इसमें चोरी किसी मंदिर से पैसा/वस्तु चुराने जैसा अपराध है---
मिर्जापुर: मूल लेखक का नाम उड़ा कर (एडिट कर) एवं अपना जोड़ कर लेखक/पत्रकार/चिंतक बनने वालों के 'पोल-खोल' अभियान की शुरुआत 'लचक' (लेखन चोर कंट्रोल) फ्रंट ने शुरू की है । इस संबन्ध में कतिपय वास्तविक प्रबुद्ध लेखकों और पत्रकारों ने स्वागत किया है और इसकी आवश्यकता पर बल दिया है ।
स्वागत करने वाले---
स्वागत करने वालों में हिंदी सांध्य दैनिक 'गांडीव' के मिर्जापुर जिला प्रतिनिधि श्री शशि गुप्त, संस्कार भारती संस्था के पूर्व जिला सचिव श्री विन्ध्यवासिनी केसरवानी, यूपी जागरण न्यूज ग्रुप के श्री ए बी सिंह, नारद समाचार ग्रुप के श्री शशिकांत शुक्ल, कछवा (मिर्जापुर) के शोधार्थी श्री शुभम् उपाध्याय, श्री जीएच त्रिपाठी एवं श्री तौसीफ आदि शामिल हैं ।
उक्त लोगों की पीड़ा---
जरूर उक्त लोग इस तरह लेखन चोरों के शिकार हुए होंगे । क्योंकि इसमें लगभग सभी के बारे में आमधारणा है कि वे न्यूज-व्यूज का लेखन खुद करते हैं । तथाकथित पत्रकार/लेखक जो चूहे बन इनके लेखन को कुतर रहे हैं, उन्हें अब कॉपीराइट एक्ट© की चूहेदानी में कैद का अभियान शुरु किया गया है तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर होगा ।
चूहे के बच्चे से तुलना- -
चुहिया एक साथ दर्जनों बच्चे पैदा करती है । इसलिए इन दिनों लेखन कुतरने वाले ढेरों चूहे इस बिल से उस बिल ( इस ग्रुप से उस ग्रुप) में 'कुतर काम' में लगे हैं ।
पिताश्री डॉ भवदेव पांडेय के पुस्तकों से भी चोरी-
पिताश्री डॉ भवदेव पांडेय उ0 प्र0 सरकार से 'हिंदी गौरव' 'साहित्य भूषण', 'अज्ञेय सम्मान' साहित्य अकादमी नई दिल्ली से सम्मानित रहे । उनकी आचार्य रामचंद्र शुक्ल, निराला, बंग महिला, प्रेमघनजी, भारतेंदु बाबू हरिश्चंद, हिंदी साहित्य का इतिहास, लोकपर्व, पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र', वामनाचार्य गिरि, फिराक गोरखपुरी एवं लोकपर्व आदि पर लगभग दो दर्जन पुस्तकें नई दिल्ली के वाणी प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन आदि से छपी । इन पुस्तकों से आए दिन कुछ लोग चोरी करते हैं । सावन के महीने में तो कई समाचार पत्र कजली पर पूरा पूरा लेख जस का तस छापते हैं लेकिन लेखक का उल्लेख नहीं करते । जो गैर कानूनी है ।
कुछ ने कहा कि लचक फ्रंट का अभियान हवा-हवाई न रह जाए । तो इस संबन्ध में अनुरोध है कि इस तरह की चोरी का पता चले तो फ्रंट को अवगत कराएं ।
विंध्यप्रसाद की चोरी की हिम्मत एक डीएम को नहीं हो सकी ।--
मिर्जापुर में तैनाती के दौरान एक डीएम कतिपय 'कुतर अभियान' के लोगों के साथ बैठने लगे तो वे भी सम्पादक बनने की ख्वाहिश पाल लिए और मेरे द्वारा प्रकाशित 'विंध्यप्रसाद' पत्रिका को नाम बदल कर छपवाने की योजना बना रहे थे । कतिपय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कॉपीराइट एक्ट की बात बताने पर उन्होंने विचार त्याग दिया । हालांकि उनसे मां विन्ध्यवासिनी इतना रुष्ट हुई कि वे नकारात्मक तरीके के मामले में अंतर्राष्ट्रीय आलोचना/ निंदा के पात्र बने ।
शब्द सरस्वती हैं---
किताबें सरस्वती का मंदिर है और शब्द सरस्वती की मूर्ति है । इसमें चोरी करने वाला किसी मंदिर से पैसा या वस्तु चोरी करने जैसा अपराध करता है ।
