यह सोचना कि कोई चीज मुफ़्त मिल रही है, यह बेवकूफी है ।
-विचारक डेसमंड टूटू लिखते हैं-'अंग्रेज जहां-जहां गए, वहां-वहां यही कहा कि हम आपके देश के लिए बाइबिल लाएं हैं । इसमें आपके लिए प्रार्थना एवं भलाई शामिल है।'
-हमारे देश के लोगों के पास जमीन, जंगल, कृषि, अन्य जीवनोपयोगी संसाधन आदि थे । जब हमने आंखें खोली तो हमारे पास मिशनरियां थीं और उनके हाथ जमीन, जंगल, कृषि और अन्य संसाधन ।
वर्तमानदौर में मोबाइल कम्पनियां आई हैं । उनके हाथ में ह्वाट्सएप, फेसबुक आदि के सोशल साइट हैं । जो हमें मुफ्त देने के एवज में हमारी स्वतंत्रता, निजी जानकारियां छीन रही हैं । हमने मुफ्त के लालच में अपनी निजता उनके हवाले कर दी।
उक्तउद्धरण गीता प्रेस के 'बोध कथा' विशेषांक से लेते हुए यह अवगत कराना उचित प्रतीत होता है कि यदि हमने अपनी संस्कृति खो दी तो न घर के होंगे न घाट के ।
शिक्षण संस्थाओं का दायित्व ---
छोटी कक्षाओं से ही बच्चों में नैतिक संस्कार के लिए गीता प्रेस, गोरखपुर की अति कम मूल्य की नैतिक शिक्षा संबंधित पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित करने के अभियान में अनेक संस्थाओं का योगदान सराहनीय रहा है ।
जिनसंस्थाओं का रहा योगदान---
नगर के डैफोडिल्स स्कूल, प्ले-वे स्कूल, एस एन पब्लिक स्कूल, वर्धमान स्कूल के अलावा नगर के उद्यमी मो परवेज अहमद तथा मो रजी के बाद सेम्फोर्ड स्कूल एवं सावित्री बालिका इंटर कालेज, जमूनहियां ने भी इस अभियान में कदम से कदम मिलाया है । सभी शिक्षण संस्थाओं एवं समाज के प्रति दायित्व बोध रखने वालों से उम्मीद है कि वे गीता प्रेस की पुस्तकों को पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करें । अत्यंत सुबोध और सरल शैली की इन पुस्तकों के पढ़ने से जब बड़ी उम्र के लोगों का हृदय सुकोमल हो सकता है तो बच्चे स्वभावतः सुकोमल होते ही है । निश्चित रूप से इन पुस्तकों का असर उनके व्यक्तित्व निर्माण में सकारात्मक रूप में दिखेगा।
-सलिलपांडेय, मिर्जापुर ।
-विचारक डेसमंड टूटू लिखते हैं-'अंग्रेज जहां-जहां गए, वहां-वहां यही कहा कि हम आपके देश के लिए बाइबिल लाएं हैं । इसमें आपके लिए प्रार्थना एवं भलाई शामिल है।'
-हमारे देश के लोगों के पास जमीन, जंगल, कृषि, अन्य जीवनोपयोगी संसाधन आदि थे । जब हमने आंखें खोली तो हमारे पास मिशनरियां थीं और उनके हाथ जमीन, जंगल, कृषि और अन्य संसाधन ।
वर्तमानदौर में मोबाइल कम्पनियां आई हैं । उनके हाथ में ह्वाट्सएप, फेसबुक आदि के सोशल साइट हैं । जो हमें मुफ्त देने के एवज में हमारी स्वतंत्रता, निजी जानकारियां छीन रही हैं । हमने मुफ्त के लालच में अपनी निजता उनके हवाले कर दी।
उक्तउद्धरण गीता प्रेस के 'बोध कथा' विशेषांक से लेते हुए यह अवगत कराना उचित प्रतीत होता है कि यदि हमने अपनी संस्कृति खो दी तो न घर के होंगे न घाट के ।
शिक्षण संस्थाओं का दायित्व ---
छोटी कक्षाओं से ही बच्चों में नैतिक संस्कार के लिए गीता प्रेस, गोरखपुर की अति कम मूल्य की नैतिक शिक्षा संबंधित पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित करने के अभियान में अनेक संस्थाओं का योगदान सराहनीय रहा है ।
जिनसंस्थाओं का रहा योगदान---
नगर के डैफोडिल्स स्कूल, प्ले-वे स्कूल, एस एन पब्लिक स्कूल, वर्धमान स्कूल के अलावा नगर के उद्यमी मो परवेज अहमद तथा मो रजी के बाद सेम्फोर्ड स्कूल एवं सावित्री बालिका इंटर कालेज, जमूनहियां ने भी इस अभियान में कदम से कदम मिलाया है । सभी शिक्षण संस्थाओं एवं समाज के प्रति दायित्व बोध रखने वालों से उम्मीद है कि वे गीता प्रेस की पुस्तकों को पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करें । अत्यंत सुबोध और सरल शैली की इन पुस्तकों के पढ़ने से जब बड़ी उम्र के लोगों का हृदय सुकोमल हो सकता है तो बच्चे स्वभावतः सुकोमल होते ही है । निश्चित रूप से इन पुस्तकों का असर उनके व्यक्तित्व निर्माण में सकारात्मक रूप में दिखेगा।
-सलिलपांडेय, मिर्जापुर ।


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