रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: सीमा पर चीनी सेना की ओर से भारतीय सैनिकों पर हुए हमले को लेकर पूरे देश में गुस्से के लहर है। जवानों की शहादत के बाद चीन के खिलाफ पूरे देश में लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आपको बता दें कि, इसी क्रम में स्थानीय शहीद चैक पर शहीद जवानों को श्रद्धाँजलि देते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रान्तीय उपाध्यक्ष बसन्त सिंह बग्गा ने कहा कि, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार को चीनी सेना से झड़प में भारतीय सैनिक शहीद हो गए। व्यापार मण्डल उनकी शहादत को सलाम करता है। श्री बग्गा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि, राष्ट्रहित से बढ़कर कुछ नहीं होता है, हमें राष्ट्रहित में चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना चाहिए।
श्री बग्गा ने देश के प्रधानमन्त्री से अपील करते हुए कहा कि....
●गबाजी इस आतंक की बेरंग होनी चाहिए, हो गया आगाज़ बस अब जंग होनी चाहिए।
●छिन गये हैं, लाल कितने भारती की गोद से, कोख चीन की भी तंग होनी चाहिए।।
वहीं प्रान्तीय संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ था, इस युद्ध के बाद 1975 पर एलएसी पर फायरिंग हुई थी, जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हुए थे, इसके बाद से एलएसी पर कोई हिंसक झड़प नहीं हुई थी, करीब 45 साल बाद एलएसी पर फायरिंग हुई थी, जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हुए थे। इसके बाद से एलएसी पर कोई हिंसक झड़प नहीं हुई थी।
लगभग 45 वर्ष बाद एलएसी पर भारत और चीनी सैनिक के बीच हिंसक झड़प हुई। श्री रस्तोगी ने कहा कि, गलवान घाटी पर शहीद हुए जवानों की शहदात को हिन्दुस्तान कभी नहीं भूलेगा। नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि, फौजी की मौत पर परिवार को दुख कम और गर्व ज्यादा होता है, ऐसे सपूतों को जन्म देकर माँ की कोख भी धन्य हो जाती है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अतुल श्रीवास्तव, के.के. मौर्या, बाबू भाई, पवन अग्रहरि, जितेन्द्र मौर्या, विजय सोनकर, सत्यांशु दुबे, संजय पासी, दिनेश त्रिवेदी आदि लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धाँजलि दी।
रायबरेली: सीमा पर चीनी सेना की ओर से भारतीय सैनिकों पर हुए हमले को लेकर पूरे देश में गुस्से के लहर है। जवानों की शहादत के बाद चीन के खिलाफ पूरे देश में लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आपको बता दें कि, इसी क्रम में स्थानीय शहीद चैक पर शहीद जवानों को श्रद्धाँजलि देते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रान्तीय उपाध्यक्ष बसन्त सिंह बग्गा ने कहा कि, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार को चीनी सेना से झड़प में भारतीय सैनिक शहीद हो गए। व्यापार मण्डल उनकी शहादत को सलाम करता है। श्री बग्गा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि, राष्ट्रहित से बढ़कर कुछ नहीं होता है, हमें राष्ट्रहित में चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना चाहिए।
श्री बग्गा ने देश के प्रधानमन्त्री से अपील करते हुए कहा कि....
●गबाजी इस आतंक की बेरंग होनी चाहिए, हो गया आगाज़ बस अब जंग होनी चाहिए।
●छिन गये हैं, लाल कितने भारती की गोद से, कोख चीन की भी तंग होनी चाहिए।।
वहीं प्रान्तीय संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ था, इस युद्ध के बाद 1975 पर एलएसी पर फायरिंग हुई थी, जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हुए थे, इसके बाद से एलएसी पर कोई हिंसक झड़प नहीं हुई थी, करीब 45 साल बाद एलएसी पर फायरिंग हुई थी, जिसमें चार भारतीय जवान शहीद हुए थे। इसके बाद से एलएसी पर कोई हिंसक झड़प नहीं हुई थी।
लगभग 45 वर्ष बाद एलएसी पर भारत और चीनी सैनिक के बीच हिंसक झड़प हुई। श्री रस्तोगी ने कहा कि, गलवान घाटी पर शहीद हुए जवानों की शहदात को हिन्दुस्तान कभी नहीं भूलेगा। नगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि, फौजी की मौत पर परिवार को दुख कम और गर्व ज्यादा होता है, ऐसे सपूतों को जन्म देकर माँ की कोख भी धन्य हो जाती है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अतुल श्रीवास्तव, के.के. मौर्या, बाबू भाई, पवन अग्रहरि, जितेन्द्र मौर्या, विजय सोनकर, सत्यांशु दुबे, संजय पासी, दिनेश त्रिवेदी आदि लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धाँजलि दी।

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