हत्या के नौ महीने बाद ट्रिपल ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री केस में बड़ा खुलासा, छह अभियुक्त गिरफ्तार।। Varanasi news ।।

पांच लाख रुपये ऐंठने की नीयत से सीरियल किलर ने तीन लोगों की कर दी थी हत्या
दो दरोगाओं ने मिलकर टूटे सिमकार्ड व सीडीआर की मदद से 9 महीने की छानबीन के बाद तिहरे हत्याकांड(ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री) का किया खुलासा
ब्यूरो रिपोर्ट
वाराणसी: बीते नौ महीने पूर्व हुए तिहरे हत्याकांड के संदर्भ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी अमित पाठक ने खुलासा करते हुए मीडिया को बताया कि, सुमित श्रीवास्तव को 5 लाख रुपये का लोन प्राप्त होने की जानकारी उसके ही एक मित्र नीलकण्ठ जायसवाल को पूर्व से थी। नीलकण्ठ जायसवाल अभिषेक जायसवाल नाम के एक व्यक्ति से पूर्व से ही सर्म्पक में था। इस रुपयों की जानकारी नीलकण्ठ ने अभिषेक जायसवाल को दी। तत्पश्चात् अभिषेक जायसवाल ने नीलकण्ठ से उस पैसों को सुमित के एकाउण्ट से निकाल लेने की बात कही।  
   आपको बता दें कि, नीलकण्ठ व अभिषेक इस बात पर तैयार हुए कि, सुमित के एकाउण्ट से रुपयों को किसी तरह से ले लिया जाय, लेकिन उनको एकाउण्ट से पैसे दूसरे एकाउण्ट में कैसे किया जाय, वह भी तब जब पासवार्ड ज्ञात न हो, इसकी जानकारी कम थी। 
    इसकी जानकारी सौरभ को थी, चुंकि सौरभ अभिषेक जायसवाल का रिश्तेदार था और उनके बीच अच्छी दोस्ती भी थी। अभिषेक ने यह बात जाकर सौरभ को बतायी, तो सौरभ भी इस योजना में शामिल हो गया। तभी अभिषेक ने नीलकण्ठ से सुमित श्रीवास्तव को विकास के पम्प कोरौता थाना लोहता पर लाने के लिए कहा, चूॅंकि पम्प एक एकान्त क्षेत्र में था और अभिषेक के रिश्तेदार शशिकान्त उर्फ जवानी के गॉंव पर था, उस गॉंव में आने जाने के क्रम में अभिषेक की दोस्ती भी विकास पटेल जो कि उक्त पम्प के मालिक का भान्जा है, से हो गयी थी, तब उसको भी पैसे देने का लालच दिया गया।
     इसी क्रम में यह बात उठी कि, सुमित श्रीवास्तव को इस पम्प पर कैसे लाया जायेगा और क्या कहकर लाया जायेगा। चुंकि उस समय सुमित एलआईसी की एक पॉंलिसी खरीदना चाहता था, इसकी जानकारी नीलकण्ठ को थी। नीलकण्ठ ने यह बात अभिषेक को बतायी, तब अभिषेक ने पॉंलिसी बेचने के बहाने नीलकण्ठ को यह काम सौपा कि, तुम सुमित को लेकर पम्प पर चले आना और अपने दोस्त शशिकान्त के जरिये उसी गॉंव के पंकज पटेल को पॉलिसी की बात समझाने के लिए जोड़ लिया गया। सभी ने पैसे प्राप्त करने के लिए सुमित की हत्या की योजना बनायी। अब प्रश्न यह उठा कि, उसकी बॉडी कैसे ठिकाने लगाया जायेगा, इसके लिए अभिषेक जायसवाल, शशिकान्त व पंकज पटेल ने रामविलास पटेल का नाम सुझाया। चुंकि रामविलास पटेल अभिषेक का भी मित्र था और गाड़ी चलाना भी जानता था। वह स्वीफ्ट कार चलाता था, यह उनके जानकारी में था। पैसे के लिए वह भी इस योजना में शामिल हो गया।  
नीलकण्ठ तब दिनांक 23.10.2019 को अपनी मोटर साइकिल से कबीर चौरा अस्पताल से सुमित को लेकर उस पम्प पर पहुॅंचा। उक्त पम्प पर पूर्व से ही रामविलास पटेल, पंकज पटेल, विकास पटेल, अभिषेक जायसवाल, शशिकान्त उर्फ जवानी पहले से ही मौजूद थे। चुंकि सभी व्यक्ति सुमित के एकाउण्ट से प्राप्त होने वाले पैसे के लिए हत्या की योजना में तैयार हो चुके थे। 
