रजनीकांत अवस्थी
बछरावां/रायबरेली: विकास खंड क्षेत्र बछरावां के अंतर्गत शंभू खेड़ा मजरे उमरपुर में आने जाने के लिए कोई व्यवस्थित रास्ता नहीं है। जिसके कारण ग्रामीणों को गड्ढा और कीचड़ युक्त रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। मौजूदा प्रदेश सरकार साढ़े 3 साल से गड्ढा मुक्त सड़कों का दम भरती आ रही है। किंतु ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का हाल बेहाल है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
आपको बता दें कि, एक ऐसा ही मामला तहसील क्षेत्र के बछरावां विकासखंड क्षेत्र के शंभू खेड़ा गांव का प्रकाश में आया है, जहां आने जाने के मुख्य मार्ग ने जगह जगह तालाब का रूप ले लिया हैं। कीचड़ और गड्ढा युक्त सड़कों से लोगों को आने जाने में खासी परेशानी होती है। जिससे ग्रामीणों में सरकार और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आक्रोश देखने को मिला।
इस संवाददाता ने जब ग्रामीणों से बात की, तो पता चला बरसात के दिनों में आने जाने वाले राहगीरों को जगह जगह भारी गड्ढों में उतर कर जाना पड़ता है। जिससे आने जाने वाले लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते है। ग्रामीणों ने बताया कि, इस समय कोरोना महामारी के चलते विद्यालय बंद पड़े हैं, किंतु विद्यालय खुले होने की स्थिति में बच्चों को रास्ते में बनी लम्बी लम्बी खंतियो से होकर गुजरना पड़ता है। जिससे कई बार उनकी ड्रेसे तक खराब हो जाती है, कई बार तो वह कीचड़ में गिरकर चोटिल और लथपथ भी हो जाते हैं। रूधे गले से ग्रामीणों ने बताया कि, प्रधान जीतेंद्र कुमार यादव की उदासीनता के कारण सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी मुख्य सुविधाओं से उमरपुर का संभू खेड़ा गांव वंचित है। उपस्थित सभी ग्रामीणों ने जनपद के मुखिया डीएम वैभव श्रीवास्तव से आग्रह किया है कि, शंभू खेड़ा गांव का यह मार्ग दुरुस्त कराया जाए, जिससे लोगों को निर्वाध आने-जाने में सुविधा मिल सके।

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