कुंठित भावना का इजहार करने वाले व्यक्ति के साथ कहीं इस प्रकार की घटना ना हो, ताकि उसे यह सोचने पर मजबूर होना पड़े, की उसने भी किसी गरीब का मजाक उड़ाया था।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: बीते शुक्रवार/शनिवार की रात कोतवाली क्षेत्र के गांव पूरे अहलादी मजरे मऊ गर्बी में बेहद गरीब व्यक्ति कल्लू पुत्र राम आसरेे धोबी और रामनाथ के उपलों में लगी आग का मामला तूल पकड़ रहा है। पहली बात एक गरीब की जीविका का सहारा छिन गया, तो दूसरी बात यह है कि, आग लगाने वालों का मकसद क्या था, क्या केवल उपलो को जलाने के लिए ही आग लगाई गई, या इसके पीछे बड़ी घटना को अंजाम देना था। यह बात लोगों के मन में शंका का रूप धारण कर रही है। वहीं दूसरी ओर अग्निकांड की इस घटना को पुलिस या इस पर सवाल उठाने वाले लोगों की नियत में भी खोट साफ साफ नजर आ रहा है।

    आपको बता दें कि, घटना के 24 घंटे बीत चुके हैं, जांच के नाम पर पुलिस के कुछ लोग मौके पर तो गए, लेकिन जांच की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं इस घटना को बेहद मामूली घटना मानकर कुछ विकृत मानसिकता के लोग सवाल उठा रहे हैं। हमारा मानना है कि, गांव के पश्चिम दिशा में लगे उपलो के दो बड़े ढेर में आग लगाने का मकसद कहीं हवा के झोंकों से उठी चिंगारियां, अन्य आवासीय इलाकों को तो अपने आगोश में भी ले सकती थी। मकसद साफ जाहिर है कि, उपलो को जलाने के साथ बस्ती में आग लगाने की मनसा से भी यह कार्य किया जा सकता है।

    एक ओर देखें तो बेहद गरीब तबके का कल्लू और रामनाथ मेहनत करके उसने उपलो का ढेर जमा कर रखा था, की बीमारी आजारी या अन्य किसी काम में पैसे जुटाने के लिए उपलो का ढेर ही उसका सहारा था। इस महंगाई के दौर में गरीब परिवार के लिए हजार दो हजार की रकम भी बहुत बड़ी धनराशि होती है। उसका सहारा छिन गया। उपहास उड़ाने वाले या तो अरबपति खरबपति परिवार के हैं, या उनकी मानसिकता ही दूसरों के नुकसान में मजाक उड़ाना हो सकता है।

     ऐसे लोगों की बुद्धि पर हम ही नहीं, जिस जिस ने इस कमेन्ट को पढ़ा, उसने ऐसी कुत्सित मानसिकता के लोगों को नकारा है, जिस प्रकार अरबपति खरबपति के लिए उनका आशियाना सब कुछ होता है, तो गरीब कल्लू व रामनाथ के लिए उपलो के यह ढेर उसकी जमा पूंजी ही वह मांगता है। रही खबर लिखने की बात तो, दृष्टिकोण अपना अपना, पढ़ने वालों का दृष्टिकोण अपना अपना। जो जिस मानसिकता का होगा, उसी प्रकार की प्रतिक्रिया करेगा।


                          घटनास्थल की फोटो

    एक पत्रकार होने के नाते किसी भी घटना की समीक्षा करना पत्रकार का काम है, और पाठकों को यह पूरी स्वतंत्रता है कि, वह घटना को अपने चश्मे से देखें! हमारे लिए गांव का गरीब कल्लू और रामनाथ भी उतना ही महत्व रखता है, जितना गांव या क्षेत्र का बड़ा पूंजीपति। अगर गरीब की कुटिया जलती है, तो यह कुटिया उस गरीब के लिए महल के समान होती है। जिसका दर्द उस गरीब को होता है। हम इस दर्द को बड़े और छोटे के तराजू में नहीं तौल सकते।

                           घटनास्थल की फोटो

इस खबर को यह कहकर कि, यह यूपी की सबसे बड़ी खबर है। टिप्पणी करने वाले ने अपनी कुंठित भावना का इजहार किया है। मैं तो ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि, इस व्यक्ति के साथ कहीं इस प्रकार की घटना ना हो, ताकि उसे यह सोचने पर मजबूर होना पड़े, की मैंने भी किसी गरीब का मजाक उड़ाया था।

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