     सुमित के वहॉं पहुंचने के बाद अभिषेक जायसवाल, रामविलास पटेल, नीलकण्ठ जायसवाल, विकास पटेल, पंकज पटेल व शशिकान्त उर्फ जवानी द्वारा मिलकर सुमित श्रीवास्तव की हत्या कर दी गयी। तत्पश्चात् मृतक के शव को रामविलास पटेल के द्वारा लायी गयी स्वीफ्ट डिजायर कार द्वारा ले जाकर राजगढ़ मिर्जापुर के जंगल में फेंक दिया गया। उसके पश्चात् सभी अपने-अपने हिस्सों के पैसों के लिए अभिषेक से सम्पर्क करते है, तत्पश्चात् अभिषेक व सौरभ द्वारा सुमित के एकाउण्ट से राजू व बृजेश के एकाउण्ट में पैसों का ट्रासफर किया जाता है और कुछ पैसे एटीएम द्वारा निकाल भी लिये जाते है। 
     चुकिं मृतक सुमित श्रीवास्तव के भाई से अभिषेक जायसवाल की जान पहचान पूर्व से रहती है। सुमित के मौत के बाद उसके परिवार द्वारा क्या किया जा रहा है, इसकी जानकारी करने के लिए अभिषेक जायसवाल मृतक सुमित के परिवार पर नजर रखने लगता है। इसी क्रम में दिनांक 07.11.19 के दिन मृतक के भाई के दुकान पर जब मौजूद रहता है, तो मृतक के भाई द्वारा यह बताया जाता है कि, पुलिस बृजेश विश्वकर्मा को ढूढ़ रही है। इस बात की जानकारी होने पर अभिषेक सौरभ को बताता है और दोनों को यह लगता है कि, अगर पुलिस बृजेश के पास पहुंच गयी, तो वह भी पकड़े जायेगे।    इस वजह से अभिषेक जायसवाल व सौरभ बृजेश की हत्या की योजना बनाते है और उसमें सोनू मोदनवाल को शामिल करते है। 
      अभिषेक जायसवाल अपने गाड़ी से सौरभ को कलेक्ट्ररी फार्म से लेता है और बृजेश विश्वकर्मा की तलाश में उसके दुकान की ओर राजातालाब की तरफ निकल जाता है। वहॉं पर सोनू मोदनवाल को ये लोग बुलाते है, तत्पश्चात् तीनों मिलकर बृजेश विश्वकर्मा को ले जाकर मौनी बाबा की कुटिया पर दिनांक 07.11.19 को हत्या कर वहीं नदी में डाल देते है। इधर पुलिस बृजेश के यहॉं पहुॅंचती है, बृजेश नही मिलता है, तब उसके परिवार वाले उसकी खोजबीन जारी करते है, दो दिन बाद 09.11.19 को बृजेश की लाश मिलती है, जिसके क्रम में उसकी पत्नी द्वारा थाना रोहनियॉ पर मु0अ0सं0 665/19 धारा 147, 149, 302, 201, 120बी,34 भादवि कुल नामजद 6 लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत होता है। 
     इसी बीच सौरभ व अभिषेक द्वारा सुमित श्रीवास्तव के एकाउण्ट से बृजेश विश्वकर्मा के एकाउण्ट में कुछ पैसों का ट्रासफर किया जाता है। ताकि इस बात का भ्रम बना रहे कि, सुमित श्रीवास्तव जिन्दा है, और इसने ही पैसों के वजह से बृजेश विश्वकर्मा की हत्या कर दी है। तत्पश्चात् इसी बीच अभिषेक व सौरभ राजू के एकाउण्ट में सुमित के एकाउण्ट से ट्रासफर हुए पैसों को लेने के लिए राजू को बुलाते है। राजू पैसो  को देने से मना करता है और यह भी कहता है कि, वह यह बात पुलिस को बता देगा। इस बात पर अभिषेक व सौरभ राजू की हत्या की योजना बनाते है। 
     इसी बीच रामविलास, विकास पटेल, पंकज पटेल, नीलकण्ठ, शशिकान्त उर्फ जवानी अपने पैसों को लेने के लिए इन पर दबाव बनाते रहते है। तब पुनः अभिषेक व सौरभ द्वारा रामविलास पटेल, विकास पटेल व शशिकान्त उर्फ जवानी को यह कहकर कि, राजू के एकाउण्ट में ही सुमित का सब पैसा है। अगर उसे मार दिया जाय, तो यह पैसा हम सभी को मिल जायेगा। इस बात पर उपरोक्त सभी हत्या की योजना में शामिल हो जाते है। 
तत्पश्चात् राजू को सौरभ द्वारा बुलाया जाता है और सौरभ अपने बाइक से लेकर पुनः विकास पटेल के पम्प पर पुहंचता है, वहॉं रामविलास, अभिषेक जायसवाल, पंकज पटेल, विकास पटेल, शशिकान्त उर्फ जवानी मौजूद होते है। वहॉ पर इन लोगों द्वारा शराब की पार्टी की जाती है, और उसके बाद राजू की हत्या कर दी जाती है। 
