रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के जिलाध्यक्ष बसन्त सिंह बग्गा ने कहा कि, वीरांगना ऊदा देवी पासी की शहादत पर देशवासियों को गर्व है। 16 नवम्बर 1857 को ऊदा देवी पासी ने 36 अंग्रेजों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। खास बात यह रही कि, ऊदा देवी के पास मात्र 36 गोलियाँ थी, हर एक गोली ने एक अंग्रेज को मार गिराया था। गोली समाप्त हो जाने पर अंग्रेज सेनापति की गोली से ऊदा देवी पासी शहीद हुई थी। उक्त उद्गार श्री बग्गा ने मुकेश शिक्षण शोध संस्थान के कार्यालय में आयोजित शहादत दिवस पर पत्रकार वार्ता के दौरान व्यक्त की है।
आपको बता दें कि, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मिश्रा एवं संचालन क्रय-विक्रय समिति के अध्यक्ष चैधरी रवि पटेल ने किया। इस मौके पर उपस्थित राष्ट्रीय पासी सेना के अध्यक्ष संजय पासी ने कहा कि, वीरांगना ऊदा देवी पासी के पति मक्का पासी वाजिद अलीशाह की सेना के सेनापति थे। अंग्रेजी सेना ने उन्हें धोखे से मारा था तब ऊदा पासी ने अंग्रेजों से बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी। वे 16 नवम्बर 1857 को प्रतिज्ञा पूरी कर शहीद हुईं थी।
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता ओ0पी0 यादव ने कहा कि, आज भी लखनऊ के सिकन्दराबाग में वह पीपल का वृक्ष मौजूद है, जिस पर चढ़कर ऊदा देवी पासी ने अंग्रेजों को मार गिराया था, उसके बाद वे शहीद हुई। उसी स्थान पर वीरांगना ऊदा देवी पासी की मूर्ति लगाई गई थी, जहाँ शहादत दिवस पर उनकी याद में विशाल मेला लगता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अजय कुमार बाजपेयी, गंगाशंकर पाठक, रामकुमार दुबे, धर्मेन्द्र यादव, मनोज चैधरी, अजीत पासी, अखिलेश पासी, पवन पासी, अजय पासी, शीतलादीन रावत, अब्दुल कलाम, गंगाराम विश्वकर्मा, सचिन वर्मा आदि ने वीरांगना ऊदा देवी पासी के चित्र पर माल्र्यापण कर उन्हें श्रद्धाँ सुमन अर्पित किये एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
रायबरेली: उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के जिलाध्यक्ष बसन्त सिंह बग्गा ने कहा कि, वीरांगना ऊदा देवी पासी की शहादत पर देशवासियों को गर्व है। 16 नवम्बर 1857 को ऊदा देवी पासी ने 36 अंग्रेजों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। खास बात यह रही कि, ऊदा देवी के पास मात्र 36 गोलियाँ थी, हर एक गोली ने एक अंग्रेज को मार गिराया था। गोली समाप्त हो जाने पर अंग्रेज सेनापति की गोली से ऊदा देवी पासी शहीद हुई थी। उक्त उद्गार श्री बग्गा ने मुकेश शिक्षण शोध संस्थान के कार्यालय में आयोजित शहादत दिवस पर पत्रकार वार्ता के दौरान व्यक्त की है।
आपको बता दें कि, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मिश्रा एवं संचालन क्रय-विक्रय समिति के अध्यक्ष चैधरी रवि पटेल ने किया। इस मौके पर उपस्थित राष्ट्रीय पासी सेना के अध्यक्ष संजय पासी ने कहा कि, वीरांगना ऊदा देवी पासी के पति मक्का पासी वाजिद अलीशाह की सेना के सेनापति थे। अंग्रेजी सेना ने उन्हें धोखे से मारा था तब ऊदा पासी ने अंग्रेजों से बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी। वे 16 नवम्बर 1857 को प्रतिज्ञा पूरी कर शहीद हुईं थी।
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता ओ0पी0 यादव ने कहा कि, आज भी लखनऊ के सिकन्दराबाग में वह पीपल का वृक्ष मौजूद है, जिस पर चढ़कर ऊदा देवी पासी ने अंग्रेजों को मार गिराया था, उसके बाद वे शहीद हुई। उसी स्थान पर वीरांगना ऊदा देवी पासी की मूर्ति लगाई गई थी, जहाँ शहादत दिवस पर उनकी याद में विशाल मेला लगता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अजय कुमार बाजपेयी, गंगाशंकर पाठक, रामकुमार दुबे, धर्मेन्द्र यादव, मनोज चैधरी, अजीत पासी, अखिलेश पासी, पवन पासी, अजय पासी, शीतलादीन रावत, अब्दुल कलाम, गंगाराम विश्वकर्मा, सचिन वर्मा आदि ने वीरांगना ऊदा देवी पासी के चित्र पर माल्र्यापण कर उन्हें श्रद्धाँ सुमन अर्पित किये एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

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