तोड़फोड़ से पहले कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जाएं ----
मिर्जापुर । मां विन्ध्यवासिनी धाम में कॉरिडोर को लेकर हो रहे नापजोख तथा भविष्य में तोड़फोड़ की संभावना के चलते शनिवार को मंदिर धाम में बंदी हुई । बंदी तो अर्धबन्दी ही कही जा रही है लेकिन आगे चलकर यह पूर्णबन्दी का रूप ले सकती है ।
बहुतेरे पंडे और दुकानदार का अस्तित्व खत्म हो जाएगा ।---
जिस प्रकार से भूमि अधिग्रहण की बातें सामने आ रही हैं, उसको देखते हुए बहुतेरे पंडा और दुकानदार मंदिर क्षेत्र से गायब हो जाएंगे ।
जब जब विंध्याचल आंदोलित हुआ है...---
पहलीबार विंध्याचल में अभूतपूर्व बंदी मंदिर के सरकारीकरण को लेकर 1998 में हुई थी । तत्कालीन DM श्री चन्द्रमा प्रसाद ने बंदी के दिन सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ आंदोलन को विफल करने का सरकारी प्रयास किया लेकिन मंदिर का सरकारीकरण नहीं हो सका । उसके लगभग 17-18 साल बाद फिर एक बार सरकारीकरण का प्रयास हुआ, सभी पंडा तथा दुकानदार एकजुट हो गए और पुनः प्रयास विफल हुआ था ।
इस बार की स्थिति अलग है---
इस बार की स्थिति भिन्न है । विंध्य कॉरिडोर को लेकर पंडा समुदाय दो फांक में दिख रहा है । जिन पर हथौड़ा चलेगा, वे आहत हैं और बंदी के समर्थन में हैं जबकि जो तोड़फोड़ से मंदिर के फ्रंट पर आ जाएंगे, वे चाहते है कि यथाशीघ्र हथौड़ा नहीं बुलडोजर चले ।
फिलहाल 25 साल तक काम चल सकता है ---
मंदिर को चौड़ा किए जाने को लेकर वाराणसी के बाबा विश्वनाथ मंदिर से तुलना की जा रही है जो तुलना योग्य इसलिए नहीं है क्योंकि वाराणसी महानगर है और वहां काशी नरेश एवं मुक्तिधाम मणिकर्णिका का विशेष धार्मिक महत्त्व है । हर तरह के व्यापार का हब है । वहां पूर्वांचल से लेकर बिहार, नेपाल, मध्यप्रदेश ही नहीं दक्षिण भारत से निरन्तर लोगों का आगमन होता है । व्यापार के मामले में वहां बनारसी साड़ी का पूछना ही क्या ? मारवाड़ी समाज व्यापार का केंद्र बनाए है । तीन तीन विश्वविद्यालय है । दर्जनों ख्यातियुक्त समाचार पत्रों का प्रकाशन होता है । आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के केंद्र हैं । शिक्षा एवं इलाज के लिए सैकड़ों सुव्यवस्थित संस्थान हैं । ऐसी स्थिति में काशी में जो रेला दिखता है वह विंध्याचल में नहीं ।
आखिर नवरात्र में कैसे सुव्यवस्थित होता है दर्शन ?-- -
नवरात्र में किसी किसी दिन 5 लाख से अधिक लोग दर्शन करते हैं जबकि नवरात्र के अलावा विशेष तिथियों में छोड़कर अधिकतम 20 हजार लोग दर्शन करते हैं । इसके लिए भारी तोड़फोड़ और अरबों रुपए उस वक्त खर्च करना जबकि प्रदेश में आर्थिक संकट है और विकास योजनाएं धन के अभाव में कोमा में हैं ।
पौष पूर्णिमा पर DM का सफल प्रयोग---
इसी माह की पौष पूर्णिमा, 10 जनवरी '20 को DM श्री सुशील कुमार पटेल ने नवरात्र जैसी व्यवस्था कर दी थी । इतनी आसानी से दर्शन-पूजन हुआ कि सभी वाह वाह कहने लगे ।
सिर्फवाहनों से दिक्कत---
