मास्कमेव जयते।। Raebareli news ।।

पंकज प्रशून (व्यंगकार)
रायबरेली: यह कलयुग का मास्क काल है। आपके पास मुंह में डालने को निवाला भले न हो, लेकिन मुंह पर मास्क बेहद जरूरी है। मास्क वायरस को बाहर से अंदर आने से रोकता है, और मुस्कुराहट को अंदर से बाहर जाने से।
     मास्क ने मुस्कुराहट और मनहूसियत को एक कर दिया है। अब आप मास्क से उसके शुक्रिया दुख का अनुमान नहीं लगा सकता। मास्क काल मे  कोई किसी पर नहीं थूक सकता। गालियां भी छन के बाहर निकलेंगीं।
   लोकडाउन के दौरान लगातार घर पर रहने का दुष्परिणाम यह हुआ की बीवी भी बोल उठी चौबीसों घंटे यही चेहरा देखकर तंग आ चुकी हूं। उस दिन से मैंने प्रण कर लिया की घर पर भी मास्क लगाकर ही बैठूंगा। आलम यह है की जी करता है की सुबह का कुल्ला भी मास्क लगाकर ही कर डालूं। कुछ ऐसे मास्क बनाए जाने चाहिए जिनमें ब्रश करने की सुविधा हो। 
      मास्क ने समाज में नाक विभेद को भी खत्म किया है। मास्क ने ऊंची नाक के गर्व को और नीची नाक के शर्म को एक ही आवरण से ढक दिया है। मास्ककाल मे मुंह छिपाकर जीना  अभिशाप नही रहा। मास्क ने डाकू डॉक्टर, कंडक्टर को समदर्शी बना दिया है। यह मास्क की ही महिमा है, जो लड़कियां शराब की दुकानों की लाइन में पूरी हिम्मत के साथ लगी हैं।    आज के ज़माने में अगर मजाज होते तो कुछ यूं कहते-"तेरे चेहरे पे ये आँचल बहुत ही खूब है लेकिन, इसे कटवा के गर तू मास्क बनवाती तो अच्छा था' 
     मैं तो इस मास्क काल का शुक्रगुजार हूं, जिसने लिपस्टिक के महत्व को खत्म कर दिया है। वरना लोकडाउन में कहां ढूँढता फिरता। यह तय है भविष्य में एक ऐसा मास्क ज़रूर आएगा जिसमें होंठ खुले रहते हों। नहीं आएगा तो पत्नियां खुद बना लेंगी। 
साड़ी के साथ मैचिंग बिंदी चूड़ी के साथ मास्क भी शामिल हो जाएगा।
      मैं भी सोच रहा हूँ कि, डिजाइनर मास्क बनाने की कोई फैक्ट्री खोल लूँ और बाहर लिखवाऊं-मास्कमेव जयते।

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