बछरावां/रायबरेली: विगत सोमवार को बछरावां विकास खंड की ग्राम सभाओं में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनने वाले सामुदायिक शौचालयों का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश सरकार के कई अन्य मंत्रियों सांसद व क्षेत्रीय विधायक की उपस्थिति में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए लोकार्पण किया गया। विकासखंड परिसर में आनन फानन आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान खंड विकास अधिकारी प्रवीण कुमार, वरिष्ठ लेखाकार अरविंद बाजपेई सहित कुछ ग्राम विकास अधिकारी व कर्मचारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अधिकारियों की मजबूरी थी कि, सरकार की मंशा के अनुरूप उन्हें आनन-फानन इस कार्यक्रम को आयोजित कराना था। नतीजा यह हुआ कि, लगने वाले पत्थरों में खुदाई के बजाय पेंट से लिखवा कर काम चलाना पड़ा।
आपको बता दें कि, बछरावा विकासखंड ही नहीं पूरे जनपद में अभी किसी भी विकासखंड में शौचालय पूरे नहीं है। कहीं प्लास्टर हो रहा है, तो कहीं स्लैब पड़ रही है। कहीं-कहीं तो अभी नीव ही भरी गई है। जिन प्रधानों ने इसे बनवाने में तेजी दिखाई है, वह रो रहे हैं। क्योंकि दुकानदारों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा पैसा ही नहीं भेजा जा रहा है। किसी किसी ग्राम सभा में तो, राष्ट्रीय वित्त आयोग के खाते को जोड़ा ही नहीं गया है। नतीजा यह है कि, भुगतान नहीं हो पा रहा है।सरकार द्वारा की जा रही इस जल्दबाजी को जनप्रतिनिधियों से लेकर आम आदमी तक वोट की राजनीति मान रहा है। आम आदमी का कहना है कि, सरकार द्वारा बनवाए जा रहे इन शौचालयों को वोट बैंक के रूप में देखना सरकार की बहुत बड़ी भूल है। यह पैसा पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि, सरकार द्वारा जब लोगों के घरों में शौचालय बनवाए गए हैं। और वह उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो इन सामुदायिक शौचालय का कोई औचित्य नहीं था। इनका कितना प्रयोग होगा यह बात तो समय के गर्भ में है। वही लोगों का मानना है कि, सरकार के इस कदम से गांव का विकास पूरी तरह रुक गया है। जिस पैसे से गांव की नालियां मार्ग आदि बनने थे। उस पैसे से सामुदायिक शौचालय बनवा कर जनता के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। उधर नाम ना छापने की शर्त पर प्रधानों द्वारा यह आरोप है कि, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गांव का विकास बद से बदतर हो गया है। अगर सरकार यह सोचती है कि, चंद लोगों को मुफ्त राशन, कुछ महीने फ्री गैस, आधे अधूरे किसानों के खाते में कुछ पैसे डाल कर वह अपना वोट बैंक बना रही है, तो यह उसकी भूल है। मिट्टी के मोल बिक रहा किसान का धान, आवारा जानवरों से बर्बाद हो रही फसलें, बाधित किया गया गांव का विकास, हिटलर शाही के फरमान, आगामी 2022 के चुनाव में इस सरकार को नेस्तनाबूद कर देने के लिए पर्याप्त है।
विकासखंड परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम को कर्मचारियों द्वारा मजबूरी में संपन्न तो करा दिया गया, परंतु अंदर ही अंदर वह भी जानते हैं कि, आम जनता इस कदम का उपहास उड़ा रही है।


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