24 जनवरी '20 को मौनी अमावस्या के संदर्भ में---
मिर्जापुर। इस दिन सोना है । इस सोने में जागृत होने का सन्देश है ।
-मनुष्य की पांचों इंद्रियां मन रूपी बलमा, सजना और राजाजी के अधीन है । इसलिए मन को एकाग्र और संतुलन बनाने के लिए और वाह्य जगत के प्रभावों से बचने के लिए मुखर नहीं मौन रहा जाता है ।
प्राय लोग न बोलने को ही मौन मान लेते हैं ।---
ऐसा नहीं । मुंह से नहीं बोल रहे हैं लेकिन पांचों जनी मतलब काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार का भाव जाग रहा है तो मौन प्रभावी नहीं रहेगा ।
मनुष्य जानवर के अति निकट का प्राणी---
तुलसीदास के 'पंच रचित यह अधम शरीरा' में अधम को ऊर्ध्व बनाने का पर्व है और तब बड़े भाग 'मानुष तन पावा' यानि वाह्य प्रभावों से हटकर मन को साधने से मतलब है । तभी व्यक्ति मनुष्य बन पाता है वरना मनुष्य जानवर के अति निकट का प्राणी है ।
मनन का पर्व---
दो अक्षरों का मन वजनदार हुआ तो ढाई अक्षरों का मौन हुआ और इस मौन को सही समझ लिया तो त्रिगुणात्मक सृष्टि के तीन अक्षरों 'मनन' की प्रक्रिया में पहुंच गया ।
यह पर्व मौन के रास्ते मुखर होने का पर्व है---
सत-रज और तम । 'सत' यानि ब्रह्मा होकर सृजनकर्ता बनता है 'रज' मतलब विष्णु बनकर राजा की तरह पालनपोषण करता है और 'तम' यानि शिव बनकर संहार करता है । यह मनन ही शिव की समाधि है । फिर गायत्री मंत्र के 'भू: भुव: स्व:' को जागृत कर लेता है ।
यह पर्व मौन के बहाने मुखर होने का पर्व है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
कॉपीराइट का उल्लंघन दंडनीय अपराध है।
मिर्जापुर। इस दिन सोना है । इस सोने में जागृत होने का सन्देश है ।
-मनुष्य की पांचों इंद्रियां मन रूपी बलमा, सजना और राजाजी के अधीन है । इसलिए मन को एकाग्र और संतुलन बनाने के लिए और वाह्य जगत के प्रभावों से बचने के लिए मुखर नहीं मौन रहा जाता है ।
प्राय लोग न बोलने को ही मौन मान लेते हैं ।---
ऐसा नहीं । मुंह से नहीं बोल रहे हैं लेकिन पांचों जनी मतलब काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार का भाव जाग रहा है तो मौन प्रभावी नहीं रहेगा ।
मनुष्य जानवर के अति निकट का प्राणी---
तुलसीदास के 'पंच रचित यह अधम शरीरा' में अधम को ऊर्ध्व बनाने का पर्व है और तब बड़े भाग 'मानुष तन पावा' यानि वाह्य प्रभावों से हटकर मन को साधने से मतलब है । तभी व्यक्ति मनुष्य बन पाता है वरना मनुष्य जानवर के अति निकट का प्राणी है ।
मनन का पर्व---
दो अक्षरों का मन वजनदार हुआ तो ढाई अक्षरों का मौन हुआ और इस मौन को सही समझ लिया तो त्रिगुणात्मक सृष्टि के तीन अक्षरों 'मनन' की प्रक्रिया में पहुंच गया ।
यह पर्व मौन के रास्ते मुखर होने का पर्व है---
सत-रज और तम । 'सत' यानि ब्रह्मा होकर सृजनकर्ता बनता है 'रज' मतलब विष्णु बनकर राजा की तरह पालनपोषण करता है और 'तम' यानि शिव बनकर संहार करता है । यह मनन ही शिव की समाधि है । फिर गायत्री मंत्र के 'भू: भुव: स्व:' को जागृत कर लेता है ।
यह पर्व मौन के बहाने मुखर होने का पर्व है ।
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
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