षट्तिला एकादशी की महत्ता

मिर्जापुर। मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायण होते ही पुण्य और शुभकाल शुरु हो जाते हैं । प्रकृति व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के अनुकूल हो जाती है । 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में रात्रि में प्रवेश कर गए । इस सम्बंध में शास्त्रों के अलग-अलग मत हैं । लेकिन भविष्यपुराण सहित कालादर्श, निर्णयामृत, मदनपारिजत आदि ग्रन्थों के अनुसार 'कारमुकं तु परित्यज्य झसं संक्रमते रवि:, प्रदोषे वार्द्धरात्रे वा स्नानं दानं परे$हनि' यह व्यवस्था दी गयी है । जिसका निहितार्थ है कि धनुराशि को छोड़कर जब मकर राशि में सूर्य प्रदोष या आधीरात में प्रवेश करें तब दूसरे दिन स्नान और दान करें । इसलिए 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व था । अब इसके बाद जब भी कोई पर्व पड़ेगा, वह अत्यंत लाभप्रद होगा । पिछले साल षट्तिला एकादशी 12 जनवरी को थी जो मकर संक्रांति के पहले थी, जबकि इस वर्ष मकर संक्रांति के बाद है ।
   भिन्न भिन्न शास्त्रों के मतानुसार जहां मकर में सूर्य के प्रवेश के बाद पुण्य काल शुरू हो जाता है वहीं स्नान दान का विशेष महत्त्व भी कहा गया है । इस बार दूसरे दिन पुण्यकाल था इसलिए गृहस्थ जनों ने 15 जनवरी को श्रद्धा पूर्वक मकर संक्रांति मनाई । सूर्य के उत्तरायण होने के बाद वस्त्र, तिल, गौ आदि का दान पुण्यदायी है । 
   त्रिदोष (कफ, वात, पित्त) नाशक होने के कारण इस अवधिमें में तिल का सेवन लाभदायक है । माघ मास की कृष्ण एकादशी तिथि षटतिला एकादशी है, जो 20 जनवरी को है । इस दिन छ: प्रकार से तिल का उपयोग करना लाभप्रद है । जिसमें 1-तिल युक्त जल से स्नान, 2-तिल के उबटन का इस्तेमाल, 3-तिल से हवन, 4 तिल से तर्पण, 5-तिल युक्त भोजन तथा 6-तिल का दान करना चाहिए । 
                 क्ष।  सलिल पांडेय, मिर्जापुर

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