लेखन चोरों के विरुद्ध आवाज हो रही बुलंद----
मिर्जापुर । लेखन चोरी से अच्छे सभी लेखक/पत्रकार त्रस्त हैं । लंबे दिनों से कलम घिस कर शब्दों/वाक्यों में चंदन सी खुशबू बिखरने वाले लेखकों/पत्रकारों के लेखन को कुतर (एडिट) कर अपना नाम जोड़ने वाले जहां बिल में घुसते नजर आ रहे हैं, वहीं चूहों की उछलकूद से त्रस्त सभी इस अभियान में खुलकर फ्रंट पर आते दिख रहे हैं ।
पत्रकारिता में तपस्या करने वाले ---
पत्रकारिता में जिले के पत्रकार श्री नितिन अवस्थी लोकप्रिय ऑलराउंडर लिखने वाले हैं । 1995 में दैनिक 'आज' से संवाद लेखन शुरू कर 'दैनिक जागरण' सहित अनेक न्यूज चैनलों की स्थापना में योगदान के बाद सम्प्रति 'महुआ' न्यूज चैनल के रिपोर्टर हैं। इसी प्रकार उच्चस्तरीय लेखन करने वाले 'भाष्कर' दैनिक, लखनऊ के व्यूरोचीफ श्री संतोष देव गिरि, जिले के 1984 से प्रकाशित उन दिनों के एकमात्र हिंदी दैनिक 'जगप्रकाश' के सम्पादक श्री मंगलापति द्विवेदी, लंबे समय तक पत्रकारिता कर अब चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े नीमा संस्था के डॉ शक्ति श्रीवास्तव, UNI एवं जनसत्ता के जिला प्रतिनिधि श्री राजेन्द्र तिवारी आदि ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें किसी भी तरह की रिपोर्टिंग में महारत हासिल है ।
इसके अलावा महाविद्यालयीय पत्रिका प्रकाशित करने वाले विन्ध्यवासिनी महिला डिग्री कालेज के प्रबंधक और ख्यातिलब्ध आर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ नीरज त्रिपाठी, सोनभद्र जिले के प्रबुद्ध पत्रकार श्री अश्विनी सिंह, BHU साउथ कैंपस में PRO रह चुके श्री दृगविन्दु सिंह, युवा सामाजिक कार्यकर्ता श्री विभु कुमार मिश्र, दैनिक आज में संवाद लिखने वाले तथा आदर्श इंटर कालेज में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त श्री राधेश्याम विमल, श्री संजय श्रीवास्तव, श्री गणेश(बीएचपी), एवं विभिन्न विषयों पर त्वरित टिप्पणी करने वाले श्री प्रमोद कुमार द्विवेदी आदि सबकी राय है कि लेखन-चोरों पर सख्त नजर रखी जाए और उन्हें कॉपीराइट एक्ट©के तहत घेरा जाए ।
झंडूबाम कम्पनी ने इस एक्ट का लाभ लिया ---
कुछ साल पहले 'मुन्नी बदनाम हुई नशेमन तेरे लिए...मुन्नी झंडूबाम हुई...' गीत में झंडूबाम शब्द के प्रयोग पर कम्पनी ने फ़िल्म निर्माता पर कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा ठोका जिसपर फ़िल्म निर्माता को मुआवजा देने पड़ा । खबर के अनुसार एक शब्द के प्रयोग पर 7 लाख रुपए देने की बात प्रकाश में आई थी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
मिर्जापुर । लेखन चोरी से अच्छे सभी लेखक/पत्रकार त्रस्त हैं । लंबे दिनों से कलम घिस कर शब्दों/वाक्यों में चंदन सी खुशबू बिखरने वाले लेखकों/पत्रकारों के लेखन को कुतर (एडिट) कर अपना नाम जोड़ने वाले जहां बिल में घुसते नजर आ रहे हैं, वहीं चूहों की उछलकूद से त्रस्त सभी इस अभियान में खुलकर फ्रंट पर आते दिख रहे हैं ।
पत्रकारिता में तपस्या करने वाले ---
पत्रकारिता में जिले के पत्रकार श्री नितिन अवस्थी लोकप्रिय ऑलराउंडर लिखने वाले हैं । 1995 में दैनिक 'आज' से संवाद लेखन शुरू कर 'दैनिक जागरण' सहित अनेक न्यूज चैनलों की स्थापना में योगदान के बाद सम्प्रति 'महुआ' न्यूज चैनल के रिपोर्टर हैं। इसी प्रकार उच्चस्तरीय लेखन करने वाले 'भाष्कर' दैनिक, लखनऊ के व्यूरोचीफ श्री संतोष देव गिरि, जिले के 1984 से प्रकाशित उन दिनों के एकमात्र हिंदी दैनिक 'जगप्रकाश' के सम्पादक श्री मंगलापति द्विवेदी, लंबे समय तक पत्रकारिता कर अब चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े नीमा संस्था के डॉ शक्ति श्रीवास्तव, UNI एवं जनसत्ता के जिला प्रतिनिधि श्री राजेन्द्र तिवारी आदि ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें किसी भी तरह की रिपोर्टिंग में महारत हासिल है ।
इसके अलावा महाविद्यालयीय पत्रिका प्रकाशित करने वाले विन्ध्यवासिनी महिला डिग्री कालेज के प्रबंधक और ख्यातिलब्ध आर्थोपेडिक चिकित्सक डॉ नीरज त्रिपाठी, सोनभद्र जिले के प्रबुद्ध पत्रकार श्री अश्विनी सिंह, BHU साउथ कैंपस में PRO रह चुके श्री दृगविन्दु सिंह, युवा सामाजिक कार्यकर्ता श्री विभु कुमार मिश्र, दैनिक आज में संवाद लिखने वाले तथा आदर्श इंटर कालेज में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त श्री राधेश्याम विमल, श्री संजय श्रीवास्तव, श्री गणेश(बीएचपी), एवं विभिन्न विषयों पर त्वरित टिप्पणी करने वाले श्री प्रमोद कुमार द्विवेदी आदि सबकी राय है कि लेखन-चोरों पर सख्त नजर रखी जाए और उन्हें कॉपीराइट एक्ट©के तहत घेरा जाए ।
झंडूबाम कम्पनी ने इस एक्ट का लाभ लिया ---
कुछ साल पहले 'मुन्नी बदनाम हुई नशेमन तेरे लिए...मुन्नी झंडूबाम हुई...' गीत में झंडूबाम शब्द के प्रयोग पर कम्पनी ने फ़िल्म निर्माता पर कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा ठोका जिसपर फ़िल्म निर्माता को मुआवजा देने पड़ा । खबर के अनुसार एक शब्द के प्रयोग पर 7 लाख रुपए देने की बात प्रकाश में आई थी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर




0 टिप्पणियाँ