मौनी अमावस्या: जो स्थायी रूप से मौन हो गए

काशी में दो राजाओं का संवाद !---- 
मिर्जापुर । माघ महीने की अमावस्या तिथि तमाम दिवसों की तरह मौन दिवस है । बहुतेरे साधना की दृष्टि से किसी निश्चित अवधि या समय तक मौन रहते हैं लेकिन जो इस कृष्णपक्ष के अंधेरे में स्थायी रूप से मौन होकर भवसागर को पार कर गए, उन्हें लोगबाग श्रद्धांजलि प्रदान कर रहे है ।
11 जनवरी से शुरू माघ माह के कृष्णपक्ष में नगर के सांस्कृतिक पुरुष की छवि वाले 80 वर्षीय हीरालाल सिंहानिया, नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थान श्रीमाता प्रसाद माताभीख इंटर कालेज के प्रबंधक श्री वैकुंठ नाथ उमर वैश्य की 75 वर्षीया धर्मपत्नी तथा गुडमार्निंग स्कूल की पूर्व शिक्षिका कु छाया के 52 वर्षीय पिता दिवंगत हो गए । इन सभी दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना जगह जगह से लोगों ने व्यक्त की ।
पिता की छाया से वंचित हुए कटरा प्रभारी---
'पिता हैं तो सब सपने साकार होते हैं क्योंकि मां पार्वती स्वरूपा होती है तो पिता महादेव स्वरूप । इसी माघ माह के कृष्ण पक्ष में कटरा कोतवाली के प्रभारी रमेश यादव के पिता रमाकांत यादव भी महाप्रस्थान कर गए । उनका सारा संस्कार उनके गृह जनपद देवरिया से हो रहा है । दिवंगत पिता के लिए उनके विभाग और शुभचिंतकों ने आत्मा की शांति की कामना की ।
माघ महीना और मौन --
पुराणों में इस महीने की विभिन्न दृष्टियों से महत्ता है । लेकिन इस महीने का ध्वन्यार्थ 'मन का अघ' ही है । यानि मन का काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार सबसे मुक्ति। प्रायः इसी महीने पड़ने वाले मकर संक्रांति के उत्तरायण में ही भीष्म की मृत्यु 'इच्छा मृत्यु' के रूप में जानी जाती है ।
डोम ने काशीनरेश से कहा-मैं नहीं आप मेरे दर पर जरूर आएंगे---
काशी दो राजाओं वाला तीर्थस्थल ही है । एक धरती पर पालनपोषण वाले काशीनरेश तो दूसरे महाप्रस्थान की आग देने वाले डोमराजा । दोनों सोने का मुकुट पहनते हैं । इन दोनों राजाओं के एक विशेष संवाद को अभी भी लोग सुनाते हैं । काशी नरेश को महादेव का स्वरूप ही आस्थावान मानते रहे हैं । जितना अधिक आध्यात्म का संरक्षण और संवर्धन इस राजघराने से हुआ, उतना किसी घराने से होने का इतिहास नहीं मिलता । इसी काशी के मणिकर्णिका घाट को मुक्तिघाट मानते है । शिवपुराण सहित अन्य अनेक पुराणों में इसका जिक्र भी है । किसी समय ऐसा भी था काशीनरेश जिससे बात कर लेते थे, लगता था कि उसे सब कुछ मिल गया। लेकिन एक बार जब डोमराजा को बुलाया तो डोमराजा ने कहलवाया कि 'हम आपसे बड़े हैं।' आपकी ड्योढ़ी पर मैं जिंदगी भर नहीं आऊंगा तो भी काम चल जाएगा लेकिन आपको तो मेरी ड्योढ़ी पर आना ही होगा ।
श्मशान में भी रहते हैं महादेव--
देवाधिदेव का आसन श्मशान में भी लगता है । यहां तो सुर-नर-मुनि सब महादेव के शरीर पर लगे 'चिता-भस्म' बनने के काम आकर जीवन त्याग करते ही हैं ।
श्मशान लिख गया है शमशान---
नमामि गंगे के तहत मिर्जापुर में लगे आकर्षक बोर्ड में 'शमशान' लिख गया है, जिसमें सुधार की जरूरत है । साथ ही गंगा के पानी के पास जलने वाले शवों के लिए नीचे तक सीमेंटेड फर्श बनाया जाना चाहिए ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर 
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