शिवाकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: कोरोना महामारी ने ईद के जश्न में खलल डालने की कोशिश बेशक की, लेकिन जनपद वासियों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सिर्फ ईद मनाने का तरीका इस बार बदला-बदला रहा। ईदगाहों में सामूहिक नमाज नहीं पढ़ी गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 'घरों में इबादत और खुद की हिफाजत' के तर्ज पर त्योहार मनाया। उसके बाद फोनकॉल, वीडिया कॉल और सोशल साइट के जरिए एक-दूसरे को ईद मुबारक कहा। सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कराने के लिए बाजारों में पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा, वहीं इस बार की ईद के मौके पर महराजगंज सहित आसपास के बाजारों में थोड़ी रौनक कम दिखी।
आपको बता दें कि, रविवार देर रात को चांद दिखने बाद से ही ईद की मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार को त्योहार के दिन क्षेत्र की किसी भी ईदगाह में सामूहिक नमाज नहीं पढ़ी गई। कहीं कोई मेला नहीं लगा। दावतों का दौर नहीं चला। बाजारों में भी वैसी रौनक नहीं दिखी, जैसी हर साल ईद पर दिखती रही है। किसी से किसी ने गला मिलकर मुबारकबाद नहीं दिया। शारीरिक दूरियां बनी रही, लेकिन दिली नजदीकियां बरकरार रही। कोरोना महामारी ने कई त्योहारों की तरह ईद पर भी ग्रहण लगाने का प्रयास किया, लेकिन सभी ने डटकर कोरोना को हराने के लिए ईद को सादगी से मनाया।
दरअसल, रमजान के दौरान तमाम मुस्लिम तंजीमों और उलेमा बार-बार एलान करते रहे कि, ईद के दिन भी शारीरिक दूरी बनाए रखें, और घरों में इबादत कर कोरोना संकट खत्म होने की दुआ करें। एलान के मुताबिक लोगों ने शारीरिक दूरी बरकरार रखते हुए खुशी-खुशी ईद मनाई। हालांकि सामान्य हालात में ईद पर एक-दूसरे के घर जाकर ईद मुबारक कहने और गले मिलने का रिवाजभी इस बार नहीं दिखा। बस इस बार लोगों ने अपने परिवार के साथ घर में रहना ही मुनासिब समझा।
महराजगंज सहित आसपास के बाजारों में आम दिनों के मुकाबले रौनक भी कम देखने को मिली। ईद से 2 दिन पहले बच्चों को अपनी मनमर्जी की खरीदारी करते जरूर देखा गया।
क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र चतुर्वेदी के कुशल निर्देशन में कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व में क्षेत्र की मस्जिदों के बाहर पुलिस का पहरा कोरोना महामारी से बचाव के लिए देखा गया। हालांकि लोगों ने खुद हिफाजत से घरों में रहकर ही त्योहार के सारे रस्म पूरे किए, फिर भी एहतियात मस्जिदों के बाहर पुलिस का शख्त पहरा रहा। पुलिस कर्मियों की तैनाती इसलिए की गई थी कि, अगर कोई नियम को तोड़कर मस्जिद में नमाज पढ़ने आ जाए, तो उसे रोका जा सके। लेकिन कहीं से इस तरह का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।
महराजगंज/रायबरेली: कोरोना महामारी ने ईद के जश्न में खलल डालने की कोशिश बेशक की, लेकिन जनपद वासियों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सिर्फ ईद मनाने का तरीका इस बार बदला-बदला रहा। ईदगाहों में सामूहिक नमाज नहीं पढ़ी गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 'घरों में इबादत और खुद की हिफाजत' के तर्ज पर त्योहार मनाया। उसके बाद फोनकॉल, वीडिया कॉल और सोशल साइट के जरिए एक-दूसरे को ईद मुबारक कहा। सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कराने के लिए बाजारों में पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा, वहीं इस बार की ईद के मौके पर महराजगंज सहित आसपास के बाजारों में थोड़ी रौनक कम दिखी।
आपको बता दें कि, रविवार देर रात को चांद दिखने बाद से ही ईद की मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार को त्योहार के दिन क्षेत्र की किसी भी ईदगाह में सामूहिक नमाज नहीं पढ़ी गई। कहीं कोई मेला नहीं लगा। दावतों का दौर नहीं चला। बाजारों में भी वैसी रौनक नहीं दिखी, जैसी हर साल ईद पर दिखती रही है। किसी से किसी ने गला मिलकर मुबारकबाद नहीं दिया। शारीरिक दूरियां बनी रही, लेकिन दिली नजदीकियां बरकरार रही। कोरोना महामारी ने कई त्योहारों की तरह ईद पर भी ग्रहण लगाने का प्रयास किया, लेकिन सभी ने डटकर कोरोना को हराने के लिए ईद को सादगी से मनाया।
दरअसल, रमजान के दौरान तमाम मुस्लिम तंजीमों और उलेमा बार-बार एलान करते रहे कि, ईद के दिन भी शारीरिक दूरी बनाए रखें, और घरों में इबादत कर कोरोना संकट खत्म होने की दुआ करें। एलान के मुताबिक लोगों ने शारीरिक दूरी बरकरार रखते हुए खुशी-खुशी ईद मनाई। हालांकि सामान्य हालात में ईद पर एक-दूसरे के घर जाकर ईद मुबारक कहने और गले मिलने का रिवाजभी इस बार नहीं दिखा। बस इस बार लोगों ने अपने परिवार के साथ घर में रहना ही मुनासिब समझा।
महराजगंज सहित आसपास के बाजारों में आम दिनों के मुकाबले रौनक भी कम देखने को मिली। ईद से 2 दिन पहले बच्चों को अपनी मनमर्जी की खरीदारी करते जरूर देखा गया।
क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र चतुर्वेदी के कुशल निर्देशन में कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व में क्षेत्र की मस्जिदों के बाहर पुलिस का पहरा कोरोना महामारी से बचाव के लिए देखा गया। हालांकि लोगों ने खुद हिफाजत से घरों में रहकर ही त्योहार के सारे रस्म पूरे किए, फिर भी एहतियात मस्जिदों के बाहर पुलिस का शख्त पहरा रहा। पुलिस कर्मियों की तैनाती इसलिए की गई थी कि, अगर कोई नियम को तोड़कर मस्जिद में नमाज पढ़ने आ जाए, तो उसे रोका जा सके। लेकिन कहीं से इस तरह का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।

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