बैसवारा की भूमि जिन्हें जन्म देकर गौरवान्वित हुई वह बीर बीरा पासी था-सुशील पासी।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी
लालगंज/रायबरेली: बैसवारा की धरती पर शत्तावनी स्वाधीनता समर के महानायक वैसवंश भूषण नरकेहरी राणा बेनी माधव की शौर्य गाथा पूर्ण, उनके सेनानायक बीरवर बीरा पासी की अतुलनीय बीरता को अपने में समाविष्ट करती है। उक्त उद्गार बैसवारा की पावन धरती लालगंज के नगर पंचायत कार्यालय प्रांगण में बीरवर बीरा पासी के जन्म दिवस के अवसर पर मंच से हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुशील पासी व्यक्त कर रहे थे।
     आपको बता दें कि, कार्य क्रम के बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय भागीदारी मिशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील पासी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में वर्तमान भीरा गोविंदपुर से 4 किलोमीटर उत्तर स्थित सराय द्विगोसा ग्राम में पिता सुखवा व माता सुरजा के घर जन्मे बीरा के बचपन का नाम हीरा था। प्रचंड गरीबी के बीच पले बढ़े बीरा का बचपन कठिनाइयों में बीता। छोटी आयु में ही माता पिता स्वर्गवासी हो गए, उसके उपरांत वह बहन बतासिया के घर गोविंदपुर चले आए। उनकी बहन उन्हें बीरन कहकर पुकारती थी। आगे चलकर स्नेहवस सभी उन्हें बीरा कह कर संबोधित करने लगे।
    उन्होंने बीरा पासी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आगे बताया कि, युवावस्था की दहलीज में कदम रखने पर बहन ने अपने बीरन को खाने-पीने के साधन जुटाए जिससे वे परंपरागत रूप से अखाड़े में जाने लगे। बीरा अपने विकसित बल, पौरूष एवं कुश्ती कला की निपुणता के कारण आकर्षण का केंद्र बने। अनपढ़ होने के बावजूद भी बुद्धिमान युवक बीरा पासी बिरादरी के मुखिया बनाए गए।

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