रजनीकांत अवस्थी
महाराजगंज/रायबरेली: राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि, भारतीय संविधान इस बात की इजाजत नहीं देता कि, कोई व्यक्ति या संस्था कानून अपने हाथ में ले।
आपको बता दें कि, ज्ञान प्रकाश तिवारी ने आगे कहा है कि, संविधान की यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस और विकास दुबे दोनों पर समान रूप से लागू होती है। वर्तमान सरकार यदि इस व्यवस्था को बदलना चाहती है, तो बदल दे! पर वर्तमान संविधान की आड़ लेकर कानून की धज्जियां उड़ाना स्वीकार नहीं!
उन्होंने कहा कि, राज्य तंत्र की व्यवस्था नहीं चल सकती है। यदि सरकार हमारे संवैधानिक अधिकारों को प्रतिबंधित करना चाहती है, तो पूर्ण बहुमत की सरकार का लाभ लेते हुए उसे ऐसा कर देना चाहिए। भाषण संविधान की सुरक्षा का होगा और आचरण संविधान की हत्या का होगा। कोई भी सभ्य नागरिक इसे सहन नहीं करेगा! श्री तिवारी ने कहा कि, वे विकास दुबे की अन्यायिक हत्या की निंदा करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपेक्षा करते हैं कि, विकास दुबे से संबंधित पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान में लें, और यह तय करें कि, भारत में संवैधानिक मूल्य सुरक्षित कैसे रह पाएंगे।
अंततः उन्होंने कहा कि, वे यह कहना चाहते हैं कि, वर्तमान सरकार के कार्यों की समीक्षा का यह असर है, जो देश के चिंता का कारण बनना चाहिए। ऐसे में इस अन्यायिक कृत्य का विरोध करना संपूर्ण देशवासियों का दायित्व है। न कि, सिर्फ ब्राह्मणों का और हमें इसकी सीबीआई जांच की मांग करनी होगी।
महाराजगंज/रायबरेली: राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि, भारतीय संविधान इस बात की इजाजत नहीं देता कि, कोई व्यक्ति या संस्था कानून अपने हाथ में ले।
आपको बता दें कि, ज्ञान प्रकाश तिवारी ने आगे कहा है कि, संविधान की यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस और विकास दुबे दोनों पर समान रूप से लागू होती है। वर्तमान सरकार यदि इस व्यवस्था को बदलना चाहती है, तो बदल दे! पर वर्तमान संविधान की आड़ लेकर कानून की धज्जियां उड़ाना स्वीकार नहीं!
उन्होंने कहा कि, राज्य तंत्र की व्यवस्था नहीं चल सकती है। यदि सरकार हमारे संवैधानिक अधिकारों को प्रतिबंधित करना चाहती है, तो पूर्ण बहुमत की सरकार का लाभ लेते हुए उसे ऐसा कर देना चाहिए। भाषण संविधान की सुरक्षा का होगा और आचरण संविधान की हत्या का होगा। कोई भी सभ्य नागरिक इसे सहन नहीं करेगा! श्री तिवारी ने कहा कि, वे विकास दुबे की अन्यायिक हत्या की निंदा करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपेक्षा करते हैं कि, विकास दुबे से संबंधित पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान में लें, और यह तय करें कि, भारत में संवैधानिक मूल्य सुरक्षित कैसे रह पाएंगे।
अंततः उन्होंने कहा कि, वे यह कहना चाहते हैं कि, वर्तमान सरकार के कार्यों की समीक्षा का यह असर है, जो देश के चिंता का कारण बनना चाहिए। ऐसे में इस अन्यायिक कृत्य का विरोध करना संपूर्ण देशवासियों का दायित्व है। न कि, सिर्फ ब्राह्मणों का और हमें इसकी सीबीआई जांच की मांग करनी होगी।

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