क्यों किया जाता है विभिन्न स्थानों पर होलिका पूजन

हरदोई: होली का इतिहास हरदोई से ही शुरू होता है, जिसे भक्त प्रह्लाद की धरती बताया जाता है। जहाँ भक्त प्रह्लाद का जन्म हुआ था। जिले के विभिन्न स्थानों पर होली के दिन होलिका का पूजन का किया जाता है। इसी क्रम में शहर के दुलीचन्द चौराहा स्थित होलिका का नगर की विभिन्न महिलाओं ने होली के दिन पूजन किया।
      जहां कुछ महिलाओं ने कहा कि, लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि, जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसकी हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? कि, होलिका-पूजन के पीछे एक रहस्य है। जिस दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने वाली थी, उस दिन नगर के सभी लोगों ने घर-घर में अग्नि प्रज्वलित कर प्रहलाद की रक्षा करने के लिए अग्निदेव से प्रार्थना की थी।
      लोकहृदय को प्रह्लाद ने कैसे जीत लिया था, यह बात इस घटना में प्रतिबिम्बित होती है।
अग्निदेव ने लोगों के अंतःकरण की प्रार्थना को स्वीकार किया और लोगों की इच्छा के अनुसार ही हुआ। होलिका नष्ट हो गई और अग्नि की कसौटी में खरा उतरा प्रहलाद नरश्रेष्ठ बन गया। प्रहलाद को बचाने की प्रार्थना के रूप में प्रारंभ हुई घर-घर की अग्नि पूजा ने कालक्रमानुसार सामुदायिक पूजा का रूप लिया और उससे ही गली-गली में होलिका की पूजा प्रारंभ हुई।

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