'मोहि पुकारत देर भई, जगदम्ब विलम्ब कहां करती हौ...!'
सलिल पांडेय
मिर्जापुर। देश ही नहीं पूरी धरती पर सिर चढ़कर मृत्यु-नृत्य कर रहे कोरोना वायरस का अंत लगता है आ गया है क्योंकि यहां-वहाँ, जहाँ चाहा नग्नता दिखाते अखिल ब्रह्मांड की देवी माँ विन्ध्यवासिनी के धाम में पौराणिक आख्यानों को दोहराने के लिए वह आ ही गया है।
पौराणिक आख्यान-
श्रीदुर्गासप्तशती की कथा के अनुसार मधुकैटभ के गण शुंभ-निशुंभ, चन्ड-मुंड देवी से टकराने आ गए थे जिसका अंत दुर्गाशक्ति ने किया था । अन्य ग्रन्थों में भी इसी तरह के दैत्यों के दुर्गा की सत्ता को चुनौती देने के फलस्वरूप मारे जाने का उल्लेख है ।
दो कोरोना पॉजिटिव--
व्यक्ति नहीं बीमारी बुरी चीज है । कोरोना वायरस से लाखों लोग विश्व में पीड़ित है । लिहाजा विंध्याचल में बने क्वारेंटिन सामुदायिक अस्पताल में दो मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव क्या आई कि लगा कोरोना वायरस चन्ड मुंड बनकर धाम में आ गया है । देवी की स्तुति बढ़ गई और जनमानस मंदिर बंद होने से जहां जिस हालत में है त्रिकोण धाम में स्थित महाकाली को याद कर प्रार्थना करने लगा-'दैत्य संहारिणी मां, इस वायरस रूपी दैत्य का संहार अब कर ही दो ।'
जगदम्ब विलम्ब कहां करती हौ !--
शनिवार, 4 अप्रैल को गृहस्थों के व्रत का पर्व कामदा एकादशी तिथि है । इस कामदा एकादशी की महत्ता में भी है कि एक स्वस्थ नृत्य करने वाला युवक श्राप से राक्षस हो गया था । उसकी अर्धांगिनी ने इस व्रत को रखकर अपने पति को श्रापमुक्त किया था । दैत्य का वध हुआ था । सो, आस्थावान लोगों का आर्तनाद सुनाई पड़ रहा है-'निशुंभ शुंभ मर्दिनीम् प्रचंडमुंड खंडिनीम्, वने-रणे प्रकाशिनीम्, भजामि विन्ध्यवासिनीम्' ।
उहापोह---
विंध्याचल अस्पताल में आइसोलेट दोनों मरीजों को यहां से हटाने की मांग शुरू हो गई । लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें वहीं रखेगा । ऐसा विधान नहीं है कि उन्हें जिले के किसी अन्यत्र अस्पताल में ले जाया जाए। प्रशासन नजर रखे है । ज्यादा विषम स्थिति होने पर वाराणसी ही ले जाया जा सकता है लेकिन बिना वाराणसी की अनुमति के यह भी संभव नहीं है।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
©कॉपी राइट ऐक्ट के तहत नाम एडिट कर प्रयोग दण्डनीय है ।
सलिल पांडेय
मिर्जापुर। देश ही नहीं पूरी धरती पर सिर चढ़कर मृत्यु-नृत्य कर रहे कोरोना वायरस का अंत लगता है आ गया है क्योंकि यहां-वहाँ, जहाँ चाहा नग्नता दिखाते अखिल ब्रह्मांड की देवी माँ विन्ध्यवासिनी के धाम में पौराणिक आख्यानों को दोहराने के लिए वह आ ही गया है।
पौराणिक आख्यान-
श्रीदुर्गासप्तशती की कथा के अनुसार मधुकैटभ के गण शुंभ-निशुंभ, चन्ड-मुंड देवी से टकराने आ गए थे जिसका अंत दुर्गाशक्ति ने किया था । अन्य ग्रन्थों में भी इसी तरह के दैत्यों के दुर्गा की सत्ता को चुनौती देने के फलस्वरूप मारे जाने का उल्लेख है ।
दो कोरोना पॉजिटिव--
व्यक्ति नहीं बीमारी बुरी चीज है । कोरोना वायरस से लाखों लोग विश्व में पीड़ित है । लिहाजा विंध्याचल में बने क्वारेंटिन सामुदायिक अस्पताल में दो मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव क्या आई कि लगा कोरोना वायरस चन्ड मुंड बनकर धाम में आ गया है । देवी की स्तुति बढ़ गई और जनमानस मंदिर बंद होने से जहां जिस हालत में है त्रिकोण धाम में स्थित महाकाली को याद कर प्रार्थना करने लगा-'दैत्य संहारिणी मां, इस वायरस रूपी दैत्य का संहार अब कर ही दो ।'
जगदम्ब विलम्ब कहां करती हौ !--
शनिवार, 4 अप्रैल को गृहस्थों के व्रत का पर्व कामदा एकादशी तिथि है । इस कामदा एकादशी की महत्ता में भी है कि एक स्वस्थ नृत्य करने वाला युवक श्राप से राक्षस हो गया था । उसकी अर्धांगिनी ने इस व्रत को रखकर अपने पति को श्रापमुक्त किया था । दैत्य का वध हुआ था । सो, आस्थावान लोगों का आर्तनाद सुनाई पड़ रहा है-'निशुंभ शुंभ मर्दिनीम् प्रचंडमुंड खंडिनीम्, वने-रणे प्रकाशिनीम्, भजामि विन्ध्यवासिनीम्' ।
उहापोह---
विंध्याचल अस्पताल में आइसोलेट दोनों मरीजों को यहां से हटाने की मांग शुरू हो गई । लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें वहीं रखेगा । ऐसा विधान नहीं है कि उन्हें जिले के किसी अन्यत्र अस्पताल में ले जाया जाए। प्रशासन नजर रखे है । ज्यादा विषम स्थिति होने पर वाराणसी ही ले जाया जा सकता है लेकिन बिना वाराणसी की अनुमति के यह भी संभव नहीं है।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
©कॉपी राइट ऐक्ट के तहत नाम एडिट कर प्रयोग दण्डनीय है ।


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