शिवाकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: अब जबकि किसानों को धान की नर्सरी के लिए पानी की बहुत आवश्यकता है, लेकिन सिंचाई विभाग की दोनों मुख्य पोषक नहरें शारदा सहायक और जौनपुर ब्रांच में पानी की जगह धूल उड़ रही है। यही हाल इससे निकली माइनरों का है, सब की सब सूखी पड़ी है, और किसान धान की बेढ़न करने के लिए परेशान है। एक अनुमान के मुताबिक किसानों की मुख्य धान की फसल जो लगभग 10000 हेक्टेयर में की जाती है, यदि शीघ्र ही नेहरों में पूरी क्षमता से पानी ना छोड़ा गया, तो बेढ़न ना हो पाने की वजह से धान की उपज पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। क्षेत्रीय किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि, व्यापक जनहित में तत्काल नहरों में पानी छुड़वाया जाए।
आपको बता दें कि, महराजगंज तहसील के परगना सेमरौता, हरदोई, बछरावां तथा कुंम्हरावां मे धान की खेती किसानों की मुख्य उपज होती है। पूरी तहसील में एक से एक अच्छी क्वालिटी का धान पैदा किया जाता है। इंसानों में बासमती, नन्हचुनिया बादशाह और बादशाह पसंद, कनकजीर, कालानमक मुख्य रूप से शामिल है। जिसकी मांग जिले ही नहीं बल्कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों से भी होती है। किसान श्याम भवन सिंहइसी प्रकार अहलादी का पुरवा मजरे मऊ के रहने वाले छोटे किसान रामकिशोर पासी ने बताया कि, उनके 2 बीघा खेत मुख्य रूप से नहर के पानी पर ही निर्भर करते हैं, लेकिन नहरों के बंद होने से वह धान की पौध नहीं डाल सके हैं।
किसान अवधेश मिश्रामऊ गांव के ही रहने वाले किसान अवधेश कुमार मिश्रा ने बताया कि, उन्होंने अपने 3 बीघे जमीन के लिए बेढ़न की तैयारी कर रखी थी, लेकिन जिस दिन उन्हें बेढ़न करना था, उस से 2 दिन पहले ही जौनपुर ब्रांच के मुख्य नहर में पानी ही बंद हो गया। पास पड़ोस में ट्यूबवेल नहीं है, जिससे वह नर्सरी कर सके।
किसान भगवान दास साहूइसके अलावा 12 बीघे के काश्तकार मऊ सर्की गांव के रहने वाले भगवान दास साहू की भी यही समस्या है। हालांकि उन्होंने थोड़ी बेढ़न समय रहते बो दी थी, लेकिन समस्या यह है कि, बेढ़न तैयार है। लेकिन खेतों में अब पानी नहीं है, की रोपाई की जा सके। इस प्रकार किसानों की समस्या बढ़ती जा रही है।
आपको यह भी बता दें कि, क्षेत्र में दो मुख्य पोषक नेहरे जिसमें जौनपुर ब्रांच नहर से चंदापुर रजबहा, ताजुद्दीनपुर माइनर, खेरवा माइनर, मऊ माइनर, मुरैनी माइनर, सिकंदरपुर माइनर, समरहा माइनर जैसी दर्जनों माइनरें निकली हुई है, जिससे मऊ, मुरैनी, सिकंदरपुर, महाबलगंज, खेरवा, कठींगर, ज्योना, चंदापुर आदि गांव के हजारों बीघा जमीन को पानी मिलता है। इसी प्रकार शारदा सहायक नहर से रायबरेली रजबहा, महराजगंज माइनर, कोटवा मदनिया माइनर, सारीपुर माइनर, सलेथू रजबहा, इंदौरा माइनर, बरहुंआ माइनर, असनी माइनर, सुल्तानपुर माइनर, सड़कहा पुरवा माइनर, बल्ला माइनर जैसी दर्जनों अल्टिकाएं और रजबहा निकले हैं। यहां भी लगभग 10000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के पानी के लिए निर्भर हैं। अब जबकि मई माह बीत चुका है, यदि आगामी दो-तीन दिनों में इन नहरों में पूरी क्षमता से पानी नहीं छोड़ा जाता है, तो इसमें संदेह नहीं है कि, धान की उपज बुरी तरह से प्रभावित होगी, और किसानों को भी भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। इस बारे में उप जिलाधिकारी सविता यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि, मामला संज्ञान में आ गया है। शीघ्र ही वह इस मामले से जिलाधिकारी महोदय को अवगत करा कर जल्द से जल्द पानी नहरों में लाने की व्यवस्था करेंगी।










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