अतीत के पन्ने: जानवर भी मानव की तरह बोलते हैं, कुत्ताबोला-Don hunger, kitchen haven और महिला डर गयी

मिर्जापुर: लगभग 110 वर्ष पूर्व यूरोप एवं अमेरिका के कुछ प्राणिशास्त्र के विशेषज्ञों ने दावा किया था कि पशु भी जानवरों की तरह बोल सकते है । इन्हीं विशेषज्ञों में शिक्षकीय सेवा में लगे वेल, बूसलर,  किनेमैन, कार्नेस तथा गार्नर का उल्लेख मिलता है । इन्हीं में वेल के पिता डॉक्टर थे और इस कार्य में उन्हें सफलता मिली थी । 
    वर्ष 1913 में इंडियन प्रेस, इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित होने वाली अपने समय की मानक मासिक पत्रिका 'सरस्वती' के भाग 14, खण्ड 1 के पृष्ठ संख्या 158 पर 'पशुओं में बोलने की शक्ति' आलेख छपा है । संपादकीय टिप्पणी में दावा किया गया है डॉ वेल के पिता चिकित्सक थे । जो मनुष्य के तोतलेपन का इलाज करते थे । चिकित्सकीय परिवेश में रहने के कारण डॉ वेल के मन मे आया कि क्या पशु भी बोल सकते हैं, इस क्षेत्र में प्रयास किया जाए । उन्होंने एक कुत्ता पाला और उसे 'मामा' (Mamma), दादी (Grand Mamma) का अभ्यास कराया । इसी के साथ  How are you, Grand-Mamma)-दादी, कैसी तबियत है- यह वाक्य सिखाया । डॉ वेल ने एक बंदर को अंग्रेजी वर्णमाला साफ साफ लिखने का भी अभ्यास कराया । इस बन्दर का नाम पीटर रखा था । डॉ वेल का मानना था कि शब्द कण्ठ से निकलते है जो मनुष्य से ज्यादे पशुओं के प्रभावी हो सकते हैं । जबकि पक्षियों में ज्यादा परिश्रम करना पड़ता है । उनका मानना था कि पशुओं में यह क्रिया तोता-रटन्त नहीं बल्कि स्वाभाविक मानसिक विकास के तहत किया जा सकता है । डॉन नामक यह कुत्ता स्कूल आते जाते बच्चों से भी बात करता था । इस बात का प्रचार होने पर कई विद्वानों के साथ डॉ बूसलर नाम के वैज्ञानिक ने परीक्षण भी किया और इसे फोनोग्राफ में टेप भी किया ।
      एक बार एक बूढ़ी महिला खाने का कुछ सामान लेकर जा रही थी । डॉन उसके पास पहुंचा । जर्मन भाषा मे बोला- डॉन को भूख लगी है, रोटी दो ( Don hunger, kitchen haven) । यह सुनकर महिला घबरा गई कि कुत्ता शायद भूतग्रस्त है और सब खाना फेंक कर भाग गई ।
     उक्त विस्तृत आलेख के सारांश लिखने के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि आधुनिक जगत को इस दिशा में कार्य करना चाहिए । इससे भारतीय धर्मग्रन्थों में पशुओं, पक्षियों के संवाद पर मुहर भी लगेगी ।
     (पिताश्री हिंदी-गौरव डॉ भवदेव पांडेय द्वारा पुत्रवत सम्हालकर रखने के बावजूद अत्यंत जर्जर हो गयी पत्रिका के संक्षिप्त अंश पर आधारित) ।
            -सलिल पांडेय, प्रेमघनमार्ग, मिर्जापुर
                          मो : 9415680176

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