"वीरों को नमन" (वर्षा शर्मा)

●दिल में उनके तो बस हिंदुस्तान ही बसता है होंठों पर उनके वन्दे मातरम ही गूंजता है।
देश की रक्षा करने को वे सरहद पर मिट जाते हैं,
है नमन उन वीरों को जो 
देश का ऋण चुकाते हैं।।
●हम जब अपने घरों में होली ईद मनाते हैं,
सरहद पर वो वीर लहू अपना बहाया करते हैं।
हम तो सो जाते हैं निश्चिंत घरों में
वो दुश्मनों से हमें बचाते हैं।
है नमन उन वीरों को जो 
देश का ऋण चुकाते हैं।।
●रक्षाबंधन पर जब हम 
बहनों संग त्योहार मनाया करते हैं,
जन्मभूमि की रक्षा करते वो वीर 
भारत माता संग रिश्ता निभाया करते हैं
है नमन उन वीरों को जो 
देश का ऋण चुकाते हैं।।
●छोटी सी चोट पर हम 
अश्रु अपने बहाया करते हैं
गोली से सीना छलनी हो फिर भी
 आगे ही आगे बढ़ते जाते हैं
है नमन उन वीरों को जो 
देश का ऋण चुकाते हैं।।
●हम तो अपने रिश्तों में ही उलझकर
जीवन गुजारा करते हैं,
भारत माता के वो वीर सपूत
मातृभूमि से ही हर रिश्ता निभाया करते हैं
है नमन उन वीरों को जो 
देश का ऋण चुकाते हैं।।
●दिमाग में परिवार 
दिल में हिंदुस्तान बसाया करते हैं।
है नमन उन वीरों को जो
देश का ऋण चुकाते हैं।।
                   वर्षा शर्मा, लम्भुआ सुल्तानपुर

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