विकास में पिछड़ा देख कोई भी पिता अपनी लड़की की शादी इस गांव के लड़के के साथ करने को तैयार नहीं
चुनाव के समय मौजूदा विधायक भी विकास का वादा करके कर रहे हैं वादा खिलाफी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: एक तरफ जहां केंद्र व प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीण अंचल में रह रहे लोगों की सुविधा के मद्देनजर गांवों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शहर से जोड़ने की कवायद में लगी हुई है तो, वहीं महराजगंज विकासखंड क्षेत्र के बरहुवा ग्राम सभा का गोदरिया गांव आज भी आजादी के 72 वर्ष बीत जाने के बाद भी आजाद नहीं हुआ। यह सुनकर आपको आश्चर्य तो जरुर हो रहा होगा लेकिन यहां की यह हकीकत है। गोदरिया गांव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां की आबोहवा, सड़क बिजली पानी तथा संसाधन देख आप यह अनुमान लगाने में जरा भी गुरेज नहीं करेंगे कि, यहां रहने वाले लोग आज भी 72 वर्ष पहले की ही जिंदगी जी रहे हैं।
आपको बता दें कि, देश को आजाद हुए 72 साल बीत गए हैं लेकिन गोदरिया गांव को जाने के लिए ग्रामीणों को आज भी पक्की सड़क की दरकार है। इस गांव में प्रवेश करने के लिए जनाब पक्की सड़क की बात तो छोड़िए, गांव के अंदर जाने के लिए खड़ंजा मार्ग तक का निर्माण नहीं कराया गया है। गांव को जाने वाले दोनों कच्चे रास्ते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। बारिश के मौसम में गांव में यदि कोई बीमार हो जाय तो, गांव के अंदर प्रवेश करने के लिए एंबुलेंस के भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और वह गांव के बाहर ही थरथर कांपने लगती है।
ग्रामीणों ने इस बाबत कई बार शिकायत गांव में आने वाले नेताओं से की है लेकिन चुनाव के वक्त राजनीतिक रोटियां सेकने वाले यह नेता ग्रामीणों को आश्वासन के अलावा अभी तक और कुछ नहीं दे सके। गोदरिया गांव के रहने वाले राम सजीवन बताते हैं कि, भैया हमरे गांव मा जब कबौ बरसात मा शादी वियाह पढ़ जात है तौ हम सबका दुलहा का मंडप तक पैदलय लई जाय का पड़त हैं। उसी गांव के रहने वाले रामसनेही बताते हैं कि, भैया जब कबो गर्भवती औरतन और बीमार मनइन का अस्पताल लई जाए का होत हैं तो, हमरे गांव मा एंबुलेंसव नहीं आय पावत हैं। उई ससुरी बहिरै थर्रथर्र कांपइ लागत है।
जब हमारे संवाददाता ने ग्रामीणों से पूछा की इसकी शिकायत आप लोगों ने किसी से की है तो, ग्रामीणों ने एक सुर में जबाब दिया कि, उन लोगों ने इसकी शिकायत कई बार उच्चाधिकारियों से और यहां आने वाले जनप्रतिनिधियों व ग्राम प्रधान से की है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। आश्वासन के अलावा आज तक जमीनी हम ग्रामीणों को कुछ मिला ही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि, गोदरिया गांव बछरावां विधानसभा का सबसे आखरी गांव होने के चलते यह गांव विकास से अछूता रह गया है। इस गांव के विकास के लिए न तो कोई नेता ध्यान देता है और न ही अधिकारी। ग्रामीण लगातार बोलते जा रहे थे उन्होंने कहा कि, उन लोगों ने स्थानीय विधायक से भी यहां पक्के रोड की मांग की थी लेकिन आज तक विधायक और उनके द्वारा बनवाए जाने वाली पक्की सड़क का रास्ता देखते देखते उन लोगों की आंखें पथरा सी गई है मगर रास्ता अभी तक नहीं बना है सिर्फ और सिर्फ ग्रामीणों को यहां आने वाले हर जनप्रतिनिधि व अधिकारी से आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिलता है।
ग्रामीण रामबरन ने बताया कि, इस बार के भाजपा विधायक राम नरेश रावत से यहां के ग्रामीणों को काफी ज्यादा उम्मीदें थी लेकिन यह उम्मीदें ना उम्मीदी में बदल गई। विदित हो कि, इस गांव में लगभग 300 की आबादी निवास करती है जो कि, ओबीसी वर्ग लोधी बिरादरी से आते हैं। कुछ ग्रामीणों को का तो यहां तक कहना है कि, उनके गांव में लोग रिश्ते के लिए आते हैं लेकिन गांव में रोड न होने के चलते लोग अपनी लड़की की शादी ऐसे पिछड़े गांव में करना पसंद नहीं करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन लोगों ने सोचा था कि, इस बार भाजपा की सरकार बनी है। उनके गांव का कुछ न कुछ ध्यान जरूर दिया जाएगा मगर भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी नतीजा सिफर ही है।
मामले में खंड विकास अधिकारी प्रवीण कुमार पटेल का कहना है कि, मीडिया के माध्यम से मामला प्रकाश में आया है। जल्द ही जांच कराकर ग्रामीणों को आवागमन की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