विंध्याचल में पूर्व में बरतर तिराहे, पश्चिम में स्टेट बैंक तथा दक्षिण में सामुदायिक अस्पताल पर यदि वाहनों को रोक दिया जाए तो फिलहाल कोई दिक्कत नहीं होती । इसमें भी कई सौ टेम्पो वाले तो जहां चाहे वहीं टेम्पो रोक कर सवारी ढोते हैं जिससे जाम लगता है ।
मंदिर पर---
दर असल कुल मामला पंडा वर्ग को लेकर है । हालांकि विगत कुछ वर्षों में प्रबुद्ध पण्डों ने पण्डावर्ग की छवि सुधारने में अग्रणी भूमिका निभाई है । कुछ प्रशासन के दबाव में भी बदले है और इन दिनों निकासद्वार से पंडा परिवारों पर भी रोक लगी है जबकि पंडा और उनके रिश्तेदारों को लंबे जमाने से किसी भी समय निकासद्वार से प्रवेश की छूट थी, जिस पर विगत 2 महीने से पूरी तरह रोक है लेकिन अभी भी पंडा समुदाय पर आरोप लगता है कि वे मंदिर पर जोर जबरदस्ती करते हैं । हालांकि इसमें कमी आई है बावजूद इसके कभी-कभी यात्रियों के साथ मारपीट की घटनाएं हो जा रही हैं जो सुर्खियों में आ जाती हैं । जिसके चलते पंडा समुदाय का वर्चस्व मानकर उसे तोड़ने की मुहिम शुरू हो जाती है ।
उम्र और योग्यता तय हो--
पंडा समुदाय के उम्र और योग्यता निर्धारण की मांग भी बहुत से लोग करते हैं । यह सच है कि विंध्याचल में वेदमन्त्रों, ज्योतिष संबंधित विद्यालय विंध्य विकास परिषद संचालित करे तो उससे पंडा समुदाय की योग्यता बढ़ेगी और तदनुसार आमदनी भी । बिना मांगे लोग अच्छी दक्षिणा देकर जाएंगे ।
विंध्य कॉरिडोर को लेकर पंडा समुदाय उद्वेलित : धाम में बंदी
अच्छे सुझावों पर तत्काल अमल करने वाले डीएम श्री पटेल से उम्मीद है कि धार्मिक नगरी में उक्त व्यवस्था के लिए वे फैसला लेंगे ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
मिर्जापुर । मां विन्ध्यवासिनी धाम में कॉरिडोर को लेकर हो रहे नापजोख तथा भविष्य में तोड़फोड़ की संभावना के चलते शनिवार को मंदिर धाम में बंदी हुई । बंदी तो अर्धबन्दी ही कही जा रही है लेकिन आगे चलकर यह पूर्णबन्दी का रूप ले सकती है ।
बहुतेरे पंडे और दुकानदार का अस्तित्व खत्म हो जाएगा ।---
जिस प्रकार से भूमि अधिग्रहण की बातें सामने आ रही हैं, उसको देखते हुए बहुतेरे पंडा और दुकानदार मंदिर क्षेत्र से गायब हो जाएंगे ।
जब जब विंध्याचल आंदोलित हुआ है...---
पहलीबार विंध्याचल में अभूतपूर्व बंदी मंदिर के सरकारीकरण को लेकर 1998 में हुई थी । तत्कालीन DM श्री चन्द्रमा प्रसाद ने बंदी के दिन सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ आंदोलन को विफल करने का सरकारी प्रयास किया लेकिन मंदिर का सरकारीकरण नहीं हो सका । उसके लगभग 17-18 साल बाद फिर एक बार सरकारीकरण का प्रयास हुआ, सभी पंडा तथा दुकानदार एकजुट हो गए और पुनः प्रयास विफल हुआ था ।
इस बार की स्थिति अलग है---
इस बार की स्थिति भिन्न है । विंध्य कॉरिडोर को लेकर पंडा समुदाय दो फांक में दिख रहा है । जिन पर हथौड़ा चलेगा, वे आहत हैं और बंदी के समर्थन में हैं जबकि जो तोड़फोड़ से मंदिर के फ्रंट पर आ जाएंगे, वे चाहते है कि यथाशीघ्र हथौड़ा नहीं बुलडोजर चले ।
फिलहाल 25 साल तक काम चल सकता है ---
