◆22 में से 17 जनरल, 3 ओबीसी, 2 एससी की हुई नियुक्ति
◆सबका साथ, सबका विकास का नारा जुमला साबित हुआ
◆महामहिम राज्यपाल को भेजा फैक्स
◆अल्पसंख्यकों पर विचार ही नहीं किया गया
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्व डीजीसी (फौ) ओ.पी. यादव ने रायबरेली जनपद में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में अपनायी गयी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
आपको बता दें कि, श्री यादव ने कहा कि, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में सबका साथ, सबका विकास का नारा एक बार फिर जुमला साबित हुआ। इन नियुक्त्यिों में भाजपा का असली मनुवादी चेहरा बेनकाब हो गया है। एल.आर. मैनुवल के अन्तर्गत शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाती है। उ0प्र0 में सविधान के तहत प्रदत्त आरक्षण की व्यवस्था को दरकिनार कर नियुक्तियाँ की गयी हैं।
जिले में 22 शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों की गयी है, जिसमें 17 जनरल, 3 ओ.बी.सी. व 2 एस.सी. संवर्ग के अधिवक्ता नियुक्त किये गये। अल्पसंख्यकों के प्रार्थना-पत्र पर विचार ही नहीं किया गया। चुनाव के समय भाजपा पिछड़े एवं दलितों को बहुत सपने दिखाये, तरह-तरह के शब्जबाग दिखाये, लेकिन सरकार बनने के बदा इन वर्गो को ठेंगा दिखा दिया। देश की कुल आबादी में 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग के लोग हैं।
85 प्रतिशत में अन्य लोग हैं, लेकिन इन शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में 85 प्रतिशत में से सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों की नियुक्तियाँ की गयी है और 15 प्रतिशत में से 80 प्रतिशत लोगों की नियुक्तियाँ की गई है।
सत्ता पक्ष में बैठे पिछड़े-दलित व अल्पसंख्यक वर्ग के सांसद, विधायक व संगठन के पदाधिकारियां के लिए यह चुनौती भी है और आईना भी, जिनके सामने उनके संवर्ग के लोगों के अधिकारों पर डाका डालता जाता है। वह मूकदर्शक बने, सबको देखने को मजबूर रहते हैं। श्री यादव ने महामहिम राज्यपाल को फैक्स भेजकर शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में आरक्षण का नियमतः पालन करते हुए फिर से नियुक्तियां किये जाने की मांग की है।
◆सबका साथ, सबका विकास का नारा जुमला साबित हुआ
◆महामहिम राज्यपाल को भेजा फैक्स
◆अल्पसंख्यकों पर विचार ही नहीं किया गया
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्व डीजीसी (फौ) ओ.पी. यादव ने रायबरेली जनपद में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में अपनायी गयी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
आपको बता दें कि, श्री यादव ने कहा कि, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में सबका साथ, सबका विकास का नारा एक बार फिर जुमला साबित हुआ। इन नियुक्त्यिों में भाजपा का असली मनुवादी चेहरा बेनकाब हो गया है। एल.आर. मैनुवल के अन्तर्गत शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाती है। उ0प्र0 में सविधान के तहत प्रदत्त आरक्षण की व्यवस्था को दरकिनार कर नियुक्तियाँ की गयी हैं।
जिले में 22 शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों की गयी है, जिसमें 17 जनरल, 3 ओ.बी.सी. व 2 एस.सी. संवर्ग के अधिवक्ता नियुक्त किये गये। अल्पसंख्यकों के प्रार्थना-पत्र पर विचार ही नहीं किया गया। चुनाव के समय भाजपा पिछड़े एवं दलितों को बहुत सपने दिखाये, तरह-तरह के शब्जबाग दिखाये, लेकिन सरकार बनने के बदा इन वर्गो को ठेंगा दिखा दिया। देश की कुल आबादी में 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग के लोग हैं।
85 प्रतिशत में अन्य लोग हैं, लेकिन इन शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में 85 प्रतिशत में से सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों की नियुक्तियाँ की गयी है और 15 प्रतिशत में से 80 प्रतिशत लोगों की नियुक्तियाँ की गई है।
सत्ता पक्ष में बैठे पिछड़े-दलित व अल्पसंख्यक वर्ग के सांसद, विधायक व संगठन के पदाधिकारियां के लिए यह चुनौती भी है और आईना भी, जिनके सामने उनके संवर्ग के लोगों के अधिकारों पर डाका डालता जाता है। वह मूकदर्शक बने, सबको देखने को मजबूर रहते हैं। श्री यादव ने महामहिम राज्यपाल को फैक्स भेजकर शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में आरक्षण का नियमतः पालन करते हुए फिर से नियुक्तियां किये जाने की मांग की है।
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