योगेश्वर कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ का जन्म-दिन है हलषष्ठी पर्व (ललही छठ)

 

छः आकांक्षाएं ईश्वराधीन

मिर्जापुर । बलदाऊ (बलराम) श्रीकृष्ण के 7वें नम्बर के भाई हैं  और 8वें स्वयं श्रीकृष्ण । पहले भाई का नाम कीर्तिमान था । जिसे कंस ने  मार दिया जबकि कंस से अनुनय-विनय किया गया कि वह नवजात शिशु को न मारे । फिर 6वें सन्तान तक कारागार से सीधे निकालकर मार डालता था ।

दोनों कृषि-संस्कृति के पोषक

    बलदाऊ हलधर और कृष्ण यानि कृषक प्रतिनिधि । बलदाऊ देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में भगवान विष्णु की व्यवस्था के तहत लाए गए । कारागार में यह प्रचारित हुआ कि देवकी का गर्भ नष्ट हो गया, जिसे सुनकर कंस बहुत प्रसन्न हुआ ।


6 आकांक्षाएं ईश्वराधीन

   पुत्र के दीर्घायु के लिए माताएं ब्रत रहती है । जीवन में 6 स्थितियों से गुजरना पड़ता है । 1-जन्म लेना, 2-संसार में रहना, 3- दिनोदिन बढ़ना, 4-अनुकूल परिस्थितियों के साथ जीना 5-विपरीत परिस्थितयों से संघर्ष, 6-अंत में चले महाप्रस्थान। धर्मग्रन्थों में 100 संख्या को महत्त्व दिया गया है। इसी क्रम में 'जीवेम् शरद:शतं' मंत्र वाक्य का उल्लेख भी है। लेकिन आगे 'शतं-अदीना:' का भी उल्लेख है जिसका आशय अदैन्य जीवन का भी उल्लेख है। यह दीनता रहित जीवन तभी प्राप्त हो सकता है जब हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश इन छ: आकांक्षाओं को विधि हाथ यानी भगवान पर छोड़ दिया जाए।

गर्भस्थ शिशु को मां से 6 तत्वों की होती है आपूर्ति

 इसके आलावा माँ के गर्भ से शरीर निर्माण के 6 अंश गर्भस्थ शिशु को प्राप्त होता है । 'रक्त-मज्जा-वसा- मांसा-अस्थि-मेदांसि-पार्वती' (दुर्गा सप्तशती) । जिसमें मज्जा और वसा अलग अलग तरह की चर्बी है । मांस ऊपरी तो मज्जा आंतरिक । मेदा पेट के अंदर एक विशेष प्रकार का अंश जहाँ खाद्य पदार्थ का रसायन में बदलाव् होता है ।

    इस प्रकार षष्ठी तिथि का प्रतीक उक्त तत्वों के जीवन पर्यन्त सुचारू बनाने के लिए माता द्वारा मानसिक शक्ति प्रदान करना भी है । ऋषियों की दृष्टि में स्त्री-पुरुष "ईश्वर अंश जीव अविनाशी'' के रूप में था । किसी काल-खण्ड में परिस्थियों के अनुसार बदलाव हुआ, वरना पूरा आध्यात्म देवी से शक्ति लेने के उदाहरणों से भरा हुआ है । ललही छठ की और भी कथाएँ अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग प्रचलित हैं।


    -सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर ।

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