धर्मस्थलों की चुनौती भी होगी टेढ़ी खीर ही अल्पसंख्यकों की हुई बैठक

ये निगोड़ा^ कोरोना जो-जो न करा दे (यह मराठी शब्द है) निगोड़ा के मायने-जिसका पैर न हो और दुर्भाग्यशाली हो)
था अवकाश का दिन पर भागमभाग जबरदस्त रहा
मिर्जापुर। ये निगोड़ा कोरोना जो न करा दे। 7 जून तो रविवार का अवकाशवाला दिन था लेकिन सामान्य दिनों से ज्यादा सक्रिय और उथल पुथल भरा दिन रहा।
   उथल-पुथल इसलिए था क्योंकि 8 जून से सरकार ने धर्मस्थलों में लॉकडाउन से बंद पूजा/इबादत/प्रार्थना शुरू करने के लिए मुकर्रर किया है । उम्मीद जगी थी कि 8 जून ऐतिहासिक दिन हो जाएगा लेकिन आसपास पड़ोस के जनपदों से शनिवार की शाम से ही ऐसी हवा बह कर आने लगी कि 'धरस्थलों के ताले की चाभी' तमाम मशक्कत के बाद मिल सकेगी । लॉकडाउन के बने संविधान से होकर पुजारियों, मौलानाओं तथा अन्य धर्मों के गुरुओं को गुजरना पड़ेगा ।
धर्मगुरुओं की बैठक में केवल मुस्लिम ही लोग - सही-सलामती से धर्मस्थल खोलने का मंत्र देने के लिए प्रशासन ने एक बैठक बुलाई थी । कहां से व्यतिक्रम आ गया कि धर्मगुरुओं में केवल मुस्लिम समाज के धर्मगुरु कम विभिन्न संगठनों के कतिपय पदाधिकारी ही पहुंच पाए । ऐसी बैठकों में सूचना का अभाव था या धर्मगुरुओं द्वारा इस तरह की बैठकों के प्रति उदासीनता यह तो संबंधित पक्ष के ही लोग बता सकते हैं ।
विंध्यपंडा समाज के साथ बैठक 8 को- विश्वप्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी धाम के 12 सौ पण्डों की संस्था विंध्यपण्डा समाज की बैठक तो 8 जून को होगी । पण्डा समाज रविवार को जबरदस्त कसरत करते दिखा । मां विंध्यवासिनी के श्रीचरणों में बैठने वाले 33 पारीवालों की भी बैठक रविवार को हुई । समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी और नगर विधायक रत्नाकर मिश्र खुद मंदिर में खड़े होकर फिजिकल डिस्टेंसिंग के लिए पेंट से घेरा बनवाने के लिए उतर आए थे ।
नगर के अन्य मंदिर- केवल नगर में ही प्रमुख मंदिर तारकेश्वर महादेव, पंचमुखी, बूढ़ेनाथ, नारघाट की कालीजी, वासलीगंज में साईं बाबा, यहीं पास में संकटमोचन मंदिर, कचहरी बाबा, गैवीघाट हनुमानजी, लोहन्दी महावीर, आदि एक दर्जन से अधिक मंदिर हैं जहां प्रतिदिन और दिन विशेष में कई कई सौ लोग दर्शन-पूजन करते हैं, वहां की भी व्यवस्था पर चर्चा होनी चाहिए । सिख समुदाय के गुरुद्वारे, ईसाइयों के गिरिजाघरों की भी व्यवस्था की कार्ययोजना बननी चाहिए ।
सर्वाधिक दुरूह आषाढ़ मास में होगी गुरुपूर्णिमा- धर्मस्थलों को खोलने के बाद सर्वाधिक जटिल समस्या 6 जून से शुरू आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुरु-पूर्णिमा को होगी । यह पर्व यद्यपि 5 जुलाई को है लेकिन इसकी तैयारियां 15-20 दिन पहले से शुरू हो जाती हैं।  सर्वाधिक श्रद्धालु सक्तेशगढ़ स्थित स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज, अष्टभुजा पहाड़ी (कलवारी) पर देवरहवा बाबा आश्रम, यहीं गीता आश्रम, भैरोकुंड मंदिर, विंध्याचल के पास दूधनाथ , लोहन्दी स्थित खुटहा महावीर आश्रम, बरैनी(कछवा) स्थित जगतानन्द आश्रम, आमघाट स्थित हाइमाई आश्रम, पास ही में गुदरिया बाबा आश्रम, डगमगपुर में बालनाथ आश्रम, ओझला स्थित गायत्री-परिवार आदि सहित दर्जनों स्थानों पर गुरुपूर्णिमा पर धार्मिक कार्यक्रम होते हैं । अड़गड़ानंद जी के आश्रम पर तो एक सप्ताह पहले से लोग आ जाते हैं।  लगभग 10 लाख लोग आते हैं । इसी तरह देवरहा बाबा आश्रम में लाखोंलाख लोग आते हैं। इनमें हजारों तो VVIP मंत्री, जज, IAS तथा अन्य संवैधानिक पद वाले लोग आते हैं। इसलिए यहां की भी व्यवस्था सुव्यवस्थित की कठिन जिम्मेदारी होगी ।
21 से 23 जून रथयात्रा महोत्सव- आषाढ़ शुक्ल पक्ष लगते 21 से तीन दिवसीय रथयात्रा महोत्सव है । त्रिमोहानी से जुलूस भी निकलता है । इसके साथ ग्रामीण अंचलों में भी महोत्सव और गुरुपूर्णिमा के कार्यक्रम के साथ अन्य धर्मों के जिम्मेदार लोगों से बातचीत होनी चाहिए ।
  
                  © सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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