आखिर यूं ही नहीं कोई जननायक बन जाता है

राहुल गांधी शपथ लेने के लिए गए हुए थे, उन्होंने अपनी शपथ लेने के बाद स्पीकर साहब से हाथ मिलाया और उसके बाद वह लौटने लगे, वैसे ही उनके दिमाग में कुछ आया और वह वापस लौटे तथा स्पीकर के पास खड़े व्यक्ति से भी हाथ मिलाया इसके अलावा एक व्यक्ति थोड़े दूर खड़े थे तो उनसे दूर से ही अभिवादन कर लिया। यह है सम्मान, समता, बराबरी। राहुल गांधी ने सबका दिल जीत लिया है।

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