भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबा रायबरेली का चकबंदी विभाग

रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली जिले का चकबंदी विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। सबका साथ सबका विकास जैसे नारे के साथ केंद्र तथा प्रदेश की सत्ता पर काबिज सरकार हो, या केंद्र सरकार, पूरा फोकस किसान की आय दोगुनी करने पर है। बावजूद सरकार के नुमाइंदे ही सरकार का आदेश न मानकर सरकार के सपनों को ही पलीता लगाने का काम कर रहे है। तो आम जनता का भगवान ही मालिक है।
     आपको बता दें कि, ताजा मामला रायबरेली जनपद के चकबंदी विभाग से जुड़ा हुआ है। पीड़ित किसान चंद्रिका मौर्य ने मीडिया को दिए गए बयान में बताया कि, वह पिछले तीन सालों से अपनी खुद की ही जमीन से बेदखल है। एक गलत आदेश को सही साबित करने के चक्कर में चकबंदी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी डीडीसी, एसओसी, सीओ तथा एसीओ ने पार्टी के साथ चक आवंटन में गड़बड़ी किया। अपने पद की गरिमा का दुरुपयोग किया। मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत संदर्भ संख्या 151581, 19326 में किए गए आदेश एवं हाईकोर्ट के नियम की धज्जियां उड़ा कर शासन को गुमराह किया।
      भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। अपने कार्यालय के कर्मचारी को बचाने के चक्कर में लगातार तीन वर्षों से चंद्रिका प्रसाद मौर्य अपनी पैतृक जमीन पर फैसला पाने से वंचित है।

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