"चमक कर जियो" कमल बाजपेई

पास आके देखो,
ये घाव,
छाती पर नहीं,
पीठ पर नहीं,
पाँवों में हैं,
मालूम होता है सड़क ने उकताकर ,
चिकोटी काटी है,
घृणा से नहीं , प्यार से,
याद दिलाने को,
जीवन जीना है तो,
घिसट कर नहीं,
चमक कर जियो,
फिर रौंदों मेरी छाती,
कोई गम मुझे नहीं ।
Written by - कमल बाजपेई

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