राम के शासन काल में अयोध्या का राज्य वैभव शिखर पर पहुंचा तथा राम राज्य का प्रतीक बना।। Raebareli news ।।

यथा इक्ष्वाकु, पृथु, मान्धाता, हरिश्चंद्र, सागर, भागीरथ, रघु, दिलीप, दशरथ व राम ने कोशल देश की राजधानी अयोध्या से शासन किया

रजनीकांत अवस्थी

रायबरेली: अनेकों प्रख्यात राजा यथा इक्ष्वाकु, पृथु, मान्धाता, हरिश्चंद्र, सागर, भागीरथ, रघु, दिलीप, दशरथ तथा राम ने कोशल देश की राजधानी अयोध्या से शासन किया। उनके शासन काल में राज्य का वैभव शिखर पर पहुंचा तथा राम राज्य का प्रतीक बना।

     आपको बता दें कि, सरयू नदी के पूर्वी तट पर बसा अयोध्या नगर पुरातन काल के अवशेषों से भरा हुआ है। प्रसिद्ध महाकाव्य रामायण व श्री रामचरितमानस अयोध्या के ऐश्वर्य को प्रदर्शित करते हैं। रामायण का एक प्रकरण, प्राचीन इतिहास का एक पन्ना तथा पर्यटन आकर्षण का एक समूह यह नगर तीर्थयात्रियों, इतिहासविदों, पुरातत्ववेत्ताओं तथा विद्यार्थियों हेतु प्रमुख केंद्र रहा है। अयोध्या एक ऊंचे भूभाग पर स्थित है, तथा मंदिरों से परिपूर्ण है, यह अयोध्या के प्रमुख आकर्षणों में से एक है।हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यहाँ चैत्र मास में (मार्च-अप्रैल) में राम नवमी का पर्व बहुत ही वैभव व धूमधाम से मनाया जाता है। इस समय न केवल पूरे देश बल्कि विश्व भर से तीर्थयात्री यहाँ एकत्र होते हैं, तथा भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। हनुमान गढ़ी: इसका निर्माण एक किले की आकृति में हुआ है, तथा 76 सीढ़ियाँ चढ़ कर यहाँ पहुंचा जा सकता है, इस तीर्थ नगर में 10वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिर स्थित हैं। इसके हर कोने पर वृत्ताकार मोर्चाबंदी की गई है, तथा ऐसा विश्वास किया जाता है कि, यह वह स्थान है जहां हनुमान जी एक गुफा में रहे थे, तथा नगर की रक्षा की थी। इस मंदिर में हनुमान जी की एक स्वर्ण प्रतिमा स्थापित है, यह अयोध्या के सबसे सम्मानित स्थानों में से एक माना जाता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु हनुमान जी के पूजन तथा बुराइयों से अपनी रक्षा तथा समृद्धि व प्रसन्नता हेतु हनुमान गढ़ी के दर्शन करते हैं।

     कनक भवन: टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) की रानी वृषभानु कुंवरि, ने 1891 में उत्कृष्टता से अलंकृत इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मुख्य मंदिर में एक आंतरिक खुला भाग है, जहां रामपद का एक पवित्र मंदिर है। सीता माता तथा भगवान राम के साथ उनके तीनों भ्राताओं की मूर्तियां अत्यंत सुंदर प्रतीत होती हैं। खरीददारी: अयोध्या में प्रवेश करने पर आपका स्वागत सड़कों के दोनों ओर लगी दूकानों से होगा। यह लोगों के लिए अपने मंदिरों में प्रयोग होने वाली सामग्री के भंडारण हेतु बिलकुल उपयुक्त स्थान है। मूर्तियों से लेकर, आभूषण, मूर्तियों के वस्त्र, हल्दी, कुमकुम व चन्दन आदि। केवल यही नहीं, आप यहाँ से सुंदर चूड़ियाँ, तांबे के फूलदान तथा विभिन्न देवताओं के होलोग्राफ़िक पोस्टर भी खरीद सकते हैं। अयोध्या संगमरमर से निर्मित देवी देवताओं की मूर्तियों हेतु भी प्रसिद्ध है।



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