रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: ठेकेदारी प्रथा के अंदर अधिकारियों की मिलीभगत से किस तरह के कार्य कराए जाते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण बछरावां के बगल से निकलने वाली शारदा सहायक नहर की पटरीयों में देखा जा सकता है। इस बार कायदे की बरसात भी नहीं हुई, हल्की फुल्की बरसात में ही नहर की पटरी इस कदर ध्वस्त हो चुकी हैं कि, उन पर पैदल तथा वाहनों से चलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि, कुछ दिन पूर्व जब इन पटरियों को ठेकेदार के द्वारा सही कराया जा रहा था, तब इन पर कम मिट्टी डालने की शिकायत की गई थी, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। नियमानुसार विभाग के उच्चाधिकारियों एक्सीऍन से लेकर ऎई आदि को दौरा कर नहर की पोजीशन तथा पटरियों की हालत देखनी होती है।
सवाल ये उठता है कि, जब इन पटरियों की हालत इतनी बदहाल है, तो यह अधिकारी कैसे दौरा करते होंगे। यहां पटरियों की हालत देख कर, तो ऐसा ही प्रतीत होता है, किन्तु अधिकारियों के द्वारा फर्जी दौरे दिखाए जाते हैं, या फिर देख कर भी अंजान बने रहते हैं। क्षेत्रीय जनता की मांग है कि, तत्काल प्रभाव से पटरियों की वास्तविक स्थिति से विभाग के उच्चाधिकारियों तथा सरकार को अवगत करा कर इनको दुरुस्त कराया जाए।


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