वन विभाग की टीम पर लापरवाही का आरोप।। Raebareli news ।।

आवारा कुत्तों के हमले से बारहसिंघा की मौत
रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़/रायबरेली: शिवगढ़ थाना क्षेत्र के खरगी खेड़ा मजरे ओसाह में बृहस्पतिवार की सुबह बारहसिंघा को 4 आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर घायल कर दिया। समय से  इलाज न होने के चलते बारहसिंघा की मौत हो गई।
       आपको बता दें कि, शिवगढ़ थाना क्षेत्र के खरगी खेड़ा मजरे ओसाह में बृहस्पतिवार की सुबह करीब साढ़े 6 बजे खरगी खेड़ा निवासी मनीष कुमार त्रिवेदी गांव के राजेश चंद्र शुक्ला, आशुतोष त्रिवेदी, दीपू वर्मा के साथ जब अपनी बाग पहुंचे तो वहां 4 आवारा कुत्ते बारहसिंघा को नोच रहे थे। आवारा कुत्तों के सामने बारहसिंघा बेबस था। चारों लोगों ने बगैर वक्त गवाए कुत्तों को भगाकर बारहसिंघा को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया और उसकी सूचना डायल 112 व शिवगढ़ थाने में दी।
      विडम्बना है कि, शिकायत के घण्टों बाद  वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वहीं शिवगढ़ पशु चिकित्सालय से करीब साढ़े 9 बजे पहुंचे पैरावेट विवेक ऋषि बारहसिंघा का इलाज कर ही रहे थे कि, तभी इलाज के दौरान बारहसिंघा ने दम तोड़ दिया।
      राकेश त्रिवेदी उर्फ आलू महराज सहित ग्रामीणों ने वन विभाग व पशु चिकित्सालय की टीम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि, यदि समय से इलाज हो जाता तो बारहसिंघा की जान बच सकती थी। वहीं वन दरोगा इंद्र बहादुर श्रीवास्तव का कहना है कि, सूचना के कुछ देर बाद पशु चिकित्सालय की टीम के साथ वे लोग मौके पर पहुंच गए थे। लेकिन बारहसिंघा कुत्तों के हमले से बुरी तरह जख्मी हो गया था।
      जिसका पशु चिकित्सालय की टीम द्वारा इलाज किया जा रहा था, तभी बारहसिंघा ने दम तोड़ दिया। वहीं शिवगढ़ पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर जावेद आलम ने बताया कि, घटना करीब साढे़ 6 बजे की है। ग्रामीणों द्वारा हमें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। साढ़े 8 बजे मुझे शिवगढ़ एसओ द्वारा सूचना मिली। डॉक्टर जावेद आलम ने बताया कि, कल आंधी में बेड़ारु गौशाला की टीन उड़ गई थी, जिससे कई मवेशी जख्मी हो गए थे। जिनका वे इलाज कर रहे थे।
     उन्होंने बताया कि, सूचना मिलते ही बारहसिंघा के इलाज के लिए उन्होंने अपनी टीम को भेज दिया था। जो करीब 9:30 बजे मौके पर पहुंच गई थी। डॉक्टर जावेद आलम ने आगे बताया कि, बारहसिंघा का पीएम किया गया है, एनिमल शॉक की वजह से बारहसिंघा की मौत हुई है। पीएम के बाद बारहसिंघा की डेड बॉडी को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया था। जिसे वन विभाग ने उनकी मौजूदगी में गड्ढा खुदवाकर दफना दिया है।

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