कृष्ण का युग आधुनिक कम्प्युटर युग से भी आगे था--
कोरोना वायरस पूतना और श्रीकृष्ण की प्रयोगशाला--
संक्रमण फैलाने के लिए चीन की तरह कंस का षडयंत्र
भारत की संस्कृति में विभिन्न अवतारों में भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में श्रीकृष्ण के अवतार का उल्लेख है । त्रिकालदर्शी ऋषियों ने अवतारों की महिमा गायी है । इस महिमा के पीछे सिर्फ भक्ति-भाव ही नहीं बल्कि आधुनिक युग में प्रत्यक्ष दिख रहे कम्प्यूटर युग के विकास की ओर संकेत मिलता है । श्रीकृष्ण के जन्म पर सूक्ष्म दृष्टि डालने से स्पष्ट है कि उनके जन्म लेते ही कुछ ऐसे चमत्कार हुए जिससे उस काल और वर्तमान युग में हो रहे कम्प्यूटर एवं अंतरिक्ष सम्बन्धित विज्ञान में भारी समानता थी । वर्ष का सर्वाधिक घने अंधकार का महीना वर्षा ऋतु का होता है । क्योंकि आकाश में घने बादलों के चलते दिन भी अंधेरे में लिपटा रहता है । कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि तक चन्द्रमा की रोशनी आधी हो जाती है । इस अंधेरे से लड़ने का नाम ही विज्ञान है जिसका अवतरण भी श्रीकृष्ण के रूप में होता है । विज्ञान का काम ही है कि विकास के लिए प्रकृति में व्याप्त ऊर्जा एवं शक्तियों को खोजना । जो निरन्तर जारी है । इस दृष्टि से आधुनिक कम्प्यूटर साइंस के पूर्ण वैज्ञानिक श्री कृष्ण होते हैं । कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में कड़े पहरे के बीच होता है लेकिन श्रीकृष्ण का कारागार के ताले और गेट को बिना ध्वनि के तोड़कर बाहर निकलना आधुनिक कम्प्यूटर साइंस के जरिए कंस की सुरक्षाव्यवस्था के सिस्टम पर अपना नियंत्रण कायम करना प्रतीत होता है । कंस को जब अपने सिस्टम की विफलता की जानकारी होती हैं तो वह क्रोधित (ब्लास्ट) होता है और योगमाया रूपी साफ्टवेयर को नष्ट करने की कोशिश करता है लिहाजा अंतरिक्ष से भयानक विस्फोट योगमाया की आकाशवाणी के रूप में होता है । कारागार से निकलते समय श्रीकृष्ण ने टेलीपैथी का सहारा लिया, जिसकी वजह से जो चाहा, वह होता गया ।
श्रीकृष्ण का अल्ट्रानोट बुक (टच-स्क्रीन) सिस्टम
कारागार से निकलने के बाद भी श्रीकृष्ण आधुनिक प्रौद्योगिकी के सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता के रूप में दिखाई देते हैं । वसुदेव यमुना नदी से नन्द के गोकुल जाते हैं । यमुना में भयानक बाढ़ है लेकिन लगता है कि कृष्ण अल्ट्रानोटबुक (टच स्क्रीन लैपटॉप) की तरह अपने शरीर के वेव्स से यमुना का जलस्तर अनुकूल बना लेते हैं । यमुना घट जाती हैं । जिस टोकरी में कृष्ण हैं, वह कोई साधारण टोकरी नहीं कोई सेटेलाइट है जिससे अंतरिक्ष से लेकर पाताल तक नियंत्रण हो रहा है । कृष्ण के कम्प्यूटरीकरण का असर गोकुल में तो खूब दिखता है । उनपर पूतना, प्रलम्बासुर, अघासुर, व्योमासुर आदि जितने वायरस का हमला होता है, वे उसे एंटीवायरस से नियंत्रित करते हैं । यमुना में कालिया नाग के प्रदूषण को दूर करने के लिए अपनी प्रौद्यौगिकी का पूरा इस्तेमाल करते हैं जिसे वर्तमान समय में विभिन्न नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है ।
श्रीकृष्ण का इंटरनेट सिस्टम और अर्जुन को ड्रोन हमले से अवगत कराना
इस दृष्टि से देखा जाए तो कृष्ण का कम्प्यूटर सिस्टम आज से कहीं अधिक प्रभावी था । मां यशोदा को मुंह खोलकर पूरे ब्रह्मांड का दर्शन कराना तथा आगे चलकर युद्ध के मैदान में अर्जुन को विराट रूप दिखाना सशक्त इंटरनेट सिस्टम से परिचित कराना है । इस इंटरनेट सिस्टम से वे जब अर्जुन को ड्रोन हमले से परिचित कराते हैं तब अर्जुन इस आधुनिक विज्ञान को समझकर युद्ध के लिए सहर्ष तैयार हो जाते हैं । द्वारिकापूरी में मिलने आए सुदामा का अतिभव्य घर वहीं से बनवा देना भी वैज्ञानिक प्रयोग है । क्योंकि सुदामा द्वारिकापुरी से चलकर जब ब्रज पहुंचे तो खुद अपना घर नहीं पहचान सके । कृष्ण के बाल्यकाल से लेकर महाभारत के युद्ध के दौरान एवं उसके बाद स्वर्गलोक तक की यात्रा कम्प्यूटर साइंस की तरह प्रतीत होती है । अंतिम समय मे बहेलिए ने अपने वायरसयुक्त तीर से कृष्ण के सॉफ्टवेयर को हैक कर दिया जिससे उनका सिस्टम निष्प्रभावी हो गया
कोरोना और पूतना
पूतना कोरोना वायरस थी। कृष्ण को संक्रमित करना चाह रही थी। चीन की तरह कंस इस वायरस का मुख्य स्रोत था। पूरे गोकुल में वायरस अटैक की जानकारी होते श्री कृष्ण के प्रयोगशाल में वह समूल नष्ट हो जाती है।
©सलिल पांडेय, प्रेमघनमार्ग, मिर्जापुर ।



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