मिर्जापुर: मूल लेखक का नाम उड़ा कर (एडिट कर) एवं अपना जोड़ कर लेखक/पत्रकार/चिंतक बनने वालों के 'पोल-खोल' अभियान की शुरुआत 'लचक' (लेखन चोर कंट्रोल) फ्रंट ने शुरू की है । इस संबन्ध में कतिपय वास्तविक प्रबुद्ध लेखकों और पत्रकारों ने स्वागत किया है और इसकी आवश्यकता पर बल दिया है ।
स्वागत करने वाले---
स्वागत करने वालों में हिंदी सांध्य दैनिक 'गांडीव' के मिर्जापुर जिला प्रतिनिधि श्री शशि गुप्त, संस्कार भारती संस्था के पूर्व जिला सचिव श्री विन्ध्यवासिनी केसरवानी, यूपी जागरण न्यूज ग्रुप के श्री ए बी सिंह, नारद समाचार ग्रुप के श्री शशिकांत शुक्ल, कछवा (मिर्जापुर) के शोधार्थी श्री शुभम् उपाध्याय, श्री जीएच त्रिपाठी एवं श्री तौसीफ आदि शामिल हैं ।
उक्त लोगों की पीड़ा---
जरूर उक्त लोग इस तरह लेखन चोरों के शिकार हुए होंगे । क्योंकि इसमें लगभग सभी के बारे में आमधारणा है कि वे न्यूज-व्यूज का लेखन खुद करते हैं । तथाकथित पत्रकार/लेखक जो चूहे बन इनके लेखन को कुतर रहे हैं, उन्हें अब कॉपीराइट एक्ट© की चूहेदानी में कैद का अभियान शुरु किया गया है तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर होगा ।
चूहे के बच्चे से तुलना- -
चुहिया एक साथ दर्जनों बच्चे पैदा करती है । इसलिए इन दिनों लेखन कुतरने वाले ढेरों चूहे इस बिल से उस बिल ( इस ग्रुप से उस ग्रुप) में 'कुतर काम' में लगे हैं ।
पिताश्री डॉ भवदेव पांडेय के पुस्तकों से भी चोरी-
पिताश्री डॉ भवदेव पांडेय उ0 प्र0 सरकार से 'हिंदी गौरव' 'साहित्य भूषण', 'अज्ञेय सम्मान' साहित्य अकादमी नई दिल्ली से सम्मानित रहे । उनकी आचार्य रामचंद्र शुक्ल, निराला, बंग महिला, प्रेमघनजी, भारतेंदु बाबू हरिश्चंद, हिंदी साहित्य का इतिहास, लोकपर्व, पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र', वामनाचार्य गिरि, फिराक गोरखपुरी एवं लोकपर्व आदि पर लगभग दो दर्जन पुस्तकें नई दिल्ली के वाणी प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन आदि से छपी । इन पुस्तकों से आए दिन कुछ लोग चोरी करते हैं । सावन के महीने में तो कई समाचार पत्र कजली पर पूरा पूरा लेख जस का तस छापते हैं लेकिन लेखक का उल्लेख नहीं करते । जो गैर कानूनी है ।
कुछ ने कहा कि लचक फ्रंट का अभियान हवा-हवाई न रह जाए । तो इस संबन्ध में अनुरोध है कि इस तरह की चोरी का पता चले तो फ्रंट को अवगत कराएं ।
विंध्यप्रसाद की चोरी की हिम्मत एक डीएम को नहीं हो सकी ।--
मिर्जापुर में तैनाती के दौरान एक डीएम कतिपय 'कुतर अभियान' के लोगों के साथ बैठने लगे तो वे भी सम्पादक बनने की ख्वाहिश पाल लिए और मेरे द्वारा प्रकाशित 'विंध्यप्रसाद' पत्रिका को नाम बदल कर छपवाने की योजना बना रहे थे । कतिपय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कॉपीराइट एक्ट की बात बताने पर उन्होंने विचार त्याग दिया । हालांकि उनसे मां विन्ध्यवासिनी इतना रुष्ट हुई कि वे नकारात्मक तरीके के मामले में अंतर्राष्ट्रीय आलोचना/ निंदा के पात्र बने ।
शब्द सरस्वती हैं---
किताबें सरस्वती का मंदिर है और शब्द सरस्वती की मूर्ति है । इसमें चोरी करने वाला किसी मंदिर से पैसा या वस्तु चोरी करने जैसा अपराध करता है ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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