गणिका (आज के सन्दर्भों में वेश्या) के सामने निरुत्तर---
नारी के चरण में लक्ष्मी, मुख पर सरस्वती तथा शरीर पर काली रहती हैं---
मिर्जापुर: स्वामी विवेकानंद को जब बचपन में उनके साईंस (इक्का चलाने वाले) ने रामकथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने सीता का परित्याग कर दिया था तो नन्हीं उम्र के विवेकानंद ने जिस फोटो में भगवान श्रीराम की पूजा करते थे, उसे छत से उठाकर नीचे जमीन पर पटक दिया और तय किया कि वे कभी श्रीराम की पूजा नहीं करेंगे । लेकिन बड़ी उम्र होने पर मां के कहने पर भगवान श्रीराम की पूजा करने लगेंगे ।
दर असल छोटी अवस्था में विवेकानंद इक्के से घूमते थे, इक्का वाला उन्हें तरह तरह की कहानियां सुनाता था । उस समय उसे ही वे अपना गुरु मानते थे ।
गणिका के आगे निरुत्तर---
भारत-भ्रमण में उत्तर प्रदेश के किसी राजपरिवार में गए । वहां गणिका का नृत्य हो रहा था । उन्हें भी नृत्य देखने बुलाया गया लेकिन वे नृत्य में नहीं आए । वे बगल के कमरे में रहे । नृत्य के बाद जब गणिका उनसे मिलने आई । उसे देखकर उन्होंने मुंह मोड़ लिया । इस बेरुखी पर गणिका ने अपनी बेबसी बताई और अपना अपराध पूछा । उसने यहां तक कहा कि जब आप पर मेरा प्रभाव पड़ जाएगा तो फिर कैसे संन्यासी हैं आप ? इस बात का विवेकानन्द पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा और उन्होंने उसको पूरा सम्मान दिया ।
गणराज्य की सबसे सुंदर महिला गणिका होती थी ।---
राजशाही के समय महिलाओं की दिक्कत यह थी कि गणराज्य की सबसे सुंदर महिला होना ही अपराध होता था । उस पर राजा का अधिकार होता था । वह दरबार मे मनोरंजन हेतु नृत्य-संगीत के लिए विवश होती थी ।
माता का सम्मान---
विवेकानन्द अपनी माता के ईश्वरीय आस्था से अभिभूत रहा करते थे । वे छोटे थे तो बंद कमरे में शिवलिंग के सामने आंख बंद कर ध्यान लगाए थे । कमरे में जब उनका इक्कावान पहुंचा तो देखा कि बड़ा सा सर्प भी कमरे में है । वह चिल्लाया लेकिन विवेकानन्द ध्यानमग्न ही रहे ।
नारी-सम्मान--
आगे चलकर अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण की तरह वे हर नारी में माता का रूप देखने लगे । दर-असल स्वामी रामकृष्ण के समक्ष रूपवती या कुरूपा कोई महिला आती थी तो वे यही कहते थे कि मां काली परीक्षा लेने आई है । वे मन ही मन उसके चरण को प्रणाम करते । उनके इस भाव पर मां काली प्रकट हो गई थी ।
नारी के चरण में लक्ष्मी का वास-
धर्मग्रन्थों में नारी के चरण में लक्ष्मी, मुख पर सरस्वती तथा शरीर पर मां काली के वास का उल्लेख भी है । यदि कोई यशस्वी जीवन चाहता है तो इस रूप में नारी को देखे तो वह कभी भी दीन-हीन नहीं रह सकता ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
नारी के चरण में लक्ष्मी, मुख पर सरस्वती तथा शरीर पर काली रहती हैं---
मिर्जापुर: स्वामी विवेकानंद को जब बचपन में उनके साईंस (इक्का चलाने वाले) ने रामकथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने सीता का परित्याग कर दिया था तो नन्हीं उम्र के विवेकानंद ने जिस फोटो में भगवान श्रीराम की पूजा करते थे, उसे छत से उठाकर नीचे जमीन पर पटक दिया और तय किया कि वे कभी श्रीराम की पूजा नहीं करेंगे । लेकिन बड़ी उम्र होने पर मां के कहने पर भगवान श्रीराम की पूजा करने लगेंगे ।
दर असल छोटी अवस्था में विवेकानंद इक्के से घूमते थे, इक्का वाला उन्हें तरह तरह की कहानियां सुनाता था । उस समय उसे ही वे अपना गुरु मानते थे ।
गणिका के आगे निरुत्तर---
भारत-भ्रमण में उत्तर प्रदेश के किसी राजपरिवार में गए । वहां गणिका का नृत्य हो रहा था । उन्हें भी नृत्य देखने बुलाया गया लेकिन वे नृत्य में नहीं आए । वे बगल के कमरे में रहे । नृत्य के बाद जब गणिका उनसे मिलने आई । उसे देखकर उन्होंने मुंह मोड़ लिया । इस बेरुखी पर गणिका ने अपनी बेबसी बताई और अपना अपराध पूछा । उसने यहां तक कहा कि जब आप पर मेरा प्रभाव पड़ जाएगा तो फिर कैसे संन्यासी हैं आप ? इस बात का विवेकानन्द पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा और उन्होंने उसको पूरा सम्मान दिया ।
गणराज्य की सबसे सुंदर महिला गणिका होती थी ।---
राजशाही के समय महिलाओं की दिक्कत यह थी कि गणराज्य की सबसे सुंदर महिला होना ही अपराध होता था । उस पर राजा का अधिकार होता था । वह दरबार मे मनोरंजन हेतु नृत्य-संगीत के लिए विवश होती थी ।
माता का सम्मान---
विवेकानन्द अपनी माता के ईश्वरीय आस्था से अभिभूत रहा करते थे । वे छोटे थे तो बंद कमरे में शिवलिंग के सामने आंख बंद कर ध्यान लगाए थे । कमरे में जब उनका इक्कावान पहुंचा तो देखा कि बड़ा सा सर्प भी कमरे में है । वह चिल्लाया लेकिन विवेकानन्द ध्यानमग्न ही रहे ।
नारी-सम्मान--
आगे चलकर अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण की तरह वे हर नारी में माता का रूप देखने लगे । दर-असल स्वामी रामकृष्ण के समक्ष रूपवती या कुरूपा कोई महिला आती थी तो वे यही कहते थे कि मां काली परीक्षा लेने आई है । वे मन ही मन उसके चरण को प्रणाम करते । उनके इस भाव पर मां काली प्रकट हो गई थी ।
नारी के चरण में लक्ष्मी का वास-
धर्मग्रन्थों में नारी के चरण में लक्ष्मी, मुख पर सरस्वती तथा शरीर पर मां काली के वास का उल्लेख भी है । यदि कोई यशस्वी जीवन चाहता है तो इस रूप में नारी को देखे तो वह कभी भी दीन-हीन नहीं रह सकता ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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