मिर्जापुर। तमाम ग्रुपों के लेखक और पत्रकार इस एक्ट के बारे में जानना चाह रहे हैं । बहुत संक्षिप्त में इस एक्ट में यह वर्णित है कि यदि किसी के लेख, विचार या अन्य किसी तरह के लेखन जिसमें समाचार भी है, का हूबहू या किसी हिस्से को किसी अन्य ने अपने नाम से लेखक/पत्रकार की अनुमति के बिना प्रयोग किया है तो मूल लेखक कार्रवाई कर सकता है ।
किसी के विचार और लेखन को पढ़कर उसे अपने शब्दों में लिखा जाए तो वह एक्ट के तहत नहीं आएगा, लेकिन हूबहू प्रयोग करने की मजबूरी है तो लेखक का उद्धरण दिया जाए या लेखक से अनुमति ली जाए । अनुमति लेखक अपना पारिश्रमिक या निःशुल्क जैसा चाहे दे सकता है ।
लिख नहीं सकते लेकिन पत्रकार कहलाने की चाहत है!--
लेखन चोर कंट्रोल (लचक) फ्रंट की सक्रियता से कुछ ने इससे परहेज किया है लेकिन कुछ के बारे में सूचना मिल रही है कि वे अभी भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे क्योंकि वे 'मैंने तो कहते थे साहब, दरोगा की हरकत सही नही है, मैंने थाने गए थे, मेरे को भगा दिया ।' इसी तरह के अशुद्ध और गलत वाक्य बोलते हैं । लिहाजा वे खबर नहीं लिख सकते लेकिन पत्रकार नहीं कहलाएंगे तो उनको लोग अपराधी ही मानते रहेंगे । इसीलिए दूसरे के लेखन की चोरी करना उनकी मजबूरी है । लेकिन जिसके लेखन की चोरी कर रहे हैं उनको तवज्जह भी नहीं दे सकते । उनको लगता है कि इससे उन्हें महत्त्व नहीं मिलेगा ।
किसी के विचार और लेखन को पढ़कर उसे अपने शब्दों में लिखा जाए तो वह एक्ट के तहत नहीं आएगा, लेकिन हूबहू प्रयोग करने की मजबूरी है तो लेखक का उद्धरण दिया जाए या लेखक से अनुमति ली जाए । अनुमति लेखक अपना पारिश्रमिक या निःशुल्क जैसा चाहे दे सकता है ।
लिख नहीं सकते लेकिन पत्रकार कहलाने की चाहत है!--
लेखन चोर कंट्रोल (लचक) फ्रंट की सक्रियता से कुछ ने इससे परहेज किया है लेकिन कुछ के बारे में सूचना मिल रही है कि वे अभी भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे क्योंकि वे 'मैंने तो कहते थे साहब, दरोगा की हरकत सही नही है, मैंने थाने गए थे, मेरे को भगा दिया ।' इसी तरह के अशुद्ध और गलत वाक्य बोलते हैं । लिहाजा वे खबर नहीं लिख सकते लेकिन पत्रकार नहीं कहलाएंगे तो उनको लोग अपराधी ही मानते रहेंगे । इसीलिए दूसरे के लेखन की चोरी करना उनकी मजबूरी है । लेकिन जिसके लेखन की चोरी कर रहे हैं उनको तवज्जह भी नहीं दे सकते । उनको लगता है कि इससे उन्हें महत्त्व नहीं मिलेगा ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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