तीज की महत्ता को किया सीज कुछ ख़ौफ़ ने तो कुछ नियम-कानून ने
मिर्जापुर । कोरोना का रूप जलन्धर और भस्मासुर जैसा बना रहा हृतालिका तीज पर । इन दैत्यों से बचने के लिए *महादेव* खुद असहज हो गए थे तो भक्तों को भी अपने इष्टदेव का अनुकरण एवं अनुसरण तो करना ही पड़ेगा लिहाजा वर्ष 2020 का तीजपर्व 20 कौन कहे उससे कई पायदान नीचे आ गया था।
गांव और शहर के संगम में कोरोना ने बनाई कंक्रीट की दीवार
हरितालिका तीज पर जिले में गांव और शहर का संगम हर साल होता रहा। गांव और शहर के बीच रिश्ते की डोर में बनी विवाहिताएं जब स्नान के लिए आती थीं तब *भेंट अकवार* का रस्म होता था जो इस बार नहीं हो सका ।
क्या है भेंट-अकवारइसकी प्रथा यह है कि कोई लड़की हलिया की है और उसकी शादी चील्ह में हुई है तब दोनों परिवार की महिलाएं स्नान के लिए किसी निश्चित घाट पर आती थीं और स्नान के बाद दोनों पक्ष की महिलाएं गले मिलती थी। गले मिलते समय दोनों पक्ष की महिलाएं *रोती* भी थीं । ये रोना हर्ष के साथ होता था। चूंकि चन्द लम्हों में विलग हो जाना है, इसलिए आपसी रुदन होना स्वाभाविक होता है।
एक चौथाई महिलाएं ही स्नान के लिए आईं
महिलाओं की जबरदस्त भीड़ वाले घाट पक्काघाट हो या बरियाघाट दोनों जगह भीड़ अन्य वर्षों की अपेक्षा 25% ही थी। हर रोज कोरोना संक्रमण और मृत्यु की खबरों से नवविवाहिताएँ जिनके बच्चे गोद वाले हैं, वे डर कर इसलिए नहीं आईं कि यदि कहीं संक्रमित हुईं तो बच्चे के पालन-पोषण में दिक्कत होगी।
पक्केघाट और बरियाघाट का फीका स्नानइन घाटों पर घाट के एक किमी पहले से ही वाहनों की कतार लगती थी। पुरुषों को घाट पर जाने से पुलिस रोक देती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। बरियाघाट त्रिकोणीय घाट है। पहलवान बाबाघाट जिस पर पुरुष स्नान करते हैं। दूसरा जनानाघाट और तीसरा टेलिनियघाट । तीनों घाट तीज पर महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाते थे लेकिन इस बार इसकी जरूरत नहीं पड़ी ।
बाकी जो कुछ बचा तो वर्षा मार गई
कोरोना को ललकारते जो महिलाएं घाटों पर आईं भी तो शाम 5:30 से शुरू हुई वर्षा के चलते बिना कहानी सुने चली गईं। वरना घण्टों शिव-पार्वती की कथा होती रही है।
कचहरी घाट लॉकअप मेंकोरोना के चलते जनपद न्यायाधीश परिसर से जाने वाले घाट पर इनदिनों ताले लगे हैं । लिहाजा यहां स्नान करने वाली महिलाएं बरियाघाट पर आईं ।
20/- दर्जन बिका केला
अलग-अलग रस्मो-रिवाज में ग्रामीण क्षेत्र की बहुत सी महिलाएं शाम को स्नान कर केला खाकर पारण करती हैं । भीड़ कम होने से 50/-दर्जन बिकने वाला केला त्रिमुहानी पर 20/-तक नीचे चला आया।
राहु बना कोरोना
इस प्रकार तीज के दिन कोरोना राहु बनकर आस्था को ग्रसित कर गया।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।





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