आशुतोष भगवान शिव का प्यारा-दुलारा सावन आ गया । सोमवार,6 जुलाई से सोमवार 3 अगस्त तक इस बार सावन चन्द्रमा से अमृत बरसाते आ रहा है तथा जाते-जाते अमृत लुटाते जाएगा सावन । क्योंकि चन्द्रवार सोम का दिन है।
प्रकृति खिलती है, मुस्कराती है और इठलाती है इस सावन में- जिस प्रकृति के पास मनुष्यों जैसे भाव-विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं है, वही प्रकृति बोलती ही नहीं बल्कि झूमती, इठलाती और नाचती दिखती है।
मनुष्य क्यों नहीं कर सकता ?- इस झूमने का लाभ मनुष्य भी ले सकता है । बस मन की शुष्कता, कठोरता, ऊष्मता में शिवाकाश से तरलता, आर्द्रता की वर्षा करनी होगी।
विकारों से आंख बंद कर अंदर देखना ही उपाय- इस माह लिंग-स्वरूप महादेव का अभिषेक करना होगा ।
शिवलिंग है क्या?- शिवलिंग मनुष्य का शीश है और धड़ हैं शिवा (पार्वती)। शीश ज्ञान का और धड़ क्रिया का प्रतीक । इसी में सत्यता का एकीकरण होते शिवत्व प्रकट होते विलंब नहीं होगा ।
अंदर की खामियां जल जाएंगी- ऐसी स्थिति में आंतरिक बुराई धूं-धूं कर जल जाएंगी और रोमछिद्रों से बाहर निकलेंगा भस्म । यही हुई भस्म-आरती।
पांच सोमवार को लें पंचाक्षरी मंत्र की तरह- 'ऊँ नमः शिवाय'- इस मंत्र में प्रथम अक्षर न बोले नम्र बनने के लिए जबकि म मृदुता का भाव बनाने के लिए । शि- शिष्टाचार, वा- वासना-मुक्ति, य यज्ञ यानी विकारों की आहुति देते रहने का बोध कराता है। यानी प्रत्येक अक्षर के भाव को यदि एक-एक सोमवार साध लिया जाए तो सिद्धि स्वयमेव मिल जाएगी।
©सलिल पांडेय, प्रेमघन मार्ग, (विंध्यक्षेत्र के वृहद त्रिकोण के मध्य स्थित) मिर्जापुर।
लेखन को एडिट कर अन्य द्वारा प्रयोग कापीराइट ऐक्ट का सरासर उल्लंघन है।
प्रकृति खिलती है, मुस्कराती है और इठलाती है इस सावन में- जिस प्रकृति के पास मनुष्यों जैसे भाव-विचार व्यक्त करने की क्षमता नहीं है, वही प्रकृति बोलती ही नहीं बल्कि झूमती, इठलाती और नाचती दिखती है।
मनुष्य क्यों नहीं कर सकता ?- इस झूमने का लाभ मनुष्य भी ले सकता है । बस मन की शुष्कता, कठोरता, ऊष्मता में शिवाकाश से तरलता, आर्द्रता की वर्षा करनी होगी।
विकारों से आंख बंद कर अंदर देखना ही उपाय- इस माह लिंग-स्वरूप महादेव का अभिषेक करना होगा ।
शिवलिंग है क्या?- शिवलिंग मनुष्य का शीश है और धड़ हैं शिवा (पार्वती)। शीश ज्ञान का और धड़ क्रिया का प्रतीक । इसी में सत्यता का एकीकरण होते शिवत्व प्रकट होते विलंब नहीं होगा ।
अंदर की खामियां जल जाएंगी- ऐसी स्थिति में आंतरिक बुराई धूं-धूं कर जल जाएंगी और रोमछिद्रों से बाहर निकलेंगा भस्म । यही हुई भस्म-आरती।
पांच सोमवार को लें पंचाक्षरी मंत्र की तरह- 'ऊँ नमः शिवाय'- इस मंत्र में प्रथम अक्षर न बोले नम्र बनने के लिए जबकि म मृदुता का भाव बनाने के लिए । शि- शिष्टाचार, वा- वासना-मुक्ति, य यज्ञ यानी विकारों की आहुति देते रहने का बोध कराता है। यानी प्रत्येक अक्षर के भाव को यदि एक-एक सोमवार साध लिया जाए तो सिद्धि स्वयमेव मिल जाएगी।
©सलिल पांडेय, प्रेमघन मार्ग, (विंध्यक्षेत्र के वृहद त्रिकोण के मध्य स्थित) मिर्जापुर।
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