     राजू की हत्या के बाद उसके शव को पुनः उसी स्वीफ्ट डिजायर कार में रखकर इन लोगों के द्वारा चुनार गंगा नदी के पुल से फेंक दिया जाता है और ये वापस लौट आते है। इधर कई महीने बीत जाने के बाद भी पैसों का आपस में बटवारा नही हुआ रहता है। इसी पैसों के बटवारा को लेकर दिनांक 29.07.20 को अभियुक्तगण अभिषेक जायसवाल, रामविलास पटेल, पंकज पटेल, विकास पटेल, नीलकण्ठ जायसवाल व शशिकान्त उर्फ जवानी उसी पम्प पर इक्ठ्ठा होते है। मुखबिर द्वारा जिसकी सूचना पर रोहनियॉं व मण्डुवाडीह थाने की पुलिस द्वारा संयुक्त रुप से कार्यवाही करते हुए इन 06 अभियुक्तगण की गिरफ्तारी की गयी, जहॉं से इन 6 अभियुक्तगणों द्वारा मृतक सुमित के एकाउण्ट से प्राप्त धन का हिस्सा लगाया जा रहा था।गिरफ्तारी के दौरान सुमित के खाते से निकाले गये 2.48 लाख रुपये की बरामदगी की गयी, साथ ही साथ घटना में प्रयोग किये गये 02 मोटर साइकिल व एक स्वीफ्ट डिजायर कार एवं मृतक बृजेश विश्वकर्मा और मृतक सुमित श्रीवास्तव के द्वारा प्रयोग में लायी गयी मोबाइल की बरामदगी की गयी। शेष 02 अभियुक्तगण सौरभ व सोनू मोदनवाल की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
     हत्याकांड में शामिल गिरफ्तार किए गए बदमाशों में अभिषेक जायसवाल(27वर्ष) पिता का नाम- स्व0 मनीष जायसवाल उर्फ कृपाशंकर चौधरी पता- निवासी भिटारी थाना लोहता, वाराणसी शिक्षा-बी0ए0 काशी विद्यापीठ, रामविलास पटेल(25वर्ष) पिता का नाम- रामनरायण पटेल पता- निवासी घमहापुर थाना लोहता वाराणसी, शिक्षा-इण्टर, शशिकान्त उर्फ जवानी उर्फ विशाल(19वर्ष) पिता का नाम- होरी लाल पता- हरिजन बस्ती कोरौता थाना लोहता, वाराणसी शिक्षा- 9 पास, विकास पटेल उर्फ ओले(19वर्ष) पिता का नाम- जयकुमार पटेल पता- निवासी बभनियॉॅंव थाना रोहनियॉं, वाराणसी हाल पता ग्राम कोरौता थाना लोहता, वाराणसी शिक्षा-इण्टर, पंकज पटेल(23वर्ष) पिता का नाम- लालजी पटेल पता- निवासी कोरौता थाना लोहता, वाराणसी शिक्षा-बी0ए0 फाइनल, नीलकण्ठ उर्फ शिवम् जायसवाल(23वर्ष) पिता का नाम- सुरेश जायसवाल पता- निवासी डी-65/269 लहरतारा मण्डुवाडीह, वाराणसी शिक्षा-बी0काम आशा महाविद्यालय सिगरा।
     घटना में शामिल फरार दो वांछित अभियुक्तों में सौरभ उर्फ लालू (24वर्ष) पिता का नाम- शिवकुमार पता- निवासी राजातालाब थाना रोहनिया वाराणसी, शिक्षा-बी0 टेक शारदा विश्वविद्यालय, सोनू मोदनवाल पिता का नाम- स्व0 विजय मोदनवाल पता- निवासी राजातालाब थाना रोहनियॉं, वाराणसी की गिरफ्तारी अभी शेष है ।
     गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में मुख्य रूप से परशुराम त्रिपाठी (प्रभारी निरीक्षक थाना रोहनिया), इन्द्रभूषण यादव (निरीक्षक अपराध थाना रोहनिया), महेन्द्र राम प्रजापति (प्रभारी निरीक्षक थाना मंडुआडीह), उ0नि0 अमित कुशवाहा (थाना मंडुआडीह), उ0नि0 रामकुमार पाण्डेय (थाना रोहनिया), उ0नि0 इन्दूकान्त पाण्डेय (थाना रोहनिया), उ0नि0 अजय कुमार (थाना मण्डुआडीह), आरक्षी अभिनाश शर्मा (थाना रोहनिया), आरक्षी विश्वजीत पाण्डेय (थाना रोहनिया), आरक्षी नामित दिनकर (थाना मण्डुआडीह), (आरक्षी विजय कुमार (थाना मण्डुआडीह), मुख्य आरक्षी हंसराज यादव (थाना मण्डुआडीह) की भूमिका रही।
      वहीं पकड़े गए बदमाशों के कब्जे से पुलिस ने 248000 रुपये नकद, एक अदद मोबाइल मृतक बृजेश विश्वकर्मा, एक अदद मोबाइल मृतक सुमित श्रीवास्तव व घटना में प्रयुक्त दो अदद मोटर साइकिल एफजेड नं0 यू0पी0 65 सीएक्स 6925 व यू0पी0 65 डीए 6453, घटना मे प्रयुक्त एक स्वीफ्ट डिजायर कार नं0 यू0पी0 बीक्यू 6889 बरामद किया गया।

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