लंच पैकेट बिल्कुल 24 कैरेट सा टँच था--
दुर्भाग्य के सूचक कोबिड 19 को अप्रैल 19 ने लगाया तमाचा---
मिर्जापुर। कोटा (राजस्थान) के बच्चे जिले में आए तो उनके मुख से अपना वतन (जिला) बड़ा प्यारा लगे तब निकल पड़ा जब उनके रहने-खाने की उत्तमोत्तम व्यवस्था मिली । उनसे प्रशासनिक अधिकारी इतने प्यार-दुलार से पेश आए गोया वे घर के सदस्य हैं ।
पूड़ी-हलवा जायकेदार- कोटा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग करने वाले छात्र-छात्राएं अच्छे परिवारों के थे । वे कोटा में स्तरीय खानपान तथा रहन सहन में पढ़ते हैं लेकिन जब उन्हें पड़री स्थित क्वारन्टीन सेंटर में प्रशासन की ओर से पूड़ी, सब्जी और हलवा का लंच पैकेट मिला तो उनके मुंह से बरबस वाह निकल पड़ा।
सुबह सुबह DM SP का 20 मिनट के लिए पहुँचना तथा ADM का रात से ही डेरा-डंडा जमाए रहने के कारण नाश्ते में उत्तम चाय-बिस्किट तथा बिसलेरी का पानी दिया गया तो उन्हें लगा कि सच में जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी (जन्म देने वाली मां और जन्म भूमि स्वर्ग से श्रेष्ठ होती है) श्लोक अक्षरशः सही है ।
छूटा सामान घण्टों बाद मिल गया- अपराह्न जब बच्चे अपने दरबे (घर) के लिए रवाना होने निकले तो संभवतः उनके हृदय का आभार गगन तक पहुंच गया था, सो वह आभार वर्षा की बूंदों के रूप में धरती पर आने लगा । इस आपाधापी में दो-एक बच्चों का बैग आदि छूट गया ।
घर आने पर जब नहीं मिला तब अभिभावक घण्टों बाद वहां पहुँचे तो वह सही सलामत मिल गया । उस बैग में बच्चों का कैरियर (पाठ्य सामाग्री आदि) था । इस प्रकार दुर्भाग्य का सूचक कोबिड-19 को अप्रैल 19 की तारीख तमाचा लगा गई ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
दुर्भाग्य के सूचक कोबिड 19 को अप्रैल 19 ने लगाया तमाचा---
मिर्जापुर। कोटा (राजस्थान) के बच्चे जिले में आए तो उनके मुख से अपना वतन (जिला) बड़ा प्यारा लगे तब निकल पड़ा जब उनके रहने-खाने की उत्तमोत्तम व्यवस्था मिली । उनसे प्रशासनिक अधिकारी इतने प्यार-दुलार से पेश आए गोया वे घर के सदस्य हैं ।
पूड़ी-हलवा जायकेदार- कोटा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग करने वाले छात्र-छात्राएं अच्छे परिवारों के थे । वे कोटा में स्तरीय खानपान तथा रहन सहन में पढ़ते हैं लेकिन जब उन्हें पड़री स्थित क्वारन्टीन सेंटर में प्रशासन की ओर से पूड़ी, सब्जी और हलवा का लंच पैकेट मिला तो उनके मुंह से बरबस वाह निकल पड़ा।
सुबह सुबह DM SP का 20 मिनट के लिए पहुँचना तथा ADM का रात से ही डेरा-डंडा जमाए रहने के कारण नाश्ते में उत्तम चाय-बिस्किट तथा बिसलेरी का पानी दिया गया तो उन्हें लगा कि सच में जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी (जन्म देने वाली मां और जन्म भूमि स्वर्ग से श्रेष्ठ होती है) श्लोक अक्षरशः सही है ।
छूटा सामान घण्टों बाद मिल गया- अपराह्न जब बच्चे अपने दरबे (घर) के लिए रवाना होने निकले तो संभवतः उनके हृदय का आभार गगन तक पहुंच गया था, सो वह आभार वर्षा की बूंदों के रूप में धरती पर आने लगा । इस आपाधापी में दो-एक बच्चों का बैग आदि छूट गया ।
घर आने पर जब नहीं मिला तब अभिभावक घण्टों बाद वहां पहुँचे तो वह सही सलामत मिल गया । उस बैग में बच्चों का कैरियर (पाठ्य सामाग्री आदि) था । इस प्रकार दुर्भाग्य का सूचक कोबिड-19 को अप्रैल 19 की तारीख तमाचा लगा गई ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर

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