महराजगंज/रायबरेली: खराब मौसम, आए दिन छुट्टियां और पूर्व में घोषित मिनी लॉकडाउन के चलते इस बार बड़ी तादाद में गेहूं की बिक्री करने के लिए किसान गेहूं खरीद केंद्रों के चक्कर लगाते रहे। पहले तो उन किसानों को पीसीएफ के अलावा साधन सहकारी समितियों में गेहूं क्रय करने के लिए रजिस्टर्ड किया था। लेकिन यहां केंद्र संचालकों ने किसानों को दौड़ाया, तो बहुत किसानों की खरीद नहीं हुई, तब किसानों ने मंडी में हो रही केंद्रों पर खरीद केंद्रों की ओर रुख किया मंडी स्थल महराजगंज में बने 4 सेंटरों पर पूरे ब्लॉक के किसानों के गेहूं खरीदने का बोझ आ गया। इस दौरान मची आपाधापी के बीच सैकड़ों की तादात में किसान अपना गेहूं बेचने से वंचित रह गए। 15 जून को कांटे बंद कर दिए गए। किसानों ने पुरजोर मांग उठाई तो मुख्यमंत्री के विशेष आदेश पर गेहूं खरीद केंद्र की तिथि 22 जून तक बढा तो दी गई, लेकिन हालात में सुधार नहीं आया है। सरकारी केंद्रों पर केवल विपणन शाखा द्वारा ही खरीद किए जाने की अनुमति के बाद तमाम ऐसे प्रतिबंध लग गए हैं कि, अब गेहूं बेच पाना किसानों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
आपको बता दें कि, इस बार गेहूं बिक्री में किसानों को जो परेशानी उठाई पड़ी वह एक पीड़ादायी अनुभव साबित हुआ है। किसानों का कहना है कि, इस बार पूरे सीजन में साधन सहकारी समितियां और पीसीएफ के खरीदे केंद्रों पर किसानों को लगातार दौड़ाया गया, और खरीद नहीं हुई तब जाकर किसानों ने उपमंडी स्थित महराजगंज में विवरण शाखा के लगे दो कांटे के साथ-साथ एसएफसी और मंडी समिति के चालू खरीद केंद्रों पर रुख करते हुए माल लाना शुरू कर दिया। गनीमत रही है विपरण शाखा के दोनों खरीद केंद्रों पर काफी किसानों की उपज की खरीद हुई।
यही हाल एसएफसी के कांटे का रहा, लेकिन 1 जून से यहां एसएफसी पर खरीद बंद हुई। किसान रजिस्ट्रेशन कराकर टोकन लेकर घूमते रहे। उधर 15 जून को एसएससी के विपणन शाखा के भी दोनों केंद्र बंद हो गए। किसानों ने गुहार लगाई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाकर 22 जून कर दी है। लेकिन फिर भी इतने प्रतिबंध लगा दिए कि, खरीद संभव ही नहीं हो पा रही है। गेहूं खरीद के संबंध में पहली शर्त यह है कि, किसान उप जिलाधिकारी से अनुमति प्राप्त करें। पहले लेखपाल कानूनगो की रिपोर्ट लगवाएं, फिर गेहूं बिक्री की सीमा भी घटाकर महज 30 कुंटल प्रति किसान कर दी गई। इसके अलावा खरीद केंद्र द्वारा 1 दिन में डेढ़ सौ कुंतल ही गेहूं खरीदा जायेगा। इससे परेशान किसान तहसील के चक्कर लगाने के साथ-साथ लेखपालों को ढूंढते फिर रहे हैं।
इसी क्रम में तहसील मुख्यालय पर एसडीएम से मिलने आए बसंतपुर के किसान त्रिपुरारी सिंह ने बताया कि, वह 7 दिन से मंडी में माल लिए पडे हुए हैं। अब उनसे कहा गया कि, एसडीएम का आदेश लेकर आओ। इसी प्रकार हलोर के किसान ओमकार नाथ ने बताया कि, 30 दिनों तक साधन सहकारी समिति पर गेहूं लगाए रहे, वहां सचिव ने गेहूं खरीदने से जब मना किया गया तो 15 दिनों से वह विपरण शाखा के चक्कर लगा रहे हैं। उनका 30 कुंटल माल मंडी में ट्रैक्टर ट्राली पर लता खड़ा है। इसी तरह जनई गांव के रहने किसान हरि करन सिंह ने बताया कि, उनका और उनके भाई का डेढ़ सौ कुंतल गेहूं बेचने के लिए महीने भर से चक्कर लगा रहे हैं। उनका गेहूं अभी तक नहीं बिका है। जबकि थरि मजरे मांझ गांव के रहने वाले पृथ्वीनाथ भी जो छोटे किसान हैं। 30 कुंतल गेहूं बेचने के लिए 25 अप्रैल से दौड़ रहे हैं, और उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई।
बसंतपुर के ही रहने वाले आकाश सिंह 18 कुंटल गेहूं की बिक्री करने के लिए 1 सप्ताह से मंडी में पड़े हुए हैं। इसके अलावा बावन बुजुर्ग बल्ला, भट्सरा, पुरासी सहित दर्जनों गांव के किसान गेहूं खरीद की जटिल प्रक्रिया से उलझ कर रह गए हैं। अभी भी दर्जनों किसानों की ट्रैक्टर ट्राली मंडी परिसर में खड़ी है। लेकिन उनका गेहूं तौला जाएगा कि, नहीं यह भगवान भरोसे ही है।
इस बारे में विवरण शाखा के वरिष्ठ विपणन अधिकारी शशिभूषण चतुर्वेदी का कहना है कि, जो भी किसान सरकारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए उनके पास गेहूं बेचने आ रहे हैं। उनका गेहूं लिया जा रहा है।

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