आज से इन नौ गांव में नहीं चलेगा रेडियो और टीवी

स्वर्ग प्रवास के लिए जाएंगे देवता 42 दिनों तक मंदिरों में पूजा होगी बंद
कुल्लू: मकर संक्रांति वाले दिन यानी आज सुबह से गोशाल आराध्य देव का मंदिर सुनसान हो गया है। मकर संक्रांति से 42 दिन तक मंदिर का प्रांगण पूरी तरह सुनसान रहेगा। ना पूजा होगी और ना ही मंदिर की घंटियां बजेगी। देवालय की घंटियां बांध दी गई है और मंदिर के कपाट विधिपूर्वक बंद कर दिए गए हैं। मनाली के गोशाल गांव के घरों में आज से ना रेडियो बजेगा और ना ही टीवी चलेगी।
    आपको बता दें कि, यहां की मान्यता के अनुसार गोशाल आराध्य देव गौतम व्यास ऋषि और कंचन नाग देवता विधिपूर्वक स्वर्ग प्रवास के लिए चले गए हैं। इस दौरान देवता तपस्या में लीन रहेंगे। जिसके चलते मंदिर के प्रांगण सहित गांव का माहौल शांत रहेगा।
    कारकूनों द्वारा मिट्टी छानकर मृदालेप की विधि पूरी की जाएगी। 42 दिन बाद देवता के स्वर्ग प्रवास से वापस आते ही देवालय में रौनक लौटेगी और ग्रामीण देवता के आगमन की खुशी पर उत्सव मनाएंगे। देव आदेश के चलते उझी घाटी के नौ गांव गोशाल गांव सहित कोठी, सोलंग, पंलचान, रुआड़, कुलंग, शनाग, बुरुवा तथा मझाच के लोग लोहड़ी से अगले दिन14 फरवरी से 26 फरवरी तक किसी उत्सव का आयोजन नहीं करेंगे ना ही खेत खलिहान में काम करेंगे।
    विदित हो कि, देव समाज से जुड़े लोगों की मानें तो मकर संक्रांति के 42 दिन बाद मृदा लेप हटाई जाएगी और देव कार्यक्रम में देवता साल भर की भविष्यवाणी से अवगत कराएंगे। गोशाल सहित घाटी के सभी नौ गांव श्रद्धा पूर्वक देव आदेश का पालन करेंगे। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और यहां के लोग आज भी इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
     
चमत्कार से कम नहीं

जाहिर है कि जनमानस में कौतूहल पैदा करने वाली कुल्लू की देव संस्कृति एक बार फिर चमत्कार करने जा रही है।देवता के गुंडों से कुमकुम कोयला व बाल जैसी चीजें निकलना बाहरी दुनिया के लिए किसी अचंभे से कम नहीं लेकिन घाटी के लोग के लिए यह परंपरा का हिस्सा है। 42 दिनों के बाद यहां देवता अपने गुरु के माध्यम से भविष्यवाणी करेंगे कुमकुम निकला तो घाटी वाशी खुश खुशी से झूम उठेंगे जबकि कोयला व बाल निकलने पर उनकी दिक्कतें एक बार फिर बढ़ जाएंगी।
▪देव समाज में मतलब▪
▪फूल आने वाले दिन: शुभ होने का संकेत।
▪सेब के पत्ते: सेब की फसल होने का संकेत।
▪कोयला: आगजनी की घटनाएं अधिक होने का संकेत।
▪कुमकुम: शादियां अधिक होने से आसार।
▪पत्थर व रेत बजरी के टुकड़े: नदी में बाढ़ आने का संकेत।
▪मानव के बाल: लोगों को नुकसान पहुंचाने का संकेत।
▪भेड़ बकरी के बाल: पशुओं को नुकसान पहुंचाने का संकेत।
▪अनाज के छिलके: फसल अच्छी होने का संकेत।

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