सलिल पांडेय
मिर्जापुर: शादी-विवाह का लग्न शुरू हो गया है। विवाह समारोह में रात के समय दावत में कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थ दिए जाते हैं, वह स्वास्थ्य के प्रतिकूल होते हैं। अतः आयोजकों से और हलवाइयों को चाहिए कि, वे इन पदार्थों को न रखें। खाने वालों को भी इन पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग एवं खाद्य विभाग भी इस तरह की जागरूकता पैदा करे।---
सलाद न खाएं- हर दावत में सलाद रखा जाता है । सलाद कटने के 10 से 15 मिनट के अंदर प्रदूषित होने लगता है । इसमें कुछ अति सूक्ष्म वैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं । घर में भी सलाद तत्काल कटा खाना चाहिए।
रात में दही- दावत में रात के समय दही से बनी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। बहुत जगहों पर दूध भी रखा जाता है। दूध-दही के खाने में कम से कम 45 मिनट का अंतराल होना चाहिए। वरना पेट में विपरीत रासायनिक क्रियाएं होती हैं।
प्लेट के हिसाब से भोजन के ऑर्डर में प्रायः खराब पनीर का प्रयोग होता है । मसाले आदि के प्रयोग से उसे ढक दिया जाता है । अतः इसपर सावधानी बरतनी चाहिए।
एल्युमिनियम के बर्तन- इसमें बनाए और रखे समान से खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता नष्ट तो होती ही है, साथ ही उसमें नुकसान देने वाले तत्व पैदा होते हैं । घर में भी एल्युमिनियम के बर्तन बदल देना चाहिए । कूकर स्टील का प्रयोग करें ।
प्लास्टिक की थाली- इस तरह की थाली में गर्म पदार्थ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
बफे सिस्टम- जूता पहनकर और घूम घूम कर बात करते हुए भोजन से पाचनतंत्र बिगड़ता है । अतः जूता उतार कर एवं कहीं एक जगह स्थिर होकर संभव हो तो बैठक भोजन करें ।
जरूरत है कि, स्वयंसेवी संस्थाएं इसके लिए 'जागो भोजनकर्त्ता जागो' अभियान चलाएं।
मिर्जापुर: शादी-विवाह का लग्न शुरू हो गया है। विवाह समारोह में रात के समय दावत में कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थ दिए जाते हैं, वह स्वास्थ्य के प्रतिकूल होते हैं। अतः आयोजकों से और हलवाइयों को चाहिए कि, वे इन पदार्थों को न रखें। खाने वालों को भी इन पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग एवं खाद्य विभाग भी इस तरह की जागरूकता पैदा करे।---
सलाद न खाएं- हर दावत में सलाद रखा जाता है । सलाद कटने के 10 से 15 मिनट के अंदर प्रदूषित होने लगता है । इसमें कुछ अति सूक्ष्म वैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं । घर में भी सलाद तत्काल कटा खाना चाहिए।
रात में दही- दावत में रात के समय दही से बनी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। बहुत जगहों पर दूध भी रखा जाता है। दूध-दही के खाने में कम से कम 45 मिनट का अंतराल होना चाहिए। वरना पेट में विपरीत रासायनिक क्रियाएं होती हैं।
प्लेट के हिसाब से भोजन के ऑर्डर में प्रायः खराब पनीर का प्रयोग होता है । मसाले आदि के प्रयोग से उसे ढक दिया जाता है । अतः इसपर सावधानी बरतनी चाहिए।
एल्युमिनियम के बर्तन- इसमें बनाए और रखे समान से खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता नष्ट तो होती ही है, साथ ही उसमें नुकसान देने वाले तत्व पैदा होते हैं । घर में भी एल्युमिनियम के बर्तन बदल देना चाहिए । कूकर स्टील का प्रयोग करें ।
प्लास्टिक की थाली- इस तरह की थाली में गर्म पदार्थ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
बफे सिस्टम- जूता पहनकर और घूम घूम कर बात करते हुए भोजन से पाचनतंत्र बिगड़ता है । अतः जूता उतार कर एवं कहीं एक जगह स्थिर होकर संभव हो तो बैठक भोजन करें ।
जरूरत है कि, स्वयंसेवी संस्थाएं इसके लिए 'जागो भोजनकर्त्ता जागो' अभियान चलाएं।
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