चुनाव के समय मौजूदा विधायक भी विकास का वादा करके कर रहे हैं वादा खिलाफी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: एक तरफ जहां केंद्र व प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीण अंचल में रह रहे लोगों की सुविधा के मद्देनजर गांवों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शहर से जोड़ने की कवायद में लगी हुई है तो, वहीं महराजगंज विकासखंड क्षेत्र के बरहुवा ग्राम सभा का गोदरिया गांव आज भी आजादी के 72 वर्ष बीत जाने के बाद भी आजाद नहीं हुआ। यह सुनकर आपको आश्चर्य तो जरुर हो रहा होगा लेकिन यहां की यह हकीकत है। गोदरिया गांव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां की आबोहवा, सड़क बिजली पानी तथा संसाधन देख आप यह अनुमान लगाने में जरा भी गुरेज नहीं करेंगे कि, यहां रहने वाले लोग आज भी 72 वर्ष पहले की ही जिंदगी जी रहे हैं।
आपको बता दें कि, देश को आजाद हुए 72 साल बीत गए हैं लेकिन गोदरिया गांव को जाने के लिए ग्रामीणों को आज भी पक्की सड़क की दरकार है। इस गांव में प्रवेश करने के लिए जनाब पक्की सड़क की बात तो छोड़िए, गांव के अंदर जाने के लिए खड़ंजा मार्ग तक का निर्माण नहीं कराया गया है। गांव को जाने वाले दोनों कच्चे रास्ते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। बारिश के मौसम में गांव में यदि कोई बीमार हो जाय तो, गांव के अंदर प्रवेश करने के लिए एंबुलेंस के भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और वह गांव के बाहर ही थरथर कांपने लगती है।
ग्रामीणों ने इस बाबत कई बार शिकायत गांव में आने वाले नेताओं से की है लेकिन चुनाव के वक्त राजनीतिक रोटियां सेकने वाले यह नेता ग्रामीणों को आश्वासन के अलावा अभी तक और कुछ नहीं दे सके। गोदरिया गांव के रहने वाले राम सजीवन बताते हैं कि, भैया हमरे गांव मा जब कबौ बरसात मा शादी वियाह पढ़ जात है तौ हम सबका दुलहा का मंडप तक पैदलय लई जाय का पड़त हैं। उसी गांव के रहने वाले रामसनेही बताते हैं कि, भैया जब कबो गर्भवती औरतन और बीमार मनइन का अस्पताल लई जाए का होत हैं तो, हमरे गांव मा एंबुलेंसव नहीं आय पावत हैं। उई ससुरी बहिरै थर्रथर्र कांपइ लागत है।
जब हमारे संवाददाता ने ग्रामीणों से पूछा की इसकी शिकायत आप लोगों ने किसी से की है तो, ग्रामीणों ने एक सुर में जबाब दिया कि, उन लोगों ने इसकी शिकायत कई बार उच्चाधिकारियों से और यहां आने वाले जनप्रतिनिधियों व ग्राम प्रधान से की है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। आश्वासन के अलावा आज तक जमीनी हम ग्रामीणों को कुछ मिला ही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि, गोदरिया गांव बछरावां विधानसभा का सबसे आखरी गांव होने के चलते यह गांव विकास से अछूता रह गया है। इस गांव के विकास के लिए न तो कोई नेता ध्यान देता है और न ही अधिकारी। ग्रामीण लगातार बोलते जा रहे थे उन्होंने कहा कि, उन लोगों ने स्थानीय विधायक से भी यहां पक्के रोड की मांग की थी लेकिन आज तक विधायक और उनके द्वारा बनवाए जाने वाली पक्की सड़क का रास्ता देखते देखते उन लोगों की आंखें पथरा सी गई है मगर रास्ता अभी तक नहीं बना है सिर्फ और सिर्फ ग्रामीणों को यहां आने वाले हर जनप्रतिनिधि व अधिकारी से आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिलता है।
ग्रामीण रामबरन ने बताया कि, इस बार के भाजपा विधायक राम नरेश रावत से यहां के ग्रामीणों को काफी ज्यादा उम्मीदें थी लेकिन यह उम्मीदें ना उम्मीदी में बदल गई। विदित हो कि, इस गांव में लगभग 300 की आबादी निवास करती है जो कि, ओबीसी वर्ग लोधी बिरादरी से आते हैं। कुछ ग्रामीणों को का तो यहां तक कहना है कि, उनके गांव में लोग रिश्ते के लिए आते हैं लेकिन गांव में रोड न होने के चलते लोग अपनी लड़की की शादी ऐसे पिछड़े गांव में करना पसंद नहीं करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन लोगों ने सोचा था कि, इस बार भाजपा की सरकार बनी है। उनके गांव का कुछ न कुछ ध्यान जरूर दिया जाएगा मगर भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी नतीजा सिफर ही है।
मामले में खंड विकास अधिकारी प्रवीण कुमार पटेल का कहना है कि, मीडिया के माध्यम से मामला प्रकाश में आया है। जल्द ही जांच कराकर ग्रामीणों को आवागमन की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।


0 टिप्पणियाँ