धाम नगरी में चल रहा जय-पराजय का खेल

डॉ जयप्रकाश त्रिपाठी खोजने के लिए तलाशा गया एक और फार्मूला

मिर्जापुर । विन्ध्य क्षेत्र की नगरी मिर्जापुर ने अनादिकाल से जय-पराजय के बीच द्वंद्व देखा है। कभी यहां शिवजी के ज्येष्ठ पुत्र देवताओं की सेना के प्रमुख बनकर तारकासुर से जब युद्ध करने आए थे तब कई ऐसे अवसर आए जब लगा कि देवसेना के हाथ पराजय ही लगेगी  लेकिन विष्णु जी भी युद्ध में मदद करने आ गए। अंततः कार्तिकेय के हाथ *जय* लगी। ऐसा उल्लेख शिवपुराण में किया गया है।

जय को पाने में फिलहाल पराजय ही हाथ लगी है अभी तक

ताजा मामला गुमशुदा डॉक्टर जयप्रकाश त्रिपाठी का है। प्रशासन चतुर्मुखी अभियान चलाए है, उसमें जो सामने दिख रहा है, वह डूबने की घटना को मद्देनजर रखकर जय को गंगा के जल में तलाशा जा रहा है।

करार को बांस से खोद-खोद कर ढूंढी जा रही निशानी

मंगलवार, 25 अगस्त को नए फार्मूले के तहत जौसरा गांव के गंगा करार के उन हिस्सों को जहां की मिट्टी पैर रखने से भसक जाती है और व्यक्ति डिसबैलेंस हो जाता है, उन हिस्सों को लंबे-लंबे बांस और बल्ली से पानी की सतह के ऊपर और नीचे की ओर खोदा भी गया, यह मानकर कि यदि शौच के वक्त मिट्टी धंसी होगी तो चप्पल या कोई और निशानी यहां मिल सकती है।

अब आ गई पूरी जिम्मेदारी पुलिस पर

जहां सोमवार तक प्रशासन और डॉक्टर का परिवार डेरा डाले रहता था वहीं मंगलवार को कोतवाली देहात प्रभारी अजय सिंह और गोरसंडी चौकी प्रभारी वी पी सिंह पूर्वाह्न साढ़े 10 से अपराह्न ढाई बजे तक स्टीमर से जौसरा से छटहाँ गांव तक गए। इसी बीच पूछताछ के लिए फोन आता तो स्टीमर किनारे लगवा देते रहे क्योंकि स्टीमर की आवाज से फोन पर बात नहीं हो पा रही थी।

मंगलवार परिवार नहीं आया

25 अगस्त घटना का चौथा दिन था। सोमवार को डॉक्टर त्रिपाठी की पत्नी डॉ सुनन्दा चतुर्वेदी, उनका इंजीनियर बेटा, ड्राइवर तथा वह व्यक्ति जिसने इस ड्राइवर को डॉक्टर त्रिपाठी के यहां नौकरी पर रखवाया था, आए थे। घण्टों रहे भी । मंगलवार फोन से स्थिति की जानकारी लेते रहे। 

प्रशासन नहीं छोड़े है आस

प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसा लग रहा है कि वे डूबे नहीं होंगे तो उन्हें खोज लिया जाएगा।


                         सलिल पांडेय, मिर्जापुर।

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