कोरोना महामारी की त्रासदी में तनख्वाह न मिलने से शिक्षकों में रोष।। Raebareli news ।।

 

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: कोरोना महामारी की इस भीषण त्रासदी में मुख्यमंत्री उ0प्र0 शासन द्वारा निरंतर समीक्षा कर प्रदेश वासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा,चिकित्सा व भोजन की व्यवस्था से संबंधित प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, तथा प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना महामारी से प्रदेश की जनता को जागरूक करने के लिए सभी जनपदों में जिला कोविड कमांड सेन्टरों की स्थापना की गई है। जिसमे शिक्षक निरंतर अपनी सेवायें देने का कार्य कर रहे हैं। किन्तु जनपद रायबरेली की वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा की हठधर्मिता के कारण लगभग 8000 शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारी को अप्रैल माह का वेतन न मिलने से इस त्रासदी काल में भी समय से इलाज के अभाव में मरने के लिए बाध्य हो रहे है। जिसकी शिकायत राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने महानिदेशक से की है।

    आपको बता दें कि, महानिदेशक के 12 मार्च 2021 के पत्र संख्या मा.नि./ एम.आई.एस./10694/2020-21 द्वारा शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन मानव संपदा पोर्टल पर पे-रोल के माध्यम से ऑनलाइन हस्तांतरण का आदेश दिया था, किंतु वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा रायबरेली ने इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया। जिससे प्रत्येक माह की 01 व 02 तारीख को मिलने वाला वेतन जब 06 मई तक नहीं प्राप्त हुआ, तब राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने 6 मई 2021 को जिलाधिकारी रायबरेली को ससमय वेतन भुगतान कराए जाने के संबंध में पत्र प्रेषित किया। जिसकी प्रतिलिपि वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा रायबरेली को भी दी गई थी।

     राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश रायबरेली का पत्र मिलने के पश्चात वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा रायबरेली ने अपने कार्यालय पत्रांक/ ले०सं०/ 213-17/2021-22 द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रायबरेली व पत्रांक/ले०सं०/ 225-24/2021-22 दिनांक 07-05-2021 द्वारा समस्त खंड शिक्षा अधिकारी जनपद रायबरेली को माह अप्रैल 2021 का वेतन पे-रोल मॉड्यूल पर फीड कराने के लिए निर्देशित किया गया। जिससे अप्रैल माह का वेतन मिलने में और विलम्ब होना स्वाभाविक हो गया। 

    राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष शिव शंकर ने बताया कि, वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा 12 मार्च 2021 से 7 मई 2021 तक लगभग 2 माह की अवधि में पे-रोल से वेतन आहरण की दिशा में कोई ठोस प्रयास न करना, लेखाधिकारी की घोर लापरवाही का परिचायक है, तथा कोरोना महामारी की भीषण त्रासदी में सैकड़ों शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारी अथवा उनके आश्रित किसी न किसी बीमारी का सामना कर रहे, जिससे धनाभाव के कारण उनका इलाज समय से न होने पर जनहानि भी हो रही है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि, 14 मई को ईद-उल -फितर(ईद) जैसा महत्वपूर्ण धार्मिक त्यौहार होने के कारण संबंधित शिक्षको के सम्मुख भी आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है।

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1 टिप्पणियाँ

  1. प्राइवेट स्कूलों, डिग्री कॉलेजों में चार से दस हजार प्रतिमाह मिलने वाला वेतन अक्सर 2 3 महीने विलम्ब से मिलता है। पत्रकार बंधुओं की नज़र इस भी तो जानी चाहिए।?

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