को प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका तय करनी होगी ताकि सब आपस में संगठित होकर, मजबूत होकर नए भारत का निर्माण कर सकें।
उन्होंने बीरा पासी की जीवनी का वर्णन करते हुए, बताया कि बैसवारा की धरती पर शत्तावनी स्वाधीनता समर के महानायक वैसवंश भूषण नरकेहरी राणा बेनी माधव की शौर्य गाथा पूर्ण, उनके सेनानायक बीरवर बीरा पासी की अतुलनीय बीरता को अपने में समाविष्ट करती है। उक्त उद्गार बैसवारा की पावन धरती लालगंज के नगर पंचायत कार्यालय प्रांगण में बीरवर बीरा पासी के जन्म दिवस के अवसर पर मंच से हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुशील पासी व्यक्त कर रहे थे।
विदित हो कि, कार्य क्रम के बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील पासी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में वर्तमान भीरा गोविंदपुर से 4 किलोमीटर उत्तर स्थित सराय द्विगोसा ग्राम में पिता सुखवा व माता सुरजा के घर जन्मे बीरा के बचपन का नाम हीरा था। प्रचंड गरीबी के बीच पले बढ़े बीरा का बचपन कठिनाइयों में बीता। छोटी आयु में ही माता पिता स्वर्गवासी हो गए, उसके उपरांत वह बहन बतासिया के घर गोविंदपुर चले आए। उनकी बहन उन्हें बीरन कहकर पुकारती थी। आगे चलकर स्नेहवस सभी उन्हें बीरा कह कर संबोधित करने लगे।
उन्होंने बीरा पासी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आगे बताया कि, युवावस्था की दहलीज में कदम रखने पर बहन ने अपने बीरन को खाने-पीने के साधन जुटाए जिससे वे परंपरागत रूप से अखाड़े में जाने लगे। बीरा अपने विकसित बल, पौरूष एवं कुश्ती कला की निपुणता के कारण आकर्षण का केंद्र बने। अनपढ़ होने के बावजूद भी बुद्धिमान युवक बीरा पासी बिरादरी के मुखिया बनाए गए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि ने शिक्षा के क्षेत्र से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह तथा अंग वस्त्र से सम्मानित किया व बीरवर बीरा पासी ट्रस्ट के सदस्यों को उक्त कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया।
इस मौके पर राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के जिला प्रभारी सुरेन्द्र मौर्य, जिला अध्यक्ष यशपाल एडवोकेट, जिला महासचिव शिवप्रसाद, विजय कुमार, इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर योगेश, राजेश वर्मा समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
रायबरेली: लालगंज की धरती पर अमर शहीद वीरा पासी का जन्म दिवस उनकी स्मृति के रुप में बीरवर बीरा पासी ट्रस्ट द्वारा नगर पंचायत प्रांगण में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के मुख्य संयोजक सुशील पासी उपस्थित रहे।
आपको बता दें कि, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री पासी ने धर्म संप्रदाय और जात पात की राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर बखिया उधेड़ी और कहा कि, वीरा पासी देश के लिए शहीद हुए थे वे किसी एक जाति या किसी एक धर्म के लिए नही लड़े थे।भारत के समस्त नागरिकों को जब तक समस्त क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा या भागीदारी नहीं मिलेगी तब तक बीरा पासी के सपनों का भारत नहीं बन सकता हैं।
उन्होंने कहा कि, देश की आजादी में हर जाति और धर्म के लोगों ने अपना खून बहाया है। राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पासी ने शहीदों का चरित्र चित्रण करते हुए कहा कि, 1857 की प्रथम क्रांति के महानायक राणा बेनी माधव सिंह को जब अंग्रेजों ने कैद कर लिया था। तब बीरा पासी ने ही अपने पराक्रम (बल बुद्धि) के कौशल से ही राना बेनी माधव सिंह को अंग्रेजों के चंगुल से बचाया था। आज के युवाओं को देश के लिए शहीद हुए वीरों से प्रेरणा लेनी चाहिए। सियासत करने वालों ने हमें आपस में लड़वाया, जिससे देश कमजोर हुआ है। यह देश भाईचारे और बंधुत्व से चलेगा। हमारी वसुधैव कुटुंबकम हमारे विश्व गुरु बनने की ओर एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि, हमारा समाज सामाजिक रूप से एक जगह संगठित होता है, हम सब मिलकर सामाजिक सम्मेलन तो करते हैं, परंतु अब हमें जरूरत है राजनीतिक रूप से संगठित होने की, साथ ही हम लोगों को प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका तय करनी होगी ताकि सब आपस में संगठित होकर, मजबूत होकर नए भारत का निर्माण कर सकें।
उन्होंने बीरा पासी की जीवनी का वर्णन करते हुए, बताया कि बैसवारा की धरती पर शत्तावनी स्वाधीनता समर के महानायक वैसवंश भूषण नरकेहरी राणा बेनी माधव की शौर्य गाथा पूर्ण, उनके सेनानायक बीरवर बीरा पासी की अतुलनीय बीरता को अपने में समाविष्ट करती है। उक्त उद्गार बैसवारा की पावन धरती लालगंज के नगर पंचायत कार्यालय प्रांगण में बीरवर बीरा पासी के जन्म दिवस के अवसर पर मंच से हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुशील पासी व्यक्त कर रहे थे।
विदित हो कि, कार्य क्रम के बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील पासी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में वर्तमान भीरा गोविंदपुर से 4 किलोमीटर उत्तर स्थित सराय द्विगोसा ग्राम में पिता सुखवा व माता सुरजा के घर जन्मे बीरा के बचपन का नाम हीरा था। प्रचंड गरीबी के बीच पले बढ़े बीरा का बचपन कठिनाइयों में बीता। छोटी आयु में ही माता पिता स्वर्गवासी हो गए, उसके उपरांत वह बहन बतासिया के घर गोविंदपुर चले आए। उनकी बहन उन्हें बीरन कहकर पुकारती थी। आगे चलकर स्नेहवस सभी उन्हें बीरा कह कर संबोधित करने लगे।
उन्होंने बीरा पासी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आगे बताया कि, युवावस्था की दहलीज में कदम रखने पर बहन ने अपने बीरन को खाने-पीने के साधन जुटाए जिससे वे परंपरागत रूप से अखाड़े में जाने लगे। बीरा अपने विकसित बल, पौरूष एवं कुश्ती कला की निपुणता के कारण आकर्षण का केंद्र बने। अनपढ़ होने के बावजूद भी बुद्धिमान युवक बीरा पासी बिरादरी के मुखिया बनाए गए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि ने शिक्षा के क्षेत्र से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह तथा अंग वस्त्र से सम्मानित किया व बीरवर बीरा पासी ट्रस्ट के सदस्यों को उक्त कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया।

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