मंदिर को चौड़ा किए जाने को लेकर वाराणसी के बाबा विश्वनाथ मंदिर से तुलना की जा रही है जो तुलना योग्य इसलिए नहीं है क्योंकि वाराणसी महानगर है और वहां काशी नरेश एवं मुक्तिधाम मणिकर्णिका का विशेष धार्मिक महत्त्व है । हर तरह के व्यापार का हब है । वहां पूर्वांचल से लेकर बिहार, नेपाल, मध्यप्रदेश ही नहीं दक्षिण भारत से निरन्तर लोगों का आगमन होता है । व्यापार के मामले में वहां बनारसी साड़ी का पूछना ही क्या ? मारवाड़ी समाज व्यापार का केंद्र बनाए है । तीन तीन विश्वविद्यालय है । दर्जनों ख्यातियुक्त समाचार पत्रों का प्रकाशन होता है । आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के केंद्र हैं । शिक्षा एवं इलाज के लिए सैकड़ों सुव्यवस्थित संस्थान हैं । ऐसी स्थिति में काशी में जो रेला दिखता है वह विंध्याचल में नहीं ।
आखिर नवरात्र में कैसे सुव्यवस्थित होता है दर्शन ?-- -
नवरात्र में किसी किसी दिन 5 लाख से अधिक लोग दर्शन करते हैं जबकि नवरात्र के अलावा विशेष तिथियों में छोड़कर अधिकतम 20 हजार लोग दर्शन करते हैं । इसके लिए भारी तोड़फोड़ और अरबों रुपए उस वक्त खर्च करना जबकि प्रदेश में आर्थिक संकट है और विकास योजनाएं धन के अभाव में कोमा में हैं ।
पौष पूर्णिमा पर DM का सफल प्रयोग---
इसी माह की पौष पूर्णिमा, 10 जनवरी '20 को DM श्री सुशील कुमार पटेल ने नवरात्र जैसी व्यवस्था कर दी थी । इतनी आसानी से दर्शन-पूजन हुआ कि सभी वाह वाह कहने लगे ।
सिर्फवाहनों से दिक्कत---
विंध्याचल में पूर्व में बरतर तिराहे, पश्चिम में स्टेट बैंक तथा दक्षिण में सामुदायिक अस्पताल पर यदि वाहनों को रोक दिया जाए तो फिलहाल कोई दिक्कत नहीं होती । इसमें भी कई सौ टेम्पो वाले तो जहां चाहे वहीं टेम्पो रोक कर सवारी ढोते हैं जिससे जाम लगता है ।
मंदिर पर---
दर असल कुल मामला पंडा वर्ग को लेकर है । हालांकि विगत कुछ वर्षों में प्रबुद्ध पण्डों ने पण्डावर्ग की छवि सुधारने में अग्रणी भूमिका निभाई है । कुछ प्रशासन के दबाव में भी बदले है और इन दिनों निकासद्वार से पंडा परिवारों पर भी रोक लगी है जबकि पंडा और उनके रिश्तेदारों को लंबे जमाने से किसी भी समय निकासद्वार से प्रवेश की छूट थी, जिस पर विगत 2 महीने से पूरी तरह रोक है लेकिन अभी भी पंडा समुदाय पर आरोप लगता है कि वे मंदिर पर जोर जबरदस्ती करते हैं । हालांकि इसमें कमी आई है बावजूद इसके कभी-कभी यात्रियों के साथ मारपीट की घटनाएं हो जा रही हैं जो सुर्खियों में आ जाती हैं । जिसके चलते पंडा समुदाय का वर्चस्व मानकर उसे तोड़ने की मुहिम शुरू हो जाती है ।
उम्र और योग्यता तय हो--
पंडा समुदाय के उम्र और योग्यता निर्धारण की मांग भी बहुत से लोग करते हैं । यह सच है कि विंध्याचल में वेदमन्त्रों, ज्योतिष संबंधित विद्यालय विंध्य विकास परिषद संचालित करे तो उससे पंडा समुदाय की योग्यता बढ़ेगी और तदनुसार आमदनी भी । बिना मांगे लोग अच्छी दक्षिणा देकर जाएंगे ।
विंध्य कॉरिडोर को लेकर पंडा समुदाय उद्वेलित : धाम में बंदी
अच्छे सुझावों पर तत्काल अमल करने वाले डीएम श्री पटेल से उम्मीद है कि धार्मिक नगरी में उक्त व्यवस्था के लिए वे फैसला लेंगे ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर




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