प्रदेश स्तर पर पहुंची महराजगंज में बने कोरोना फाइटर्स ग्रुप की चर्चा।। Raebareli news ।।

शासन ने मांगा प्लान का प्रारूप, प्रदेश के अन्य तहसीलों में भी लागू की जा सकती है यह व्यवस्था
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज तहसील प्रशासन द्वारा तहसील क्षेत्र में कोरोना महामारी से निपटने के लिए बनाई गई, रणनीति की चर्चा प्रदेश के शासन स्तर पर पहुंच गई है।    शासन ने महराजगंज तहसील में बनाई गई दैविक आपदा कार्यक्रम के तहत गठित की गई ग्राम कोरोना फाइटर ग्रुप के तहत बनाए गए एक्शन प्लान को जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से लखनऊ तलब की गई है। जिस प्रकार प्रशासन की कर्मठता व जागरूकता के चलते तहसील क्षेत्र से एक भी कोरोना का मामला सामने ना आने पर छेत्रीय लोग भी राहत की सांस ले रहे हैं।
      आपको बता दें कि, कोरोना महामारी से निपटने के लिए एसडीएम महराजगंज विनय कुमार सिंह ने विगत 30 मार्च को तहसील स्तरीय बैठक बुलाकर जिसमें तहसीलदार महराजगंज विनोद कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र चतुर्वेदी के अलावा तीनों विकासखंडो के खंड विकास अधिकारियों और सीएचसी के तीनों अधीक्षकों सहित नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को बुलाकर एक्शन प्लान तैयार कर ग्राम कोरोना फाइटर्स ग्रुप का गठन किया गया था। जिसमें ग्राम प्रधान को अध्यक्ष लेखपाल को सचिव इसके अलावा क्षेत्रीय आशाबहू, शिक्षामित्र, रोजगार सेवक, कोटेदार और बीट के सिपाहियों को शामिल किया गया था। जिनमें प्रधान और लेखपाल को कहा गया था कि, वह बाहर से आए लोगों को अपने अपने ग्राम पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों में रोककर उनके भोजन पानी की व्यवस्था करें।
       आशा बहू सभी आए हुए लोगों की सूचना अपने-अपने सीएचसी में देगीं इसके अलावा  शिक्षामित्र और रोजगार सेवको को  लगाया गया था।  पुलिस के लोगों को कानून और व्यवस्था का पालन कराने का जिम्मा सौंपा गया था कि, जो लोग कोराइटाइन सेंटर में नहीं जाते हैं। उन्हें कोरनटाइन सेंटर तक पहुंचाया जाए। महराजगंज प्रशासन ने खाद्य वस्तुएं आदि की कालाबाजारी ना होने पाए और अनावश्यक लोग इन सामग्रियों के खरीद के लिए बाजारों में जाकर भीड़ ना लगाएं, इसका जिम्मा कोटेदारों को देते हुए जनता बाजार की सुविधा की गई थी। जिसमें कोटेदारों को राशन पानी के अलावा  सब्जियां व अन्य आवश्यक वस्तुओं के गांव स्तर पर भी पब्लिक को उपलब्ध कराने का जिम्मा दिया गया।
      प्रशासन की तीसरी महत्वपूर्ण  ग्राम एंबुलेंस सेवा की थी। जिसमें निर्देश दिया गया था कि, इन सेंटरों में रखे गए लोगों में किसी का स्वास्थ्य बिगड़ता है, अन्यथा उनमें संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तत्काल ग्राम स्तर पर उपलब्ध कराई गई अस्थाई एंबुलेंस सेवा के जरिए  ऐसे लोगों को संबंधित 
सीएचसी भिजवाया जाए। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार की देखरेख में यह व्यवस्था कारगर साबित हुई और इसकी चर्चा जिले सहित प्रदेश के कई जिलों में हुई।
     पता चला है कि, शासन ने इस व्यवस्था पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए रायबरेली जिले की जिलाधिकारी के माध्यम से इस मॉडल को प्रदेश में शासन को उपलब्ध कराने की मांग की
 है। जिसके लिए अधिकारी लगे हुए है।
      बाद में शुरू हुई न्याय पंचायत स्तरीय व्यवस्था। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद एक शिकायत यह आने लगी कि, इन केंद्रों पर  रखे गए लोग रात के समय भागकर अपने घरों में पहुंच जाते हैं। सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी ने पुन: बैठक कर एक नया रास्ता निकाला और तहसील क्षेत्र के 178 सेंटरों को 9 सेंटरों में तब्दील करते हुए, सभी 2682 लोगों को लाकर प्रत्येक सेंटर में 200 की व्यवस्था करके इनमें रखवा दिया था। परिणाम यह रहा कि, सारी व्यस्थाएं गांव स्तर से तहसील क्षेत्र के 9 सेंटरो  तत्काल शुरू हो गई। बाहर से आए हुए लोगों से यह केंद्र गुलजार हो गए।
     ग्रामीण क्षेत्र के परदेसियों के  और भोजन पानी की व्यवस्था का जिम्मा खंड विकास अधिकारियों के जिम्मे सौंपा गया, जो अभी तक जारी है। कहीं से किसी बड़ी असुविधा का समाचार नहीं मिला है। महराजगंज तहसील क्षेत्र में इस ढंग से कराई व्यवस्था के चलते इसकी चर्चा शासन स्तर पर पहुंची।
      प्रशासन द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से महराजगंज मांडल को शासन स्तर पर मांगा गया है। इस बात की पूरी संभावना है कि, शासन स्तर पर इस मॉडल को अन्य स्थानों पर लागू करने का फरमान भी जारी हो जाए।

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