शिक्षक महान
सामाजिक मान्यताएं अच्छी से पूरी कर
कदम गलत पड़े नहीं, फूंक - फूंक चिंतन कर
सबसे सम्मानित हो, मन मे प्रफुल्लित हो
अंधकार दूर कर रास्ता दिखाता है
गुरुता का बोझ लिए घिसता ही जाता है
शिक्षक कहलाता हैl
कष्टों पर हँसता हैं जहर पी जाता है
कटु शब्द मुँह पर न आते रास्ता दिखाता है
खुश रहो, सुखी रहो कहता ही जाता है
सभी जन प्रसन्न रहे मन से मनाता है
शिक्षक कहलाता है
भावनायें तो इसके भी हैं कभी सोचता कभी तिलमिलाता है
दर्द और ख़ुशी तो इसको भी होती है
गजब की सहनशक्ति कहाँ से लाता है?
भावनाओं को दबाकर सामान्य हो जाता है
शिक्षक कहलाता है
कार्य योजना सटीक बनाता है
धन की कमी से कभी पूरी न कर पता है
आशावान है बहुत आशा दिलाता है
कोई कमी रह गयी - मन मे बड़बड़ाता है
ऊर्जावान है बहुत फिर से जुट जाता है
शिक्षक कहलाता है
मर्यादा मे बंधा हुआ सबको समझाता है
घर मे पड़ अलग-थलग आदर्श ही पकाता है
पत्नी को प्यार कर शब्दों का तोहफा दे,
बच्चों की मांगो को देखा-अनदेखा कर
कठिन श्रम, लक्ष्य याद उनको ही कराता है
शिक्षक कहलाता है
ईश्वर से बड़ा दर्जा कहते सभी है मिला
कर्तव्य बहुत मिले अधिकार कहाँ मिला?
इह लोक परलोक दोनो मध्य पिसता और पिसाता है
ईश्वर को धन्यवाद, बच्चों का भविष्य देख हँसता-खिलखिलाता है
शिक्षक कहलाता है
रचयिता -
कमल बाजपेयी प्रधानाचार्य महावीर स्टडी इस्टेट

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