सिर्फ 1 दिन नहीं हम हर दिन वटवृक्ष के करीब रहे।
रजनीकांत अवस्थी
महाराजगंज/रायबरेली: कोरोना वायरस से बचाव को लेकर लॉकडाउन अपने चौथे चरण में पहुंच चुका है। वहीं, शुक्रवार को महराजगंज सहित समूचे रायबरेली जनपद में सुहागिनों के महापर्व वट सावित्री पूजा पर महिलाओं ने शारीरिक दूरी के नियम का पालन किया। शहरी क्षेत्रों तथा कस्बों में अधिकांश महिलाओं ने घरों में ही बरगद की डाल का पूजन किया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ के घर के पास ही वट (बरगद का पेड़) होने पर परिक्रमा की गई। इस दौरान महिलाओं के मन से कोरोना का डर फुर्र दिखाई दिया।
आपको बता दें कि, महिलाओं ने वट सावित्री व्रत के दौरान पति की दीर्घायु और परिवार की सुख शांति की कामना की। ऐसा ही कुछ नजारा महराजगंज, बछंरावा, शिवगढ़ कस्बों सहित ग्रामीण क्षेत्रों, मऊ सिकंदरपुर, डेपारमऊ, मुरैनी, चन्दापुर, मोन, हलोर, राम गांव, हरदोई, तौलीपारा, हरदोई, नारायणपुर, ओसाह, बावन बुजुर्ग बल्ला में भी दिखाई दिया।
इधर, कस्बा महराजगंज में कुछ महिलाओं ने तो अपने घर में तथा कुछ महिलाओं ने बट वृक्ष के नीचे जाकर शारीरिक दूरी बनाते हुए अनुपमा पांडेय, लवली श्रीवास्तव, नीता भदोरिया (महिला आरक्षी), भाजपा नेत्री सुधा अवस्थी, मऊ गांव में कांती अवस्थी, सरिता अवस्थी, मोहनी सहित क्षेत्र की तमाम सुहागिनों ने पूजन किया।
इसलिए रखते हैं वट सावित्री व्रत
लोक मान्यता और पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन सावित्री ने पति सत्यवान के जीवन को वापस लाई थी। इसके लिए उन्होंने वट वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत रखकर पूजन किया था। वृक्ष के नीचे पति को गोद में लेकर बैठी सावित्री ने जब देखा कि, यमराज पति के जीवन को लेकर दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं, तो सावित्री ने यमराज का पीछा किया। पति के जीवन को वापस लाने में कामयाब रहीं। उस दिन अमावस्या थी। इस दिन व्रत रखने से सुहागिनों की हर मनोकामना पूरी होती हैं।
बरगद काटना पुत्र हत्या के समान
संतान के लिए इच्छित लोग इसकी पूजा करते हैं। इस कारण से बरगद काटा नहीं जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्घि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संताप मिटाने वाली होती है। वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध को भी दर्शाता है।
आयुर्वेद में दैवीय उपहार माना गया है बरगद
मान्यता है कि, वट (बरगद का पेड़) की जड़ ब्रह्मा, छाल विष्णु और शाखा शिव है। लक्ष्मी जी भी इस वृक्ष पर आती हैं। अपने आप में आस्था का असीम संसार समेटे यह वृक्ष वृहद औषधीय गुणों वाला भी है। आयुर्वेद में इसे दैवीय उपहार के रूप में माना गया है। इसकी जड़, पत्ता, छाल और रस सभी गुणकारी है। कमर, जोड़ों के दर्द, मधुमेह और मुंह संबंधी तमाम रोगों के लिए रामबाण औषधि है।
बरगद की जड़ें मिट्टी को पकड़कर रखती हैं। पत्तियां हवा को शुद्ध करती हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो कफ और पित्त की समस्या को दूर करती है। वट सावित्री व्रत पर आज सुहागिनें बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा कर रही हैं। इस मौके पर वट के औषधीय महत्व पर नजर डालते हैं, ताकि सिर्फ एक दिन नहीं हम हर दिन वट वृक्ष के करीब रहें।
रजनीकांत अवस्थी
महाराजगंज/रायबरेली: कोरोना वायरस से बचाव को लेकर लॉकडाउन अपने चौथे चरण में पहुंच चुका है। वहीं, शुक्रवार को महराजगंज सहित समूचे रायबरेली जनपद में सुहागिनों के महापर्व वट सावित्री पूजा पर महिलाओं ने शारीरिक दूरी के नियम का पालन किया। शहरी क्षेत्रों तथा कस्बों में अधिकांश महिलाओं ने घरों में ही बरगद की डाल का पूजन किया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ के घर के पास ही वट (बरगद का पेड़) होने पर परिक्रमा की गई। इस दौरान महिलाओं के मन से कोरोना का डर फुर्र दिखाई दिया।
आपको बता दें कि, महिलाओं ने वट सावित्री व्रत के दौरान पति की दीर्घायु और परिवार की सुख शांति की कामना की। ऐसा ही कुछ नजारा महराजगंज, बछंरावा, शिवगढ़ कस्बों सहित ग्रामीण क्षेत्रों, मऊ सिकंदरपुर, डेपारमऊ, मुरैनी, चन्दापुर, मोन, हलोर, राम गांव, हरदोई, तौलीपारा, हरदोई, नारायणपुर, ओसाह, बावन बुजुर्ग बल्ला में भी दिखाई दिया।
इधर, कस्बा महराजगंज में कुछ महिलाओं ने तो अपने घर में तथा कुछ महिलाओं ने बट वृक्ष के नीचे जाकर शारीरिक दूरी बनाते हुए अनुपमा पांडेय, लवली श्रीवास्तव, नीता भदोरिया (महिला आरक्षी), भाजपा नेत्री सुधा अवस्थी, मऊ गांव में कांती अवस्थी, सरिता अवस्थी, मोहनी सहित क्षेत्र की तमाम सुहागिनों ने पूजन किया।
इसलिए रखते हैं वट सावित्री व्रत
लोक मान्यता और पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन सावित्री ने पति सत्यवान के जीवन को वापस लाई थी। इसके लिए उन्होंने वट वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत रखकर पूजन किया था। वृक्ष के नीचे पति को गोद में लेकर बैठी सावित्री ने जब देखा कि, यमराज पति के जीवन को लेकर दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं, तो सावित्री ने यमराज का पीछा किया। पति के जीवन को वापस लाने में कामयाब रहीं। उस दिन अमावस्या थी। इस दिन व्रत रखने से सुहागिनों की हर मनोकामना पूरी होती हैं।
बरगद काटना पुत्र हत्या के समान
संतान के लिए इच्छित लोग इसकी पूजा करते हैं। इस कारण से बरगद काटा नहीं जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्घि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संताप मिटाने वाली होती है। वट वृक्ष दीर्घायु व अमरत्व के बोध को भी दर्शाता है।
आयुर्वेद में दैवीय उपहार माना गया है बरगद
मान्यता है कि, वट (बरगद का पेड़) की जड़ ब्रह्मा, छाल विष्णु और शाखा शिव है। लक्ष्मी जी भी इस वृक्ष पर आती हैं। अपने आप में आस्था का असीम संसार समेटे यह वृक्ष वृहद औषधीय गुणों वाला भी है। आयुर्वेद में इसे दैवीय उपहार के रूप में माना गया है। इसकी जड़, पत्ता, छाल और रस सभी गुणकारी है। कमर, जोड़ों के दर्द, मधुमेह और मुंह संबंधी तमाम रोगों के लिए रामबाण औषधि है।






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