रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: नन्हे-मुन्ने बच्चों को कुपोषण से दूर रखने और उन्हें पढ़ाने, लिखाने, सजाने तथा संवारने का काम तो उन्हें बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा दिया ही गया था, लेकिन लंबे अरसे से यह काम करते-करते उन्होने बाल सेवा को अपना धर्म भी बना लिया है। गली मोहल्ले में खेलते बच्चों को पुचकार कर उन्हें टॉफी, बिस्किट जैसी चीजें खिलाना, उन्हें दुलारना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। इस काम में वह ना जाति देखती हैं, ना पाति ना मजहब सिर्फ और सिर्फ बच्चों में उन्हें भगवान का रूप दिखाई देता है। जी हां हम बात कर रहे हैं, समेकित बाल विकास परियोजना की। आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामकुमारी साहू की, जो नरायनपुुर मोन तृतीय क्षेत्र से आंगनबाड़ी के तौर पर काम कर रही हैं।
आपको बता दें कि, यह संवाददाता मोन गांव में समाचार संकलन के लिए गया हुआ था, तो वहीं देखा कि, आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामकुमारी साहू ने अपने मकान के बरामदे में छोटे-छोटे 30, 40 बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पंक्तिबद्ध बैठाकर अपने हाथों से सबके लिए खीर, पूड़ी जैसे स्वादिष्ट व्यंजन परोस भी रही थी। जो नन्हे-मुन्ने खुद अपने हाथों खा नहीं सकते थे, उन्हें अपने हाथ से खिला भी रही थी और बच्चों के सिरों पर हाथ से सहला रही थी।
ऐसा अपनत्व और ममता देखकर जब हमने उनसे बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि, उन्हें बच्चों से बहुत अधिक लगाव है। जब से वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के रूप में यहां तैनात हुई है और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र लाकर उन्हें बाल पोषाहार आदि का वितरण तथा पढ़ाने लिखाने का काम शुरू किया है, तब से उनके मन में यह भाव समा गया है कि, बाल रूप भगवान का होता है, और उनके जीवन में धार्मिक विचारों का प्रवेश हो गया है, तथा बाल रूप भगवान की सेवा करने में उन्हें आलौकिक आनंद की अनुभूति होती है।
रामकुमारी साहू के बाल प्रेम को देखकर गांव ही नहीं आसपास के क्षेत्र में उनकी इच्छा भी एक ममतामयी मां जैसी हो गई है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक है।
वही गांव वालों का कहना है कि, जो सरकारी दायित्व राजकुमारी साहू को सौंपा गया है, उस पर वह सत प्रतिशत पालन करती है और अपनी ड्यूटी करने के उपरांत जो भी समय मिलता है, वह बच्चों की देखरेख सेवा सुश्रुषा में लगाती हैं। जिसके चलते वह काफी लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई हैं। वहीं ग्रामीणों में जानकारी देते हुए यह भी बताया है कि, जबसे संपूर्ण लॉकडाउन लागू हुआ है, तब से वह गुप्त रुप से निर्धन, जरुरतमंद लोगों के घरों में जाकर अन्न दान भी करती है, और जब कोई गरीब उनके घर सहायता के लिए आता है, तो वह खाली हाथ कभी भी वापस नहीं जाता है।
महराजगंज/रायबरेली: नन्हे-मुन्ने बच्चों को कुपोषण से दूर रखने और उन्हें पढ़ाने, लिखाने, सजाने तथा संवारने का काम तो उन्हें बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा दिया ही गया था, लेकिन लंबे अरसे से यह काम करते-करते उन्होने बाल सेवा को अपना धर्म भी बना लिया है। गली मोहल्ले में खेलते बच्चों को पुचकार कर उन्हें टॉफी, बिस्किट जैसी चीजें खिलाना, उन्हें दुलारना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। इस काम में वह ना जाति देखती हैं, ना पाति ना मजहब सिर्फ और सिर्फ बच्चों में उन्हें भगवान का रूप दिखाई देता है। जी हां हम बात कर रहे हैं, समेकित बाल विकास परियोजना की। आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामकुमारी साहू की, जो नरायनपुुर मोन तृतीय क्षेत्र से आंगनबाड़ी के तौर पर काम कर रही हैं।
आपको बता दें कि, यह संवाददाता मोन गांव में समाचार संकलन के लिए गया हुआ था, तो वहीं देखा कि, आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामकुमारी साहू ने अपने मकान के बरामदे में छोटे-छोटे 30, 40 बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पंक्तिबद्ध बैठाकर अपने हाथों से सबके लिए खीर, पूड़ी जैसे स्वादिष्ट व्यंजन परोस भी रही थी। जो नन्हे-मुन्ने खुद अपने हाथों खा नहीं सकते थे, उन्हें अपने हाथ से खिला भी रही थी और बच्चों के सिरों पर हाथ से सहला रही थी।
ऐसा अपनत्व और ममता देखकर जब हमने उनसे बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि, उन्हें बच्चों से बहुत अधिक लगाव है। जब से वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के रूप में यहां तैनात हुई है और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र लाकर उन्हें बाल पोषाहार आदि का वितरण तथा पढ़ाने लिखाने का काम शुरू किया है, तब से उनके मन में यह भाव समा गया है कि, बाल रूप भगवान का होता है, और उनके जीवन में धार्मिक विचारों का प्रवेश हो गया है, तथा बाल रूप भगवान की सेवा करने में उन्हें आलौकिक आनंद की अनुभूति होती है।
रामकुमारी साहू के बाल प्रेम को देखकर गांव ही नहीं आसपास के क्षेत्र में उनकी इच्छा भी एक ममतामयी मां जैसी हो गई है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक है।
वही गांव वालों का कहना है कि, जो सरकारी दायित्व राजकुमारी साहू को सौंपा गया है, उस पर वह सत प्रतिशत पालन करती है और अपनी ड्यूटी करने के उपरांत जो भी समय मिलता है, वह बच्चों की देखरेख सेवा सुश्रुषा में लगाती हैं। जिसके चलते वह काफी लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई हैं। वहीं ग्रामीणों में जानकारी देते हुए यह भी बताया है कि, जबसे संपूर्ण लॉकडाउन लागू हुआ है, तब से वह गुप्त रुप से निर्धन, जरुरतमंद लोगों के घरों में जाकर अन्न दान भी करती है, और जब कोई गरीब उनके घर सहायता के लिए आता है, तो वह खाली हाथ कभी भी वापस नहीं जाता है।






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